ऑनलाइन रोमांस में सावधान रहिएगा। इस तरह के रोमांस के नाम पर हो रही साइबर ठगी सीमाहीन होती है। हाल ही में गुरुग्राम में हुए एक मामला इसका जीता जागता उदाहरण है। इंटरनेट पर किसी से दोस्ती होना, बातचीत बढ़ना और फिर प्रेम संबंध बन जाना आज आम बात है।
और पढ़ेंः डेटिंग ऐप्प फ्रॉडः बुजुर्ग को ऐसे जाल में फंसाया और ठग लिया
सोशल मीडिया और दूसरे ऑनलाइन माध्यमों ने लोगों को एक-दूसरे से जुड़ने के नए अवसर दिए हैं। लेकिन इसी सुविधा का फायदा साइबर ठग भी उठाते हैं। वे दोस्ती और प्यार का भरोसा जीतकर शादी का वादा करते हैं और फिर पैसों की मांग शुरू कर देते हैं। ऐसे अपराध को ऑनलाइन रोमांस फ्रॉड कहा जाता है।
इस तरह की ठगी में अपराधी का निशाना कोई भी व्यक्ति हो सकता है। वह अलग शहर, राज्य या देश में बैठकर किसी से संपर्क कर सकता है। कई मामलों में पीड़ित को यह समझने में समय लग जाता है कि जिस रिश्ते को वह वास्तविक मान रहा था, उसका इस्तेमाल उससे पैसे ऐंठने के लिए किया जा रहा है।
इसलिए यह जानना जरूरी है कि ऑनलाइन रोमांस फ्रॉड कैसे होता है, ठग भरोसा जीतने के लिए कौन से तरीके अपनाते हैं और ऐसे किसी मामले में अपनी सुरक्षा कैसे की जा सकती है।
ऑनलाइन रोमांस फ्रॉड क्या होता है?
ऑनलाइन रोमांस फ्रॉड एक तरह की साइबर ठगी है, जिसमें अपराधी सोशल मीडिया, विवाह संबंधी वेबसाइटों या दूसरे ऑनलाइन माध्यमों पर किसी व्यक्ति से संपर्क करता है। इसके बाद वह धीरे-धीरे भावनात्मक रिश्ता बनाने की कोशिश करता है। ठग खुद को नौकरीपेशा, कारोबारी या आर्थिक रूप से सक्षम व्यक्ति बता सकता है। कुछ मामलों में वह शादी करने या भविष्य साथ बिताने का वादा भी करता है। जब सामने वाला व्यक्ति उस पर भरोसा करने लगता है, तब वह आर्थिक मदद मांगता है।
और पढ़ेंः पिग बुचरिंग स्कैम: प्यार के जाल में फंसाकर नकली क्रिप्टो ऐप से कैसे लूटते हैं साइबर ठग?
पैसे मांगने के लिए नौकरी छूटने, अचानक बीमारी आने, कारोबार में नुकसान होने या किसी जरूरी काम का बहाना बनाया जा सकता है। शुरुआत में मांगी गई रकम छोटी हो सकती है, लेकिन भरोसा बढ़ने के साथ मांग भी बढ़ सकती है। पैसे मिलने के बाद ठग संपर्क तोड़ सकता है, पीड़ित को ब्लॉक कर सकता है या रकम वापस करने के नए बहाने बना सकता है।
प्यार के नाम पर ठगी करने वाले कैसे जीतते हैं भरोसा?
