साइबर ठगी नेटवर्क का ठिकाना बदलने से आपको खतरा शायद ना हो मगर उनके नए तौर तरीकों से आपके लिए साइबर का खतरा बड़ा हो जाता है। तो इस खतरे से बचें कैसे? पहले समझिए कि साइबर क्राइम नेटवर्क का ठिकाना बदलने की बात क्यों की जा रही है? कहा जा रहा है कि कंबोडिया और म्यांमार में कार्रवाई के बाद श्रीलंका में ऐसे नेटवर्क की बढ़ती गतिविधियों ने नई चिंता पैदा कर दी है। मुंबई पुलिस की हालिया कार्रवाई ने इस चिंता को और बड़ा कर दिया है।
श्रीलंका में 2026 के शुरुआती महीनों में 1,000 से ज्यादा विदेशी नागरिकों को कथित साइबर अपराध गतिविधियों के मामलों में गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई है। इनमें चीन, वियतनाम और भारत के नागरिक भी शामिल हैं। यह संख्या 2024 में गिरफ्तार किए गए 430 विदेशी नागरिकों से काफी ज्यादा बताई गई है।
यह भी पढ़ेंः श्रीलंका बना साइबर ठगों का नया अड्डा? भारतीयों की बड़ी गिरफ्तारी ने बढ़ाया खतरा
यह आंकड़ा अपने आप में यह साबित नहीं करता कि श्रीलंका कंबोडिया का नया विकल्प बन चुका है। लेकिन इतना जरूर बताता है कि एशिया में चल रहे बड़े साइबर स्कैम नेटवर्क अपनी जगह और काम करने का तरीका बदल रहे हैं।
साइबर क्राइम का नया मॉडल
पहले साइबर ठगी को अक्सर किसी एक कॉल सेंटर, किसी एक वेबसाइट या किसी एक आरोपी से जोड़कर देखा जाता था। अब तस्वीर बदल चुकी है।
एक नेटवर्क में अलग-अलग देशों के लोग और अलग-अलग भूमिकाएं हो सकती हैं। कोई पीड़ित को फोन करता है। कोई WhatsApp पर संपर्क करता है। कोई बैंक अकाउंट उपलब्ध कराता है। कोई पैसा दूसरे खाते में भेजता है। इसके बाद रकम को कई स्तरों से गुजारकर क्रिप्टोकरेंसी में बदला जा सकता है।
यानी ठगी का पूरा सिस्टम एक crime supply chain की तरह काम कर सकता है। यही वजह है कि किसी एक देश में गिरफ्तारी या कार्रवाई के बाद पूरा नेटवर्क खत्म हो जाए, यह जरूरी नहीं है।
यह भी पढ़ेंः ऑनलाइन प्रिडेटर से कैसे बचें ? साइबर स्टॉकिंग, फेक प्रोफाइल और ऑनलाइन उत्पीड़न से सुरक्षा के तरीके
कंबोडिया के बाद श्रीलंका क्यों चर्चा में है?
कंबोडिया और म्यांमार लंबे समय से बड़े scam centres के लिए चर्चा में रहे हैं। इन जगहों पर बड़े compounds में लोगों से ऑनलाइन ठगी कराने के मामले सामने आते रहे हैं।
हालिया कार्रवाई के बाद कुछ नेटवर्क के नए ठिकाने तलाशने की बात सामने आई है। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में श्रीलंका के beach towns, hotels, apartments और office spaces में संदिग्ध scam operations पकड़े जाने की जानकारी दी गई है।
श्रीलंका की आसान visa व्यवस्था, उपलब्ध rental spaces और तेज इंटरनेट जैसी सुविधाओं को जांचकर्ताओं ने ऐसे नेटवर्क के लिए आकर्षक कारणों में गिना है।
लेकिन यहां एक जरूरी फर्क समझना होगा।
श्रीलंका में नेटवर्क की मौजूदगी बढ़ना और श्रीलंका का कंबोडिया जैसा बड़ा scam hub बन जाना, दोनों एक ही बात नहीं हैं।
कंबोडिया में scam economy कई वर्षों में बड़े पैमाने पर विकसित हुई थी। श्रीलंका में हालिया घटनाएं इस बात का संकेत जरूर हैं कि वहां ऐसे नेटवर्क जगह बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
गोवा की luxury villa से ₹500 करोड़ का कथित नेटवर्क
मुंबई क्राइम ब्रांच ने हाल ही में गोवा के Calangute Beach के पास एक luxury villa से संचालित कथित अंतरराष्ट्रीय cyber fraud racket का खुलासा किया है। जांच में एक Sri Lanka-based handler की भूमिका का संदेह जताया गया है। नोट के मुताबिक, करीब छह महीने में लगभग ₹500 करोड़ की रकम 150 से अधिक mule accounts के जरिए भेजी गई।
