आरूषि-हेमराज केस में शुरू होगी अब सुप्रीम उम्मीद की सुनवाई

आलोक वर्मा

6 जुलाई को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध

देश की सबसे चर्चित हत्याकांड आरूषि -हेमराज मर्डर केस में इंसाफ मिलेगा या न्याय की सु्प्रीम उम्मीद भी टूट जाएगी। यह फैसला जल्द हो सकता है। दो दिन के बाद यानि 6 जुलाई को इस सबसे रहस्मयी मामले की अपील सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है। अपील सीबीआई की है जिसने इलाहाबाद हाईकोर्ट के तलवार दंपति को बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की गुहार लगाई है।  आपको याद होगा कि देश की सबसे रहस्मयी उस हत्याकांड में लोअर कोर्ट में दोषी करार दिए गए आरूषि के माता पिता को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 12 अक्टूबर को बरी कर दिया था। तब फिर से ये सवाल उठने लगा था कि आखिर इस कांड को अंजाम किसने दिया।

सीबीआई सुप्रीम कोर्ट पहुंची

लेकिन इसी साल मार्च में सीबीआई ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील कर दी। तब से इंतजार था कि इस केस में सुनवाई हो औऱ आखिरकार ये पता लग सके कि सच क्या है। अबकि बार इस सुनवाई पर देश भर की निगाहें फिर से होंगी।

सीबीआई अपील के कुछ संभावित आधार

वैसे तो सीबीआई ने अपील के लंबे चौड़े आधार बनाए हैं। लेकिन सूत्रों के मुताबिक सीबीआई की अपील के 6 प्वाइंट ऐसे हैं जिनको अहम कहा जा सकता है। सीबीआई सूत्रों के मुताबिक संभवतया अपील में हाई कोर्ट में पारिस्थितिजन्य सबूतों को ना माने जाने की बात को प्रमुखता से रखा जाएगा। गौरतलब है कि सीबीआई ने गाजियाबाद में क्लोजर रिपोर्ट लगाते समय हत्याकांड के दिन के हालात को ही अपना मुख्य आधार बताया था। सीबीआई का मानना है कि हालात पूरे हत्याकांड की कड़ी दर कड़ी जोड़ रहे थे इसलिए उन्हें नकारा नहीं जा सकता।

सीबाआई गवाह भारती मंडल की गवाही को भी हाई कोर्ट में ना समझे जाने को सुनवाई के दौरान मजबूती से रख सकती है। माना जाता है कि सीबीआई की नजर में भारती मंडल की गवाही इसलिए अहम है क्योंकि उसकी गवाही से ये साबित हो रहा था कि रात से सुबह तक घर पर बाहर से कोई नहीं आया था। सुनवाई के दौरान राउटर को भी सीबाआई अपना आधार बनाएगी क्योंकि सीबीआई के मुताबिक राउटर की गतिविधि ये साबित कर रही थी कि आरूषि के माता पिता उसके कमरे में दुबारा गए थे। कृष्णा के तकिए पर हेमराज के डीएनए का ना मिलना भी सीबीआई की अपील का हिस्सा हो सकती है। सीबीआई डाक्टर दोहरे के बयान को भी सुप्रीम कोर्ट में उठा सकती है।  आरूषि के पोस्टमार्टम करने वाले डाक्टर दोहरे ने रिपोर्ट में व्हाइट डिस्चार्ज की बात कही है लेकिन हाई कोर्ट ने माना कि दोहरे ने यह बात पहली बार कोर्ट में कही। इसके अलावा कड़कड़ डूमा कोर्ट में राजीव औऱ रोहित के बयान में सीढ़ीयों से पैरों के निशान मिटाने की बात कही गई मगर हाई कोर्ट ने नहीं माना। सीबीआई की अपील में यह मुद्दा भी उठाया जा सकता है।

Latest Posts

BREAKING NEWS
दिल्ली में 100 करोड़ का हेरोइन बरामद देखें वीडियो | दिल्ली में पकड़ा गया खलिस्तानी आतंकी | CISF Airport Security Review 2026: ड्रोन खतरों से निपटने और एयरपोर्ट सुरक्षा मजबूत करने पर जोर | AI Cyber Crime से निपटने की तैयारी, दिल्ली पुलिस को मिलेगा विशेष साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण | वासनाओं का त्याग, सद्बुद्धि और शक्ति का सदुपयोग ही जीवन का सच्चा मार्ग | हवाला और बैंकिंग सिस्टम में क्या अंतर है? आसान भाषा में समझिए पूरा मामला | वचन, निर्णय और धर्म का मार्ग: क्या मानव अपनी लगाम स्वयं संभाल रहा है? | डेटा ब्रीच से बैंक अकाउंट कैसे बचाएं? पूरी जानकारी, गुजरात पुलिस के ऑपरेशन म्यूल से क्या सीख? | एयर टिकट रद्द करने पर 15 गुना तक शुल्क? DGCA नियम 2026, रिफंड चार्ज और आपके अधिकार | CBSE Physics Answer Sheet Mismatch: क्या सच में किसी और का पेपर मिला? जानें पूरा सच | ऑनलाइन सट्टेबाजी भारत में कानूनी है या अवैध? – 2026 | ‘राम की शक्ति पूजा’ से प्रेरित पुस्तक ने युवाओं को दिया नया संदेश |
29-05-2026