पुलिस ने जंतर मंतर पर अवैध तरीके से घुसने और पुलिस कार्रवाई में बाधा डालने के आरोप में कॉकरोच जनता पार्टी 14 सदस्यों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। इन्हें कोर्ट में पेश किया गया जहां से आशुतोष रांका और सौरभ दास को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
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दिल्ली पुलिस के अनुसार, इन लोगों ने निजी परिसर से होकर जंतर मंतर पर पहुंचने की कोशिश की, जिसे निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से बाहर किया जा चुका है। पुलिस ने सरकारी ड्यूटी में बाधा डालने के आरोप में दो प्राथमिकी दर्ज कीं। मामले में सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे के खिलाफ निरोधात्मक कार्रवाई भी की गई। विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट की अदालत ने सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया, जबकि अजिंक्य शिंदे को छह महीने तक शांति और सद्व्यवहार बनाए रखने के लिए पाबंद किया गया।
जंतर-मंतर प्रदर्शन मामले में दो प्राथमिकी दर्ज
दिल्ली पुलिस की ओर से जारी प्रेस नोट के मुताबिक, 13 अक्टूबर 2026 की सुबह सौरव दास, आशुतोष रांका, अजिंक्य शिंदे और कॉकरोच जनता पार्टी के 11 अन्य सदस्य जंतर-मंतर पहुंचे थे। पुलिस का आरोप है कि इन सभी ने एक निजी परिसर से होकर वहां पहुंचने की कोशिश की।
मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। पुलिस के अनुसार, इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने सरकारी ड्यूटी कर रहे पुलिसकर्मियों के काम में बाधा डाली। इसके बाद सभी 14 लोगों को हिरासत में लिया गया।
इस मामले में पहली प्राथमिकी संख्या 289/26 कनॉट प्लेस थाने में दर्ज की गई। इसमें धारा 223(क), 332 और 61(2) का उल्लेख है। दूसरी प्राथमिकी संख्या 128/26 संसद मार्ग थाने में दर्ज की गई, जिसमें धारा 221, 115(2), 132, 121(1) और 3(5) लगाई गई हैं। दोनों प्राथमिकी 13 अक्टूबर 2026 की हैं।
पुलिस ने बताया कि सभी 14 लोगों को संबंधित मामलों में कानून के अनुसार पाबंद किया गया।
सौरव दास और आशुतोष रांका को न्यायिक हिरासत
दिल्ली पुलिस के अनुसार, कानून के कथित बार-बार उल्लंघन और सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका को देखते हुए सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे के खिलाफ निरोधात्मक कार्रवाई की गई।
पुलिस ने यह भी दावा किया कि इन लोगों की ओर से सामाजिक माध्यमों के जरिए दूसरे लोगों को ऐसी गतिविधियों में शामिल होने के लिए उकसाने के कथित प्रयास किए गए थे।
तीनों को विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया। वहां भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 126 और 170 के तहत कार्यवाही शुरू की गई।
पुलिस की ओर से पेश विवरण और कानून के कथित बार-बार उल्लंघन से जुड़ी परिस्थितियों पर विचार करने के बाद मजिस्ट्रेट ने सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। पुलिस के अनुसार, अदालत ने रिहा होने पर दोबारा कानून का उल्लंघन करने और दूसरे लोगों को ऐसा करने के लिए उकसाने की आशंका को भी ध्यान में रखा।
अजिंक्य शिंदे को छह महीने तक शांति बनाए रखने की पाबंदी
इसी मामले में अजिंक्य शिंदे को अलग आदेश के तहत छह महीने तक शांति और सद्व्यवहार बनाए रखने के लिए पाबंद किया गया। इसके लिए उनसे पांच हजार रुपये के निजी मुचलके और जमानतदार की शर्त पूरी करने को कहा गया।
दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए पहुंचने, पुलिसकर्मियों के काम में कथित बाधा डालने और सार्वजनिक शांति बनाए रखने से जुड़े कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की गई है।












