म्यूल अकाउंट क्या है? ₹310 करोड़ के साइबर फ्रॉड रैकेट से समझिए पूरा खेल

म्यूल अकाउंट क्या है? गुजरात में ₹310 करोड़ के साइबर फ्रॉड रैकेट के खुलासे ने इस सवाल को चर्चा में ला दिया है। जानिए साइबर अपराधी बैंक खातों का इस्तेमाल कैसे करते हैं और अपना खाता किराए पर देना क्यों खतरनाक हो सकता है।
म्यूल अकाउंट क्या है और ₹310 करोड़ के साइबर फ्रॉड रैकेट में इसका इस्तेमाल कैसे हुआ

कुछ साल पहले तक ऑनलाइन धोखाधड़ी का मतलब फर्जी कॉल, ओएलएक्स स्कैम, केवाईसी अपडेट के नाम पर ठगी या सेक्सटॉर्शन जैसे अपराधों तक सीमित माना जाता था। अब साइबर अपराध संगठित वित्तीय नेटवर्क का रूप ले चुका है, जिसमें करोड़ों रुपये का लेनदेन कुछ ही दिनों में एक राज्य से दूसरे राज्य और कई बार देश की सीमाओं के पार पहुंच जाता है।

वीडियो से समझें म्यूबल अकाउंट क्या हैः

हाल ही में गुजरात के गिर सोमनाथ साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन द्वारा चलाए गए ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0 ने इस खतरे की गंभीरता को फिर उजागर किया है। जांच में करीब ₹310 करोड़ के संदिग्ध लेनदेन का खुलासा हुआ है, जो म्यूल अकाउंट्स के जरिए संचालित किए जा रहे थे।

म्यूल अकाउंट क्या है?

म्यूल अकाउंट वह बैंक खाता होता है जिसका इस्तेमाल साइबर अपराधी अवैध रूप से प्राप्त धन को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के लिए करते हैं।

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ये खाते दो तरह से इस्तेमाल किए जाते हैं:

  • फर्जी दस्तावेजों से खोले गए खाते
  • असली लोगों के खाते जिन्हें कमीशन के बदले किराए पर लिया जाता है

साइबर अपराधी इन खातों के जरिए पीड़ितों से ठगे गए पैसे को तेजी से अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करते हैं ताकि जांच एजेंसियों के लिए धन का वास्तविक स्रोत और अंतिम गंतव्य पता लगाना मुश्किल हो जाए।

₹310 करोड़ के साइबर फ्रॉड रैकेट का खुलासा

गुजरात पुलिस की जांच में सामने आया कि कई बैंक खाते साइबर अपराधियों को कमीशन पर उपलब्ध कराए जा रहे थे।

जांच के प्रमुख बिंदु:

तथ्यविवरण
ऑपरेशनम्यूल हंट 2.0
खुलासा₹310 करोड़ के लेनदेन
शिकायतें290 साइबर धोखाधड़ी मामलों से कनेक्शन
नेतृत्वडीआईजीपी राजेंद्रसिंह चुडासमा और एसपी जयदीपसिंह जडेजा
गिरफ्तार आरोपी5
जांचअन्य खाताधारकों और नेटवर्क की तलाश जारी

पुलिस के अनुसार ये खाते विभिन्न राज्यों में फैले साइबर अपराध नेटवर्क के लिए धन स्थानांतरण का माध्यम बने हुए थे।

साइबर अपराधी म्यूल अकाउंट का इस्तेमाल कैसे करते हैं?

साइबर फ्रॉड का पैसा सीधे अपराधियों के खाते में नहीं जाता। सामान्य तौर पर प्रक्रिया कुछ इस प्रकार होती है:

  1. किसी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी की जाती है।
  2. पीड़ित से ठगी गई रकम म्यूल अकाउंट में जमा होती है।
  3. पैसा कई खातों में तेजी से ट्रांसफर किया जाता है।
  4. अलग-अलग स्तरों पर रकम निकाल ली जाती है।
  5. आखिर में धन अपराधियों तक पहुंच जाता है।

इसी प्रक्रिया को वित्तीय जगत में “लेयरिंग” कहा जाता है।

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बैंक खाता किराए पर देना क्यों खतरनाक है?

कई लोग कुछ हजार रुपये के लालच में अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड या इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी दूसरों को दे देते हैं।

लेकिन ऐसा करना गंभीर अपराध की श्रेणी में आ सकता है।

यदि किसी साइबर अपराध में आपका खाता इस्तेमाल होता है तो:

  • पुलिस जांच में आपका नाम सामने आ सकता है।
  • बैंक खाता फ्रीज हो सकता है।
  • कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
  • भविष्य में बैंकिंग सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।

म्यूल अकाउंट्स पर कार्रवाई क्यों जरूरी है?

साइबर अपराधियों को पकड़ना हमेशा आसान नहीं होता क्योंकि वे अक्सर फर्जी पहचान और डिजिटल तकनीकों का उपयोग करते हैं। ऐसे में म्यूल अकाउंट्स ही वह कड़ी होते हैं जिनके जरिए जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क तक पहुंच सकती हैं।

यही कारण है कि:

  • राज्य पुलिस विशेष अभियान चला रही है।
  • सीबीआई और ईडी भी ऐसे मामलों की जांच कर रही हैं।
  • बैंकों पर निगरानी और केवाईसी प्रक्रिया मजबूत करने का दबाव बढ़ रहा है।

नागरिक क्या करें?

साइबर अपराध के खिलाफ सबसे मजबूत सुरक्षा जागरूकता है।

इन बातों का ध्यान रखें:

  • अपना बैंक खाता किसी को किराए पर न दें।
  • एटीएम कार्ड और इंटरनेट बैंकिंग क्रेडेंशियल साझा न करें।
  • संदिग्ध लेनदेन तुरंत बैंक को रिपोर्ट करें।
  • साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करें।
  • अनजान व्यक्तियों द्वारा दिए गए कमीशन या ऑफर से बचें।

निष्कर्ष

म्यूल अकाउंट अब साइबर अपराध की सबसे बड़ी कड़ियों में से एक बन चुका है। गुजरात में ₹310 करोड़ के संदिग्ध लेनदेन का खुलासा यह दिखाता है कि साइबर फ्रॉड अब छोटे स्तर की ठगी नहीं बल्कि संगठित वित्तीय अपराध का रूप ले चुका है।

यदि कोई व्यक्ति अपना बैंक खाता किराए पर देता है, तो वह अनजाने में ही साइबर अपराधियों के नेटवर्क का हिस्सा बन सकता है। इसलिए सतर्क रहना और दूसरों को जागरूक करना डिजिटल सुरक्षा की पहली शर्त है।

याद रखें: “म्यूल न बनें। आपका बैंक खाता साइबर अपराधियों का हथियार बन सकता है।”

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inspector raman kumar
इंस्पेक्टर रमण कुमार सिंह,दिल्ली पुलिस में बतौर इंस्पेक्टर तैनात है । वे दिल्ली के कई पुलिस थानों के साथ साथ साइबर पुलिस स्टेशन के थानाध्यक्ष रहे है । वे साइबर जागरूकता के लिए साइबर सेफ व्हाट्सएप्प ग्रुप और बी द पुलिस नाम से फेसबुक पेज और फेसबुक ग्रुप के संचालक है ।

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16-06-2026