इसके बाद रकम को Dubai के रास्ते USDT यानी Tether cryptocurrency में बदलने का आरोप है। यहां mule account शब्द को समझना जरूरी है।
यह भी पढ़ें- म्यूल अकाउंट क्या है? ₹310 करोड़ के साइबर फ्रॉड रैकेट का खुलासा
Mule account वह बैंक अकाउंट होता है जिसका इस्तेमाल ठगी की रकम को प्राप्त करने और आगे भेजने के लिए किया जाता है। कई मामलों में अकाउंट धारक खुद पूरे अपराध की योजना का हिस्सा नहीं होता। उसे कमीशन या किसी अन्य लालच में अकाउंट उपलब्ध कराने के लिए तैयार किया जा सकता है।
यही कारण है कि cyber fraud में सिर्फ ठग को पकड़ना काफी नहीं होता। पुलिस को money trail, account holders, handlers और crypto transactions तक पहुंचना पड़ता है।
Digital Arrest से APK Scam तक, तरीका बदल रहा है
इस कथित नेटवर्क से कई तरह की fraud techniques जुड़ी बताई गई हैं।
1. Digital Arrest Scam
ठग पुलिस, CBI, ED या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बनकर फोन करते हैं।
फिर पीड़ित को बताया जाता है कि उसका नाम किसी money laundering या criminal case में आया है।
वीडियो कॉल पर रहने, किसी से बात नहीं करने और पैसे transfer करने का दबाव बनाया जाता है।
असल में कोई कानून किसी नागरिक को इस तरह वीडियो कॉल पर घंटों या दिनों तक “digital arrest” में नहीं रखता।
2. WhatsApp DP Fraud
इसमें ठग किसी पुलिस अधिकारी, सरकारी अधिकारी, रिश्तेदार या परिचित व्यक्ति की तस्वीर WhatsApp DP में लगाकर भरोसा पैदा कर सकता है।
फिर उसी पहचान का इस्तेमाल करके पैसे मांगने या sensitive information हासिल करने की कोशिश की जाती है।
इसलिए WhatsApp DP को पहचान का प्रमाण मानना सुरक्षित नहीं है।
3. APK Based Scam
APK एक Android application package file होती है।
ठग WhatsApp, SMS या social media के जरिए APK file भेज सकते हैं और इसे banking update, parcel tracking, police notice, KYC या किसी दूसरे बहाने से install करने के लिए कह सकते हैं।
ऐसी unknown APK install करना बेहद जोखिम भरा हो सकता है। इससे फोन में malicious software या unauthorized access का खतरा पैदा हो सकता है।
याद रखें: किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर APK install करना cyber security की बड़ी गलती हो सकती है।
₹500 करोड़ की money trail से क्या संकेत मिलता है?
अगर दिए गए मामले में जांच एजेंसियों का अनुमान सही साबित होता है तो ₹500 करोड़ और 150 से ज्यादा mule accounts का नेटवर्क एक महत्वपूर्ण संकेत होगा।
इससे तीन बातें समझ आती हैं।
पहली, cyber fraud अब छोटे स्तर का अपराध नहीं रह गया है।
दूसरी, पैसा एक बैंक अकाउंट से दूसरे बैंक अकाउंट में भेजकर तुरंत गायब नहीं होता। उसके पीछे कई intermediaries हो सकते हैं।
तीसरी, cryptocurrency और international transfers जांच को और कठिन बना सकते हैं।
लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि crypto transaction का कोई trace नहीं होता। Blockchain transactions में digital records मौजूद रहते हैं। जांच एजेंसियां इन्हें दूसरे financial और digital evidence के साथ जोड़कर money trail तैयार कर सकती हैं।
क्या श्रीलंका भारत के लिए ज्यादा बड़ा खतरा बन रहा है?
