दिल्ली का पुराना किला बना पर्यटकों के लिए और ज्यादा खूबसूरत जानिए क्या है नया

दिल्ली के दिल का जिक्र आते ही लाल किले का ही नाम जहन में आता है। .पुराना किला की चर्चा लाल किला के आगे टिकती ही नहीं..लेकिन अब पुराने किले को भी लाल किला जितना खूबसूरत बनाने की कोशिश की गई है।.ये किला भी दिल्ली के बीचों बीच है और इसे संवारने का काम किया है राष्ट्रीय उपक्रम एनबीसीसी यानि नेशनल बिल्डिंग कंसट्रक्शन कारपोरेशन ने। ..न केवल किले की दीवारों को मजबूत किया गया है बल्कि किले के चारों ओर ऐसी खूबसूरत लाइटिंग की गई है कि ये देखते ही बनती है..तस्वीरों की नजर से हम आपको इस ऐतिहासिक किले की खूबसूरती दिखाते हैं-

इस किले को हुमायू और शेरशाह सूरी के शासनकाल के दौरान बनाया गया था..इसमें मुगल और अफगान कलाकृति दोनों का नमूना है..अंदर घुसते ही मुख्य दरवाजे के चारों और बेहद बारीकी लाइटिंग की गई है जो कि यहां घुसनेवालों में उत्साह भर देती है..मुख्य द्वार की भव्यता देखते ही बनती है..अब आप झील के किनारे जाएंगे तो पहले जहां बोटिंग रोजाना की जाती थी उसे पूरी तरीके से बदल दिया गया है..झील के पानी को बदला गया है उसे खूबसूरत आकार दिया गया है और उसके चारों ओर पीले बल्ब से उम्दा लाइटिंग की गई है..ये इस तरीके से की गई है कि लाइट की रोशनी पानी में कुछ इस तरह दिखे कि पानी भी जगमगा उठे..झील के चारों ओर पर्यटकों के चलने के लिए रास्ता बनाया गया है..पहले इस झील में लोग बोटिंग किया करते थे लेकिन अब बोटिंग की मनाही है और जब वो इस खूबसूरत लाइटिंग के साथ झील के चारों ओर सैर करेंगे तो ये एक यादगार लम्हा होगा उनके लिए..इस सौंदर्यीकरण के लिए राष्ट्रीय उपक्रम एनबीसीसी ने कारपोरेट सोशल रिस्पांसिबिसिटी के जरिए १५ करोड़ रुपए का योगदान दिया है और बाकी के १५ करोड़ रुपए आर्कोलाजिकल सर्वे आफ इंडिया ने लगाया है.. जिनकी राशि को मिलाकर नवीनीकरण का पूरा काम एनबीसीसी ने ही कराया है..एनबीसीसी चेयरमैन ए के मित्तल का कहना है कि अगले दो सालों तक यह राष्ट्रीय उपक्रम ही इस किले की देखरेख का जिम्मा उठाएगा

पुराने किले की इस खूबसूरती को देखकर भला किसे दिल्ली से इश्क नहीं होगा..और लोगों की इसी चाहत को ध्यान में रखते हुए आईटीडीसी से इस किले के दूसरी ओर इश्क ए दिल्ली नाम का साउंड एंड लाइट शो शुरू किया है..महज एक घंटे में महाभारत काल से लेकर आजादी के बाद तक कौन कौन दिल्ली में शासन करने आया और क्यों वो दिल्ली से इश्क करने लगा इस शो के जरिए बड़े ही खूबसूरती से दिखाया गया है..इस शो में थ्री डी तकनीक का इस्तेमाल किया गया है जो पर्यटकों को उस पल में जीने का एहसास कराती है जिसका जिक्र शो में किया जा रहा है..हर रोज दो शो रात में सात से दस बजे के बीच होते हैं जिसकी फीस है १०० रुपए प्रति दर्शक..झील के रास्ते की तरह ही इस शो तक जानेवाले रास्तों को भी बेहद खूबसूरत बनाया गया है और इसके आसपास मौजूद एक गुंबद और किले की पुरानी दीवार में एक बार फिर नायाब लाइटिंग की गई है

पर्यटकों के लिए पार्क में एंट्री सात बजे तक ही है और एंट्री फीस पांच रुपए है..इस किले की खूबसूरती निखरने के बाद यहां आनेवाले लोगों का भी उत्साह देखते बनता है और उनके लिए ये कभी न भूलनेवाला पल है..पुराने किले को संवारने के बाद अब आनेवाले दिनों में सरकार की योजना कुतुब मीनार व अन्य पुरातत्व इमारतों को इसी तरीके से खूबसूरत बनाने की है

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