फर्जी एजूकेशन बोर्ड का पर्दाफाश

दिल्ली के शाहदरा जिला पुलिस ने 6 साल से चल रहे फर्जी शिक्षा बोर्ड का पर्दाफाश किया है। ये बोर्ड वेबसाइट और अखबारो में इश्तेहार देकर 2011 से चल रहा था। लेकिन किसी की नजर नहीं गई थी। बोर्ड के संचालक अलग अलग 17 स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी की डिग्री, मार्कशीट देने का वादा करते थे और फर्जी मार्कशीट और डिग्री देते थे। पुलिस ने फर्जी बोर्ड के चेयरमैन शिव पांडेय सहित 6 लोगों को गिरफ्तार किया है। ये लोग यूपी, गुजराती, चंडीगढ़, महाराष्ट्, हिमाचल के आलावा कई जगह के स्कुलो और यूनिवर्सिटी के सर्टिफिकेट बाँटते थे। इस पूरे रैकेट के लिए गिरफ्तार लोगों ने बकायदा वेबसाइट भी बना रखा था।
इनके पास से 15 हजार खाली और बनाई हुई फर्जी मार्कशीट अलग अलग यूनिवर्सिटी बोर्ड की, रबर स्टैम्प, प्रिंटर, कम्प्यूटर मिले है। फर्जी डिग्री औऱ सर्टिफिकेट देने के अलावा ये लोग  छोटे स्कूलों को एफिलेटेड करते थाे, निजी तौर पर संपर्क करने  वाले स्टूडेंट्स को भी मार्कशीट दिया जाता था। मान्यता लेने वाले  स्कुलो को नहीं पता होता था कि ये फर्जी बोर्ड चल रहा है।
इनका एक दफ्तर दिल्ली के विकासपुरी और एक लखनऊ में है। इसके चेयरमेन शिव प्रसाद पांडे के अलावा 6 लोग गिरफ्तार किए गए है। इस सिलसिले में दिल्ली पुलिस को काफी पहले शिकायत मिली थी। मामला पेचीदा होने के कारण लंबी जांच के बाद कार्रवाई की गई। अब इस बात की जांच की जा रही है कि अब तक 2011 से कितनी फर्जी मार्कशीट और डिग्री बोर्ड के जरिए लोगो को ठग चुके है। पता चला है कि यह बोर्ड पहले 2008 में भी चला था फिर 2011 से दोबारा चल रहा था

Latest Posts

BREAKING NEWS
दिल्ली में 100 करोड़ का हेरोइन बरामद देखें वीडियो | दिल्ली में पकड़ा गया खलिस्तानी आतंकी | श्राद्ध में कौवे को पहला ग्रास क्यों दिया जाता है? जानिए काक बलि का रहस्य | ऑपरेशन Cy-Vajra में बड़ा खुलासा, 8 फर्जी कॉल सेंटर सील, 49 गिरफ्तार, ऐसे काम करता है साइबर ठगी का नेटवर्क | RBI आंतरिक लोकपाल (Internal Ombudsman) क्या है? साइबर फ्रॉड पीड़ितों के लिए शिकायत निवारण का मजबूत सुरक्षा तंत्र | दिल्ली ट्रैफिक जाम कम करने की तैयारी, जानिए कैसे मिलकर काम करती हैं Delhi Traffic Police और दूसरी एजेंसियां | बिना डेटा वाला मोबाइल रिचार्ज प्लान क्यों बन रहा है लोगों की पहली पसंद? | क्या आपका स्मार्टफोन आपकी जासूसी कर रहा है? जेब में रखा फोन कैसे बन सकता है निगरानी का सबसे बड़ा हथियार | भारत में डिजिटल इंडिया अभियान का अगला बड़ा पड़ाव गांवों तक आधुनिक तकनीक पहुंचाना माना जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में भारतनेट, 5G, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) जैसी तकनीकों को ग्रामीण क्षेत्रों तक ले जाने के लिए कई प्रयास हुए हैं। अब इन्हीं प्रयासों को नई गति देने का दावा एक ऐसे मॉडल के जरिए किया गया है, जिसमें भारतीय स्टार्टअप, देश के प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थान और सरकारी अनुसंधान संगठन एक साथ काम कर रहे हैं। | वन्दे माँ नर्मदे: माँ नर्मदा की महिमा, इतिहास और भारतीय संस्कृति को समर्पित महत्वपूर्ण कृति | रांची में हैं मनोकामना पूरी करने वाले वृक्ष | WhatsApp Username Feature: क्या मोबाइल नंबर छिपाने वाला नया फीचर साइबर अपराधियों के लिए बन सकता है हथियार? |
16-07-2026