एक अनजान व्यक्ति सोशल मीडिया पर दोस्ती करता है। बातचीत धीरे-धीरे रोजाना होने लगती है। फिर रिश्ते में भरोसा पैदा होता है और एक दिन सामने वाला क्रिप्टोकरेंसी या ऑनलाइन ट्रेडिंग में निवेश की सलाह देता है। शुरुआत में ऐप पर पैसा बढ़ता हुआ दिखाई देता है। मुनाफा इतना बड़ा दिखता है कि निवेशक को लगता है कि उसे कमाई का आसान रास्ता मिल गया है।
लेकिन जब वह पैसा निकालने की कोशिश करता है तो कहानी बदल जाती है। ऐसी ही साइबर ठगी को पिग बुचरिंग स्कैम कहा जाता है। इसमें ठग पहले पीड़ित के साथ भावनात्मक रिश्ता बनाते हैं और बाद में उसे नकली निवेश प्लेटफॉर्म, क्रिप्टोकरेंसी ऐप या फर्जी ट्रेडिंग वेबसाइट पर पैसा लगाने के लिए तैयार करते हैं।
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हाल में हांगकांग में सामने आया एक मामला इस पूरे साइबर फ्रॉड मॉडल को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
हांगकांग में नकली क्रिप्टो ऐप से करोड़ों की ठगी
हांगकांग पुलिस के अनुसार 24 से 30 जुलाई 2026 के बीच वहां रोमांस फ्रॉड के 25 मामले दर्ज किए गए। इन मामलों में कुल नुकसान करीब HK$70 मिलियन बताया गया।
इनमें सबसे बड़ी घटना में लगभग 50 वर्ष की एक महिला बीमा एजेंट से करीब HK$26 मिलियन, यानी लगभग 3.3 मिलियन अमेरिकी डॉलर, की ठगी की गई।
पीड़िता को एक व्यक्ति ने ऑनलाइन संपर्क किया। उसने खुद को ऑटोमोबाइल उद्योग से जुड़ा बताया और बातचीत के दौरान अपना परिचय एक अनुभवी क्रिप्टो निवेशक के रूप में दिया।
कई महीनों तक भावनात्मक रिश्ता बनाए जाने के बाद उसे एक कथित क्रिप्टो ट्रेडिंग ऐप डाउनलोड करने के लिए कहा गया।
ऐप पर निवेश के बाद असाधारण मुनाफा दिखाई देने लगा। रिपोर्ट के मुताबिक कुछ लेनदेन में 800 प्रतिशत से अधिक रिटर्न दिखाया गया। इससे पीड़िता को लगा कि उसका पैसा वास्तव में बढ़ रहा है।
समस्या तब सामने आई जब उसने रकम निकालने की कोशिश की। पैसे निकालने की अनुमति नहीं मिली और कुछ समय बाद ऑनलाइन संपर्क करने वाला व्यक्ति भी गायब हो गया।
यही पिग बुचरिंग स्कैम का सबसे खतरनाक हिस्सा है। पीड़ित को पहले नुकसान नहीं दिखता, बल्कि नकली मुनाफा दिखाया जाता है।
पिग बुचरिंग स्कैम क्या है?
पिग बुचरिंग स्कैम एक ऐसी साइबर ठगी है जिसमें अपराधी किसी व्यक्ति को लंबे समय तक बातचीत और भावनात्मक संबंध के जरिए अपने भरोसे में लेते हैं। इसके बाद उसे निवेश का ऐसा अवसर दिखाया जाता है जिसमें असाधारण मुनाफे का दावा किया जाता है।
अक्सर इसके लिए फर्जी ट्रेडिंग वेबसाइट, नकली मोबाइल ऐप या अपराधियों के नियंत्रण वाला क्रिप्टो प्लेटफॉर्म इस्तेमाल किया जाता है।
इसका नाम अंग्रेजी के “Pig Butchering” शब्द से आया है। इसका संकेत उस तरीके से है जिसमें ठग पहले अपने शिकार को लंबे समय तक तैयार करते हैं और फिर बड़ी रकम हासिल करते हैं।
इसी कारण इसे रोमांस स्कैम और इन्वेस्टमेंट फ्रॉड का खतरनाक मिश्रण भी माना जाता है।
पिग बुचरिंग स्कैम में ठगी कैसे शुरू होती है?