1. आकर्षक प्रोफाइल और झूठी पहचान
ठग किसी दूसरे व्यक्ति की तस्वीरों का इस्तेमाल करके नकली प्रोफाइल बना सकते हैं। प्रोफाइल में अच्छी नौकरी, कारोबार, विदेश में रहने या संपन्न जीवन से जुड़ी जानकारी दी जा सकती है। इसका उद्देश्य सामने वाले व्यक्ति को प्रभावित करना और बातचीत शुरू करना होता है।
किसी प्रोफाइल पर अच्छी तस्वीरें, बड़ी संख्या में मित्र या आकर्षक जानकारी होना उसकी वास्तविक पहचान का प्रमाण नहीं है।
2. शादी और भविष्य के वादे
बातचीत के दौरान ठग जल्दी ही गहरा भावनात्मक रिश्ता बनाने की कोशिश कर सकता है। वह शादी, साथ रहने या भविष्य में मिलने की बातें करके भरोसा पैदा करता है।
कई बार वह सामने वाले व्यक्ति पर भावनात्मक दबाव भी डालता है। ऐसे में पीड़ित को लग सकता है कि आर्थिक मदद करना रिश्ते के प्रति उसकी जिम्मेदारी है।
3. अचानक पैसों की जरूरत
जब भरोसा बन जाता है, तब किसी परेशानी का हवाला देकर पैसे मांगे जा सकते हैं। ठग कह सकता है कि उसकी नौकरी चली गई है, बैंक खाता बंद हो गया है या किसी जरूरी भुगतान के लिए तुरंत रकम चाहिए।
कुछ मामलों में वह पैसे लौटाने की तारीख भी बताता है। लेकिन उसकी बातों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि किए बिना रकम भेजना जोखिम भरा है।
4. तस्वीरों और वीडियो का इस्तेमाल
आज किसी व्यक्ति की तस्वीर या वीडियो देखकर उसकी पहचान पर पूरी तरह भरोसा करना सुरक्षित नहीं है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से बनाए गए वीडियो, बदली हुई तस्वीरें और दूसरी डिजिटल सामग्री भी धोखा देने के लिए इस्तेमाल की जा सकती हैं।
इसलिए वीडियो कॉल या तस्वीर को पहचान की अंतिम पुष्टि न मानें। यदि कोई व्यक्ति लगातार अपनी पहचान की स्वतंत्र पुष्टि करने से बचता है और साथ ही पैसे मांगता है, तो सतर्क हो जाएं।
इटली से गुरुग्राम तक पहुंचा मामला क्या सिखाता है?
ऑनलाइन रोमांस फ्रॉड की समस्या समझने के लिए इटली की एक महिला की शिकायत का मामला महत्वपूर्ण उदाहरण है।
उपलब्ध विवरण के अनुसार, 50 वर्षीय इतालवी महिला, जो रेगियो एमिलिया में आभूषणों के डिजाइन का काम करती है और उसके कई शोरूम हैं, इंस्टाग्राम पर एक भारतीय व्यक्ति के संपर्क में आई। महिला का आरोप था कि उस व्यक्ति ने शादी का वादा करके उसका भरोसा जीता, कृत्रिम बुद्धिमत्ता से बनाए गए वीडियो भेजे और नौकरी छूटने का बहाना बनाकर पैसे मांगे।
बताया गया कि महिला ने दो किश्तों में लगभग 900 से 1,000 यूरो भेजे। इसके बाद कथित तौर पर संपर्क तोड़ दिया गया।
इटली में शिकायत पर कार्रवाई में देरी से निराश होकर महिला भारत आई और गुरुग्राम में सहायक पुलिस आयुक्त गौरव फोगाट से मिली। इसके बाद गुरुग्राम के साइबर अपराध थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई। उपलब्ध विवरण के अनुसार, पुलिस ने 36 वर्षीय अखिल मौर्य को गिरफ्तार किया। मामले में ठगी की रकम के अलग-अलग विवरण सामने आए हैं, इसलिए सटीक रकम की पुष्टि संबंधित अभिलेखों से की जानी चाहिए।
इस मामले से तीन महत्वपूर्ण बातें समझ आती हैं। पहली, सोशल मीडिया पर बनाई गई पहचान झूठी हो सकती है। दूसरी, प्यार और शादी के वादे का इस्तेमाल आर्थिक ठगी के लिए किया जा सकता है। तीसरी, जब पीड़ित और आरोपी अलग-अलग देशों में हों, तो शिकायत और जांच की प्रक्रिया कठिन हो सकती है।
यह किसी एक महिला या एक देश तक सीमित समस्या नहीं है। ऑनलाइन संपर्क के जरिए होने वाली ठगी में अपराधी और पीड़ित के बीच हजारों किलोमीटर की दूरी हो सकती है।
सीमापार साइबर ठगी की जांच क्यों मुश्किल होती है?
