साइबर ठगी का खतरा अब मोबाइल फोन और बैंक खातों तक सीमित नहीं रह गया है। ठग डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लोगों को डराने के बाद उनकी संपत्ति तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। दिल्ली में 75 साल की एक कैंसर पीड़ित महिला के साथ हुई कथित ठगी का मामला इस खतरे की गंभीरता दिखाता है। आरोप है कि ठगों ने पहले उन्हें वीडियो कॉल के जरिए गिरफ्तारी का डर दिखाया और फिर गहने गिरवी रखने से लेकर करीब 2.4 करोड़ रुपये का घर बेचने तक के लिए मजबूर कर दिया।
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इस मामले में ठगी का तरीका इसलिए भी चिंताजनक है, क्योंकि इसमें ऑनलाइन धमकी के साथ वास्तविक दुनिया में भी कथित तौर पर उगाही की गई। यह उन लोगों के लिए चेतावनी है जो डिजिटल अरेस्ट को सिर्फ फोन पर होने वाली धोखाधड़ी समझते हैं।
पहले CBI और ED अधिकारी बनकर किया फोन
मामले के मुताबिक, दिल्ली के वसंत कुंज में अकेली रहने वाली 75 वर्षीय महिला को 6 अप्रैल 2026 को लैंडलाइन पर कॉल आया। फोन करने वालों ने खुद को CBI और प्रवर्तन निदेशालय (ED) का अधिकारी बताया। उन्होंने महिला से कहा कि उनका फोन नंबर मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले से जुड़ा है।
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इसके बाद महिला को लगातार WhatsApp वीडियो कॉल पर रखा गया। कथित ठगों ने पुलिस की वर्दी में वीडियो कॉल के जरिए अपनी पहचान को असली अधिकारी जैसा दिखाने की कोशिश की। महिला को बताया गया कि मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है। उन्हें यह भी धमकी दी गई कि यदि उन्होंने किसी को इस बारे में बताया तो विदेश में रह रहे उनके बच्चों को गिरफ्तार किया जा सकता है।
इस तरह लगातार निगरानी और गिरफ्तारी के डर के जरिए महिला को मानसिक दबाव में रखा गया। डिजिटल अरेस्ट के नाम पर होने वाली ठगी में इसी तरह सरकारी एजेंसियों का डर दिखाकर पीड़ित को परिवार और दूसरे लोगों से संपर्क करने से रोका जाता है।
गहने गिरवी रखवाए, करोड़ों का घर भी बिकवाया
आरोप है कि ठगों ने महिला से पहले 3 लाख रुपये अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करवाए। इसके बाद उनसे 83.5 ग्राम सोने के गहने मुथूट फिनकॉर्प में गिरवी रखवाए गए। इन गहनों के बदले करीब 5 लाख रुपये का गोल्ड लोन मिला, जिसे भी कथित तौर पर ठगों ने निकलवा लिया।
मामला यहीं नहीं रुका। महिला पर वसंत कुंज स्थित उनका घर बेचने का दबाव बनाया गया। इस संपत्ति की कीमत करीब 2.4 करोड़ रुपये बताई गई है। आरोप है कि ठगों ने प्रॉपर्टी डीलर और खरीदार के जरिए घर के मूल दस्तावेज हासिल किए और बिक्री की प्रक्रिया पूरी करवाई।
इस तरह महिला की बचत, गहनों और घर समेत जीवनभर की जमा पूंजी पर संकट आ गया। मामले में संपत्ति के लेनदेन से जुड़े लोगों की भूमिका और ठगी के पूरे नेटवर्क की जांच अहम है।
साइबर ठगी का यह तरीका पहले से अलग कैसे है?
