……और इसलिए सबकी नजर में दिल्ली पुलिस बन गई हीरो

आलोक वर्मा

केंद्रीय गृह मंत्री और केंद्रीय गृह राज्यमंत्री का ट्वीट हो या छोटे बड़े सेलिब्रेटी, कोरोना संकट में दिल्ली पुलिस सबकी नजर में हीरो बन गई है। यहां तक कि दिल्ली का आम नागरिक भी दिल्ली पुलिस का कायल, उसके कामों से प्रभावित और उसको लेकर भावुक भी हो गया है। अब सवाल अगर ये किया जाए कि ऐसा क्या हुआ कि दिल्ली पुलिस के बारे में लोगों का ख्याल अचानक इतना सकारात्मक हो गया। इसके जवाब में प्रतिदिन राशन बांटने से लेकर कई गतिविधियों की सूची बनाई जा सकती है।

इन सूचियों से परे मैं आपको चंद उन लोगों के बारे में बताना चाहता हूं जिनकी वजह से उपरोक्त सूचियां बनती, बनीं या बनाई जाती हैं।

आरंभ

किसी भी टीम का सकारात्मक या नकारात्मक रूप उसके नेतृत्व पर निर्भर करता है। देखा जाए तो दिल्ली पुलिस के मौजूदा सकारात्मक स्वरूप की सबसे बड़ी वजह खुद सीपी एस एन श्रीवास्तव हैं। दिल्ली पुलिस के मोराल बढ़ाने की मुहिम तो उन्होंने पहले से ही शुरू कर दी थी। होली में सड़क पर तैनात पुलिसकर्मियों को मिठाई बांटने से लेकर अच्छे काम करने वाले पुलिसकर्मियों को पुरस्कार देने और सिपाही स्तर तक के पुलिसकर्मियों से भी मिलने के उनके प्रयास ने दिल्ली पुलिस के मोराल को तो बढ़ा ही दिया था बात जब आम जनता से पुलिस के आमना सामना करने पर आई तो सीपी का एक फार्मूला काफी लोकप्रिय हुआ।  

मीटिंग सोशल डिसटेंसिंग और स्वास्थय के मापदंड के साथ

इस फार्मूले की शुरूआत हुई जनता कर्फ्यू यानि 22 मार्च को। इस दिन एक खास बात हुई थी दिल्ली पुलिस जनता कर्फ्यू में घर से बाहर निकलने वाले लोगों को फूल देकर उन्हें घर में रहने के लिए समझाती हुई दिखी। कुछेक लोगों  ने इस पर सवाल भी उठाए लेकिन दिल्ली के उर्जावान सीपी एसएन श्रीवास्तव का यह फार्मूला दिल्ली को यह समझाने में कामयाब हो गया कि आने वाले संकट में पुलिस उनकी दोस्त के रूप में काम करने जा रही है। सीपी खुद फिल्ड में जाते हैं लॉकडाउन का पालन सुनिश्चित कराने के लिए सभी अधिकारियों के साथ मीटिंग करते हैं और इसके साथ साथ तबलिगी जमात और दिल्ली हिंसा से संबंधित जांच पर भी उनकी पैनी नजर होती है।

फील्ड में सीपी

जैसे ही लॉकडाउन शुरू हुआ दिल्ली पुलिस के सीपी एस एन श्रीवास्तव ने उपरोक्त फार्मूले से एक कदम औऱ आगे बढ़ाया। लॉकडाउन में लाइसेंसिंग विभाग के डीसीपी के नेतृत्व में दिल्ली पुलिस के हेल्प लाइन नंबर की शुरूआत कर दी गई अब तक इस नंबर के जरिए 25680 कॉल्स सुनी जा चुकी हैं। चार सौ गैरसामाजिक संगठनों के साथ मिलकर दिल्ली पुलिस 250 जगहों से सवा तीन लाख लोगों को भोजन देती है।

कड़ी दर कड़ी

किसी अच्छी योजना या फार्मूले की कामयाबी उसे आगे बढ़ाने वालों पर बहुत कुछ निर्भर करती है। दिल्ली पुलिस के सीपी एस एन श्रीवास्तव के फार्मूले को यूं तो दिल्ली के हरेक पुलिस अफसर चाहे वह किसी स्तर का हो उसने आगे बढाया औऱ लॉक डाउन में बढ़ चढ़ कर काम भी कर रहा है। कुछेक लोग ऐसे भी हैं जिन्होंने इससे भी आगे बढ़कर काम किया औऱ कई नई योजनाओं पर भी अमल किया।