इंटरनेट पर बातचीत एक देश में शुरू हो सकती है, भुगतान किसी अंतरराष्ट्रीय सेवा के जरिए हो सकता है और आरोपी किसी दूसरे देश में मौजूद हो सकता है। सोशल मीडिया खाते, भुगतान का रिकॉर्ड और दूसरे डिजिटल साक्ष्य भी अलग-अलग जगहों पर हो सकते हैं।
ऐसी स्थिति में पुलिस को संबंधित खातों और लेनदेन की जानकारी जुटानी पड़ती है। दूसरे देश से डिजिटल साक्ष्य प्राप्त करने के लिए संबंधित कानूनी प्रक्रिया और एजेंसियों के बीच सहयोग की जरूरत पड़ सकती है।
पारस्परिक कानूनी सहायता संधियां और इंटरपोल के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय समन्वय ऐसे मामलों में मदद कर सकते हैं। हालांकि, हर मामले की प्रक्रिया उसके तथ्यों, उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित देशों के कानूनों पर निर्भर करती है।
पीड़ित के लिए भी परेशानी बढ़ सकती है। भाषा की समस्या, दूसरे देश की कानूनी व्यवस्था की जानकारी न होना और शिकायत पर कार्रवाई की स्थिति समझने में कठिनाई उसके लिए अतिरिक्त बाधाएं पैदा कर सकती हैं।
इसलिए साइबर अपराध से बचाव के साथ-साथ शिकायत दर्ज कराने की सरल व्यवस्था और देशों के बीच समय पर सहयोग भी जरूरी है।
ऑनलाइन रोमांस फ्रॉड से बचने के उपाय
पहचान की पुष्टि करें। किसी व्यक्ति की तस्वीर, प्रोफाइल या उसके अपने दावों को पर्याप्त प्रमाण न मानें। उसके बारे में उपलब्ध जानकारी की स्वतंत्र रूप से जांच करें।
जल्दबाजी में भावनात्मक निर्णय न लें। यदि कोई व्यक्ति बहुत कम समय में शादी या जीवनभर साथ रहने के वादे करने लगे, तो रिश्ते को समझने के लिए समय लें।
ऑनलाइन परिचित को पैसे न भेजें। विशेष रूप से तब, जब आपने उसकी पहचान और बताई गई परेशानी की स्वतंत्र पुष्टि न की हो। पैसे वापस करने का वादा भी भुगतान की सुरक्षा की गारंटी नहीं है।
निजी जानकारी सुरक्षित रखें। बैंक विवरण, पहचान संबंधी दस्तावेज, पासवर्ड और खाते में प्रवेश से जुड़ी जानकारी किसी ऑनलाइन परिचित को न दें।
दबाव बनाने वाली बातों से सतर्क रहें। यदि कोई व्यक्ति कहता है कि पैसे तुरंत भेजने होंगे, वरना रिश्ता खत्म हो जाएगा या कोई बड़ी परेशानी आ जाएगी, तो उसके दावे की जांच किए बिना भुगतान न करें।
डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखें। ठगी का संदेह होने पर बातचीत, प्रोफाइल का पता, फोन नंबर, भुगतान की रसीद और लेनदेन संबंधी जानकारी संभालकर रखें। शिकायत दर्ज कराते समय ये विवरण उपयोगी हो सकते हैं।
ऑनलाइन रोमांस फ्रॉड होने पर शिकायत कहां करें?
यदि भारत में आपके साथ ऑनलाइन रोमांस फ्रॉड या दूसरी साइबर ठगी हुई है, तो जल्द से जल्द संबंधित साइबर अपराध पुलिस या नजदीकी पुलिस थाने से संपर्क करें।
यदि पैसे का नुकसान हुआ है, तो तुरंत अपने बैंक या भुगतान सेवा प्रदाता को सूचित करें। वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की शिकायत के लिए भारत में 1930 हेल्पलाइन पर संपर्क किया जा सकता है। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in पर भी शिकायत दर्ज की जा सकती है।
शिकायत करते समय सही जानकारी दें और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखें। यदि अपराधी विदेश में है या मामला किसी दूसरे देश से जुड़ा है, तो पुलिस को यह जानकारी भी दें। अंतरराष्ट्रीय मामला होने के कारण शिकायत करना छोड़ देना उचित नहीं है।
ध्यान रखें कि पैसे वापस मिलने की गारंटी कोई हेल्पलाइन या शिकायत प्रक्रिया नहीं देती। इसलिए जितनी जल्दी कार्रवाई की जाएगी, उतनी जल्दी संबंधित संस्थाओं को सूचना पहुंचाई जा सकती है।
ऑनलाइन रिश्तों में भरोसा करें, लेकिन पैसों के मामले में सतर्क रहें
सोशल मीडिया पर हर दोस्ती या प्रेम संबंध धोखाधड़ी नहीं होता। समस्या तब पैदा होती है, जब कोई व्यक्ति भावनात्मक भरोसे का इस्तेमाल करके पैसे मांगता है, अपनी पहचान छिपाता है या आर्थिक मदद के लिए दबाव बनाता है।
ऑनलाइन रोमांस फ्रॉड से बचने का सबसे उपयोगी तरीका है कि रिश्ते और पैसों को अलग रखें। किसी व्यक्ति से भावनात्मक लगाव होने के बावजूद उसकी पहचान और आर्थिक दावों की पुष्टि करना जरूरी है।
इंटरनेट की मदद से अपराधी सीमाओं के पार लोगों तक पहुंच सकते हैं। ऐसे मामलों में जागरूकता, डिजिटल साक्ष्य को सुरक्षित रखना और समय पर शिकायत करना पीड़ित को आगे होने वाले नुकसान से बचाने में मदद कर सकता है।