यही इस पूरी कहानी का सबसे महत्वपूर्ण सवाल है।
श्रीलंका भारत के बहुत करीब है। ऐसे में वहां मौजूद कोई transnational cybercrime network भारतीय नागरिकों को target कर सकता है। लेकिन सिर्फ भौगोलिक नजदीकी को खतरे का एकमात्र कारण नहीं माना जा सकता।
आज एक scammer भारत में बैठकर भी दूसरे देश के नागरिक को target कर सकता है। WhatsApp, Telegram, social media, VoIP और cryptocurrency ने अपराध की geographic boundary काफी हद तक कमजोर कर दी है।
इसलिए असली खतरा “श्रीलंका बनाम कंबोडिया” नहीं है।
असली खतरा है relocating cybercrime network।
कंबोडिया में कार्रवाई होने के बाद यदि कोई नेटवर्क श्रीलंका चला जाता है, फिर किसी दूसरे देश में चला जाता है, तो उसका target वही रह सकता है। तरीका भी वही रह सकता है।
बस उसका operational address बदल जाता है।
भारतीय यूजर को क्या करना चाहिए?
इस पूरी कहानी का सबसे जरूरी हिस्सा यही है।
आपको यह जानने की जरूरत नहीं है कि ठग इस समय Cambodia में है, Sri Lanka में है या किसी और देश में।
आपको उसके red flags पहचानने हैं।
अगर कोई अनजान व्यक्ति पुलिस या सरकारी अधिकारी बनकर डराता है, फोन काटें।
अगर कोई WhatsApp पर पहचान बताकर पैसे मांगता है, पहले दूसरे माध्यम से verification करें।
अगर कोई APK या unknown app install करने को कहता है, उसे install न करें।
अगर कोई investment में guaranteed return का दावा करता है, पैसा भेजने से पहले स्वतंत्र verification करें।
अगर कोई crypto में payment मांगता है, तो extra सावधानी रखें।
और सबसे महत्वपूर्ण बात, डर के कारण तुरंत पैसा transfer न करें।
Cyber fraud में ठग अक्सर पीड़ित को सोचने का समय नहीं देते। उनका पूरा खेल urgency और fear पर चलता है।
Cybercrime की अगली लड़ाई सिर्फ पुलिस की नहीं
कंबोडिया से श्रीलंका तक सामने आ रही घटनाएं एक बड़ा सबक देती हैं।
Cybercrime को रोकने के लिए सिर्फ arrests पर्याप्त नहीं हैं। Financial intelligence, banks, telecom companies, crypto exchanges, immigration authorities और international law enforcement agencies को साथ काम करना होगा।
भारत के लिए mule accounts पर कार्रवाई उतनी ही जरूरी है जितनी frontline scammers पर।
क्योंकि जिस दिन mule account बंद होगा, money flow टूटेगा। जिस दिन money trail टूटेगी, पूरे network पर दबाव बढ़ेगा।
इसी तरह fake job offers के जरिए युवाओं को विदेश ले जाकर scam centres में काम कराने का पहलू भी गंभीर है। Southeast Asia में ऐसे मामलों में लोगों को legitimate नौकरी का लालच देकर scam operations में फंसाने की घटनाएं सामने आई हैं।
निष्कर्ष
कंबोडिया पर कार्रवाई के बाद श्रीलंका में cyber scam networks की गतिविधियां बढ़ने की खबरें एक अहम warning हैं। लेकिन इसे यह कहकर देखना कि श्रीलंका ने पूरी तरह कंबोडिया की जगह ले ली है, अभी जल्दबाजी होगी।
असल कहानी इससे बड़ी है।
साइबर ठगों का ठिकाना बदल सकता है, लेकिन उनकी रणनीति वही रहती है।
Digital Arrest, fake identity, WhatsApp fraud, malicious APK, mule accounts और crypto transfers इस बदलते नेटवर्क के अलग-अलग हिस्से हो सकते हैं।
इसलिए आम इंटरनेट यूजर के लिए सबसे जरूरी सवाल यह नहीं होना चाहिए कि ठग किस देश में बैठा है।
सवाल यह होना चाहिए:
“क्या मैं उस तरीके को पहचान सकता हूं, जिससे वह मुझे ठगने की कोशिश कर रहा है?”
यही awareness किसी भी international cybercrime network के खिलाफ पहली सुरक्षा है।