इस तरह की ठगी आमतौर पर अचानक नहीं होती। अपराधी पहले भरोसा बनाने पर ध्यान देते हैं।
सोशल मीडिया, डेटिंग ऐप, मैसेजिंग प्लेटफॉर्म या अन्य ऑनलाइन माध्यमों से संपर्क शुरू हो सकता है। शुरुआती बातचीत सामान्य होती है। परिवार, नौकरी, पसंद, भविष्य और निजी जिंदगी जैसे विषयों पर चर्चा की जाती है।
कुछ समय बाद बातचीत निवेश पर पहुंचती है।
ठग खुद को क्रिप्टो, शेयर बाजार या ट्रेडिंग का जानकार बताता है। वह यह भरोसा पैदा करता है कि उसके पास निवेश से कमाई करने का कोई खास तरीका है।
इसके बाद पीड़ित को किसी ऐप या वेबसाइट पर अकाउंट बनाने के लिए कहा जाता है।
यहीं से असली जाल शुरू होता है।
नकली ट्रेडिंग ऐप कैसे भरोसा पैदा करता है?
फर्जी निवेश ऐप इस साइबर फ्रॉड का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है।
पीड़ित जब पैसा जमा करता है तो स्क्रीन पर उसका बैलेंस बढ़ता दिखाई दे सकता है। उसे कथित मुनाफा भी दिखाया जाता है।
मान लीजिए किसी व्यक्ति ने 5 लाख रुपये लगाए। ऐप पर कुछ दिनों बाद रकम 7 लाख या 10 लाख रुपये दिखाई देने लगे। पीड़ित को लगता है कि निवेश सफल है। इसके बाद ठग उससे और पैसा लगाने के लिए कह सकता है। यही कारण है कि शुरुआती चरण में पीड़ित को धोखाधड़ी का पता नहीं चलता।
असल में स्क्रीन पर दिखाई देने वाला मुनाफा वास्तविक बैंक बैलेंस या वास्तविक निवेश रिटर्न नहीं होता।
पैसा निकालते समय खुलता है असली खेल
जब पीड़ित बड़ी रकम निकालने की कोशिश करता है तो समस्या शुरू होती है। कभी टैक्स के नाम पर अतिरिक्त रकम मांगी जाती है। कभी withdrawal fee, verification charge या account unlocking fee बताई जाती है। पीड़ित अगर वह रकम भी दे देता है तो नई मांग सामने आ सकती है।
आखिरकार ऐप काम करना बंद कर सकता है, अकाउंट लॉक हो सकता है या कथित निवेश सलाहकार संपर्क से बाहर हो सकता है ।इस समय तक पीड़ित की बड़ी रकम जा चुकी होती है।
800 प्रतिशत रिटर्न सबसे बड़ा खतरे का संकेत क्यों है?
किसी निवेश में असाधारण और लगभग निश्चित मुनाफे का दावा अपने आप में बड़ा warning sign है।
800 प्रतिशत रिटर्न, रोजाना निश्चित कमाई या “बिना जोखिम” के भारी मुनाफे जैसे दावे निवेशक को आकर्षित करने के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
खासकर तब जब यह दावा किसी ऐसे व्यक्ति की ओर से आ रहा हो जिससे मुलाकात ऑनलाइन हुई है और जिसे आपने व्यक्तिगत रूप से कभी नहीं जाना।
याद रखें, रिश्ता भरोसे का प्रमाण नहीं है और स्क्रीन पर दिखाई दे रहा मुनाफा असली पैसा होने का प्रमाण नहीं है।
पिग बुचरिंग स्कैम के 7 बड़े संकेत
1. ऑनलाइन दोस्ती अचानक निवेश की सलाह में बदल जाए
अगर सोशल मीडिया या डेटिंग ऐप पर मिला व्यक्ति कुछ ही समय बाद आपको क्रिप्टो या ट्रेडिंग में पैसा लगाने की सलाह देने लगे तो सतर्क हो जाएं।
2. सामने वाला खुद को निवेश विशेषज्ञ बताए
ठग अक्सर खुद को सफल कारोबारी, निवेशक या क्रिप्टो विशेषज्ञ बताकर भरोसा पैदा करते हैं।
3. किसी खास ऐप पर निवेश करने को कहा जाए
अगर आपको किसी व्यक्ति के कहने पर कोई अज्ञात ट्रेडिंग ऐप डाउनलोड करने के लिए कहा जा रहा है तो पहले उसकी वैधता जांचें।
4. बहुत बड़ा और लगभग निश्चित मुनाफा दिखाया जाए
800 प्रतिशत रिटर्न, रोजाना निश्चित लाभ या बिना जोखिम के भारी कमाई जैसे दावे गंभीर चेतावनी हैं।
5. शुरुआत में छोटा withdrawal सफल हो
कुछ मामलों में ठग शुरुआत में छोटी रकम निकालने की अनुमति देकर भरोसा और बढ़ा सकते हैं। इसके बाद बड़ी रकम जमा करवाने की कोशिश हो सकती है।