डिजिटल अरेस्ट के नाम पर होने वाली ठगी कोई नई बात नहीं है। पहले भी ठग पुलिस, CBI, ED या दूसरी सरकारी एजेंसियों के अधिकारी बनकर लोगों को फोन करते रहे हैं। लेकिन इस मामले में सामने आया कथित तरीका एक अतिरिक्त खतरे की ओर ध्यान खींचता है।
आमतौर पर डिजिटल अरेस्ट की ठगी में पीड़ित को वीडियो कॉल पर डराकर बैंक खाते से रकम ट्रांसफर करवाई जाती है। यहां आरोप है कि ठगी करने वालों ने ऑनलाइन संपर्क और धमकी के बाद संपत्ति की बिक्री जैसी वास्तविक गतिविधियों को भी अंजाम दिया।
इस तरह के मामलों में डिजिटल और भौतिक स्तर पर काम करने वाले लोगों के बीच संभावित तालमेल की जांच जरूरी हो जाती है। हालांकि, इस एक घटना के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि सभी डिजिटल अरेस्ट गिरोह अब इसी तरीके से काम कर रहे हैं।
इन संकेतों को नजरअंदाज न करें
अगर कोई फोन या वीडियो कॉल पर खुद को पुलिस, CBI, ED या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर गिरफ्तारी की धमकी देता है, तो सतर्क हो जाएं।
- वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी का डर: कोई अनजान व्यक्ति वीडियो कॉल पर खुद को अधिकारी बताकर गिरफ्तारी या कानूनी कार्रवाई की धमकी दे तो उसकी पहचान पर भरोसा न करें।
- पैसे या संपत्ति की मांग: जांच, केस बंद करने या गिरफ्तारी से बचाने के नाम पर पैसे, गहने या संपत्ति की मांग ठगी का बड़ा संकेत है।
- परिवार से बात करने पर रोक: अगर कोई व्यक्ति आपको परिवार, वकील या दोस्तों से संपर्क करने से रोक रहा है, तो तुरंत सतर्क हो जाएं।
- लगातार निगरानी: लंबे समय तक वीडियो कॉल पर बने रहने, कैमरा चालू रखने या हर गतिविधि की जानकारी देने का दबाव भी खतरे का संकेत है।
- जल्दबाजी में वित्तीय फैसले: डर या दबाव में गोल्ड लोन लेने, बैंक से रकम निकालने या घर बेचने जैसे फैसले बिल्कुल न करें।
डिजिटल अरेस्ट से बचने के लिए क्या करें?
याद रखें कि कोई भी असली पुलिस अधिकारी या जांच एजेंसी वीडियो कॉल पर किसी व्यक्ति को डिजिटल अरेस्ट नहीं करती। जांच या गिरफ्तारी की धमकी देकर पैसे ट्रांसफर करवाना या संपत्ति बेचने का दबाव बनाना वैध कानूनी प्रक्रिया नहीं है।
ऐसी कॉल आने पर तुरंत बातचीत बंद करें और अपने परिवार के किसी विश्वसनीय सदस्य को इसकी जानकारी दें। संबंधित पुलिस थाने या आधिकारिक माध्यम से मामले की पुष्टि करें। किसी भी अनजान व्यक्ति को बैंक संबंधी जानकारी, ओटीपी या संपत्ति के दस्तावेज न दें।
यदि आपके साथ साइबर ठगी हुई है, तो तुरंत साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत करें। आप राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल https://cybercrime.gov.in/ पर भी शिकायत दर्ज कर सकते हैं। यदि कोई व्यक्ति आपके घर आकर धमकी दे रहा है या जबरन दस्तावेज लेने की कोशिश कर रहा है, तो स्थानीय पुलिस से तत्काल संपर्क करें।
दिल्ली की यह घटना बताती है कि साइबर ठगी के नाम पर डराने-धमकाने का इस्तेमाल पीड़ित की पूरी संपत्ति को निशाना बनाने के लिए भी किया जा सकता है। ऐसे में सबसे जरूरी है कि किसी भी सरकारी अधिकारी के नाम पर आने वाली धमकी को बिना पुष्टि के सच न मानें और दबाव में आकर कोई बड़ा वित्तीय या संपत्ति संबंधी फैसला न लें।











