मुजफ्फरपुर शेल्टर होम कांड जानिए किसको क्या मिली सजा, राज्य सरकार देगी मुआवजा

आलोक वर्मा

 नई दिल्ली,। केंद्रीय जांच ब्यूरो ने अपने पेशेवर जांच एक और उदाहरण पेश कर दिया है। बिहार के मुजफ्फरपुर शेल्टर होम केस में दिल्ली की साकेत कोर्ट ने 11 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इनमें से 5 को मौत तक जेल में रहना होगा जबकि 5 को साधारण उम्र कैद की सजा सुनाई गई है। मुख्य गुनाहगार ब्रजेश ठाकुर तो कोर्ट ने 32.20 लाख रुपये का जुर्माना भी ठोका है। इसके साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार को पीड़ित लड़कियों को मुआवजा देने का निर्देश दिया है।

कोर्ट ने राज्य सरकार से मिलने वाले मुआवजे की रकम 5-10 लाख के बीच तय की है। यह रकम पीड़ित बालिकाओं को होने वाले नुकसान पर निर्भर करेगा। दोषियों को किए गए आर्थिक जुर्माने और राज्य सरकार से मिलने वाले मुआवजे की राशि के भुगतान को लेकर कोर्ट ने 2 जुलाई की तारीख तय की है।

 मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर ताउम्र सलाखों के पीछे रहेगा। सजा का ऐलान होते ही ब्रजेश ठाकुर रो पड़ा। अन्य 19 दोषियों को भी सजा सुनाई गई है।

बता दें कि दिल्ली स्थित साकेत कोर्ट ने चार फरवरी को सजा पर बहस पूरी कर ली थी और उसके बाद 11 फरवरी सजा की तारीख तय की गई थी। इस पूरे मामले की जांच सीबीआई ने की थी और जांच की रिपोर्ट कोर्ट को सौंपी थी और दोषियों को अधिकतम सजा की गुहार लगायी थी।  

ये रहेंगे ताउम्र सलाखों के पीछे  

1. ब्रजेश ठाकुर आजीवन कारावास (ताउम्र जेल) 32.20 लाख जुर्माना, जिसमें 4 लाख पीड़िता को मुआवजा दिया जाएगा।

2. रवि रोशन आजीवन कारावास 1.5 लाख जुर्माना

3. विकास आजीवन कारावास 14 लाख जुर्माना

4. गुडु पटेल-आजीवन कारावास, 85000

5. विजय-जुर्माना 75000

इनको मिली साधारण उम्रकैद की सजा

1. मीनू देवी-आजीवन कारावास जुर्माना 80000

2. किरण कुमारी- जुर्माना 80000

3. कृष्णा कुमार-जुर्माना 50000

4. रामानुज ठाकुर जुर्माना 60000

5. सैस्ता प्रवीण उर्फ मधु जुर्माना 4.10 लाख

 इनको मिली ये सजा

  1. इंदू कुमारी, 3 साल, जुर्माना 10000
  2.  चंदा देवी, दस साल, जुर्माना 60000
  3. नेहा कुमारी, दस साल, जुर्माना 40000
  4. हेमा माशिह, दस साल, जुर्माना 60000
  5. रोजी रानी, छह माह,
  6. रमाशंकर सिंह दस साल, जुर्माना 60000
  7. डा. अश्वनी, दस साल, जुर्माना 30000
  8.  मंजू देवी, दस साल, जुर्माना 40000

टिस की रिपोर्ट भी थी अहम

TISS (Tata institute of social sciences) की विंग ‘कोशिश’ की रिपेार्ट में बालिका गृह कांड का खुलासा हुआ था, जिसकी रिपोर्ट चौंकाने वाली थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि बालिका गृह में करीब 40 से अधिक बच्चियों के साथ यौनशोषण किया गया था। नाबालिग बच्चियों ने जो बताया था वो बातें रोंगटे खड़े करने वाली थी। इस रिपोर्ट के खुलासे के बाद तहलका मच गया था।

रिपोर्ट के मुताबिक ब्रजेश ठाकुर की संस्था सेवा संकल्प एवं विकास समिति द्वारा संचालित बालिका गृह में नाबालिग बच्चियों के साथ बलात्कार सहित अन्य वीभत्स घटनाओं को अंजाम दिया जाता था। रिपेार्ट में हुए खुलासे के बाद 31 मई 2018 को मुजफ्फरपुर महिला थाने में केस दर्ज किया गया था।

बाद में बालिका गृह कांड को लेकर राजनीतिक गलियारों में तूफान खड़ा हो गया था। विधानसभा से लेकर लोकसभा तक में विपक्षी दलों के नेताओं ने बवाल काटा था। बाद में इसकी जांच सीबीआई को सौंपी गई थी।

सीबीआई जांच

तमाम दबावो और राजनीतिक रसूख के बाद भी सीबीआई ने पेशेवर तरीके से इस मामले की जांच की और चार्जशीट फाइल की।

राजनीतिक रसूख वाला था ब्रजेश ठाकुर 

बालिका गृहकांड का मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर है और जिस तरह के नियमों की अनदेखी करके बालिका गृह का संचालन बिना रोकटोक चल रहा था और सरकारी फंड भी मिल रहा था, उससे पता चलता है कि उसकी पैठ सियासी गलियारों से लेकर ब्यूरोक्रेसी के कॉरिडोर तक थी। उनकी मदद से वह हर चीज को मैनेज कर लिया करता था।

एनजीओ के साथ ही वह कई तरह के अखबार का भी प्रकाशन किया करता था और इसका दफ्तर बालिका गृह के प्रांगण में ही था। सबसे दिलचस्प बात ये थी कि टिस की रिपोर्ट के बाद उसके एनजीओ को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया था और इसके बावजूद उसे भिखारियों के लिए आवास बनाने के वास्ते हर महीने 1 लाख रुपये का प्रोजेक्ट दिया गया था। हालांकि, बाद में इस प्रोजेक्ट को रद्द कर दिया गया था।

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Alok Verma
a senior journalist with a 30 years experience of print, electronics and digital. worked with dainik jagran, news18india, R,bharat, zee news

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08-10-2026