6. बड़ी रकम व्यक्तिगत बैंक खाते या अनजान वॉलेट में भेजने को कहा जाए
किसी व्यक्ति के कहने पर निवेश के नाम पर व्यक्तिगत खाते, अज्ञात बैंक खाते या अनजान crypto wallet में पैसा भेजना जोखिम भरा है।
7. पैसे निकालने पर नया शुल्क मांगा जाए
Withdrawal के समय अचानक टैक्स, फीस या verification के नाम पर अतिरिक्त रकम मांगी जाए तो इसे गंभीर warning sign मानें।
भारत में भी समझना जरूरी है यह साइबर फ्रॉड
पिग बुचरिंग स्कैम को भारत के लिए दूर की समस्या मानना गलती होगी।
भारत में भी ऑनलाइन दोस्ती, निवेश सलाह और फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के जरिए बड़ी रकम की ठगी के मामले सामने आते रहे हैं। मार्च 2026 में लखनऊ में एक सरकारी शिक्षिका से कथित तौर पर करीब 49 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया था, जिसमें ऑनलाइन संपर्क और निवेश के नाम पर भरोसा कायम करने का आरोप था।
इस तरह के मामलों में अपराधियों का तरीका बदल सकता है, लेकिन मूल पैटर्न काफी हद तक समान रहता है:
संपर्क → भरोसा → निवेश की सलाह → नकली प्लेटफॉर्म → नकली मुनाफा → ज्यादा निवेश → withdrawal रोकना → ठगी।
भारत में नकली निवेश ऐप से कैसे बचें?
किसी भी ट्रेडिंग या निवेश प्लेटफॉर्म पर पैसा लगाने से पहले उसकी वैधता जांचना जरूरी है।
शेयर बाजार से संबंधित सेवाओं के लिए संबंधित संस्था का SEBI registration जांचें। किसी क्रिप्टो प्लेटफॉर्म या डिजिटल एसेट सेवा के बारे में भी उसके आधिकारिक विवरण, कंपनी की पहचान और नियामकीय स्थिति की स्वतंत्र जांच करें।
सिर्फ इसलिए किसी ऐप पर भरोसा न करें क्योंकि उसे कोई ऑनलाइन दोस्त या कथित निवेश विशेषज्ञ इस्तेमाल करने के लिए कह रहा है।
Google Play Store या App Store पर मौजूद होना भी किसी ऐप को अपने आप निवेश के लिए सुरक्षित साबित नहीं करता।
अगर पिग बुचरिंग स्कैम में पैसा फंस गया है तो क्या करें?
अगर आपको लगता है कि आप ऐसी ठगी के शिकार हुए हैं तो सबसे पहले ठग से आगे कोई भुगतान न करें।
इसके बाद बैंक या संबंधित वित्तीय संस्था से तुरंत संपर्क करें और संदिग्ध लेनदेन की जानकारी दें।
भारत में साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की स्थिति में 1930 हेल्पलाइन पर तुरंत शिकायत करना और National Cyber Crime Reporting Portal पर रिपोर्ट दर्ज करना महत्वपूर्ण है।
जितनी जल्दी शिकायत की जाती है, उतना ही जल्दी संबंधित एजेंसियों को लेनदेन पर कार्रवाई करने का अवसर मिल सकता है।
ठगी से संबंधित चैट, मोबाइल नंबर, ईमेल, वेबसाइट URL, ऐप का नाम, बैंक ट्रांजैक्शन, UPI विवरण और screenshots सुरक्षित रखें। इन्हें डिलीट न करें।
पिग बुचरिंग स्कैम से बचने का सबसे आसान नियम
किसी ऑनलाइन रिश्ते को निवेश का प्रमाण न मानें।
अगर कोई व्यक्ति पहले भावनात्मक रिश्ता बनाता है और फिर आपको किसी खास क्रिप्टो ऐप, ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म या निवेश योजना में पैसा लगाने के लिए कहता है तो रुक जाएं।
पहले रिश्ते को नहीं, निवेश प्लेटफॉर्म को verify करें।
असाधारण रिटर्न के लालच में पैसा भेजने से पहले आधिकारिक नियामक की वेबसाइट पर जानकारी जांचें। किसी अज्ञात व्यक्ति के निर्देश पर बैंक ट्रांसफर, UPI भुगतान या crypto wallet transfer न करें।
पिग बुचरिंग स्कैम में अपराधी तकनीक से ज्यादा भरोसे का इस्तेमाल करते हैं। नकली ऐप सिर्फ उस भरोसे को पैसे में बदलने का माध्यम होता है।