कोविड पेट्रोलिंग की शुरूआत करते देवेश श्रीवास्तव

दिल्ली पुलिस के आला अफसरों में सबसे पहला नाम आता है दक्षिण-पूर्वी रेंज के ज्वांयट सीपी देवेश श्रीवास्तव का। देवेश श्रीवास्तव की देखरेख में दक्षिण जिले के डीसीपी अतुल ठाकुर औऱ दक्षिण पूर्वी दिल्ली के डीसीपी आर पी मीणा ने लॉक डाउन में पुलिस के सकारात्मक चेहरे को सामने लाने में मेहनत की। देवेश श्रीवास्तव अत्याधुनिक चीजों को पुलिस के लिए कैसे इस्तेमाल किया जाए इस बात को बखूबी जानते हैं । इसका एक नजारा कोरोना के खिलाफ जंग में भी दिखा जब दक्षिणी दिल्ली में अपनी तरह के अनोखे पेट्रोलिंग की शुरूआत हुई। इसका नाम दिया गया कोविड पेट्रोलिंग। इसके अलावा अकेले रहने वाले बुजुर्गों की देखरेख, बड़े और बच्चों के जन्म दिन या सालगिरह पर उन्हें मुबारकबाद देने की परंपरा की शुरूआत भी डीसीपी अतुल ठाकुर ने बढ़ कर किया।

पुलिस कमिश्नर एस एन श्रीवास्तव की योजना को साकार करने औऱ दिल्ली पुलिस को जनता की पुलिस बनाने की कोशिश करने वालों में अगला नाम शालिनी सिंह का है।

दिल्ली के पश्चिमी रेंज की ज्वायंट सीपी शालिनी सिंह दिन रात अपने क्षेत्र का दौरा करती हैं। उनके लिए दिन या रात का कोई वक्त तय नहीं होता जहां जरूरत होती है वहां वो होती हैं। अपने निजी स्तर पर पुलिसकर्मियों के लिए मास्क मंगवाने की बात हो या जरूरतमंदों को खाना बांटने की बात कई बार वो खुद की जेब से खर्च करने से भी नहीं चूकतीं।

निर्माण साइट पर खाना बांटती ज्वांयट सीपी शालिनी सिंह
खाना बांटते द्वारका डीसीपी

उन्हीं की देखरेख में द्वारका जिले के डीसीपी एंटो अल्फोंस औऱ अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त आर पी मीणा जरूरत मंदों के लिए खुद रसोई बनाने से लेकर खाना बांटने तक में शामिल होते हैं।

    मध्य जिले के डीसीपी संजय भाटिया का नाम लिए बिना यह चर्चा अधूरी रह जाती है। नई और दिलचस्प योजनाओं की वजह से संजय भाटिया हमेशा से चर्चित रहे हैं।

कोविड स्वयंंसेवक लांचिंग के समय डीसीपी संजय भाटिया

मध्य जिला पुलिस उपायुक्त बनते ही कोरोना के खिलाफ जंग लड़ने में भी उन्होंने अपनी कुशाग्रता का इस्तेमाल किया। कोरोना स्वयंसेवक से लेकर दिहाड़ी अप्रवासी मजदूरों के शिविर में स्काउट के माध्यम से योगाभ्यास शुरू कराने वाले वही हैं। मध्य जिले के राजेन्द्र नगर से शुरू हुई कोरोना स्वयंसेवक स्कीम अब पूरी दिल्ली में लागू है।

जरूरतमंदो के लिए हर समय तैयार

आम जनता को ममद करने के काम में स्पेशल ब्रांच से लेकर सातवीं बटालियन तक की पुलिस शामिल है। सातवी बटालियन के एसीपी विजय सिंह की देखरेख में हरेक दिन रसोई के सामान की किट करीब 700 लोगों को दी जाती है।  

सातवीं बटालियन में राशन वितरण
एसीपी विजय सिंह की देखरेख में

कोरोना के खिलाफ जंग में कोरोना मरीजों की देखभाल, उन्हें अस्पताल पहुंचाने से लेकर क्वारंटाइन किए गए इलाकों  पर पहरा देने और लॉकबंदी को सुनिश्चित कराने से लेकर फूट पैकेट की वितरण, गर्भवती महिलाओं को अस्पताल ले जाने, वरिष्ठ नागरिकों की मदद करने और सामुदायिक किचेन चला रही दिल्ली पुलिस के हरेक स्तर के अधिकारी जुटे हुए हैं। हकीकत में ये सभी ही दिल्ली पुलिस को हीरो बनने की वजह हैं।

 कोशिश होगी अगले कुछ दिनों में कुछ औऱ ऐसे अफसरों के बारे में बताने की लेकिन तब जब आपको अच्छा लगे। अगर हां तो कमेंट लिखिएगा।

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Alok Verma
a senior journalist with a 30 years experience of print, electronics and digital. worked with dainik jagran, news18india, R,bharat, zee news

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