दिल्ली हिंसा का राजनीतिकरण करने वालों के लिए है यह खास पड़ताल, जरूर पढ़ें या सुनें

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आलोक वर्मा

दिल्ली हिंसा को भाजपा प्रायोजित औऱ दिल्ली पुलिस की जांच को पक्षपातपूर्ण ठहराने वालों के लिए यह पड़ताल पढ़ना जरूरी है। मैं यह बात इसलिए कह रहा हूं कि पुलिस को दो दशक से ज्यादा समय से बहुत करीब से कवर करता हूं। इस नाते मैं यह जानता हूं कि जांच के समय किसी जांच अधिकारी की सबसे पहली प्राथमिकता क्या होती है। जांच अधिकारी चाहे जो भी हो उसकी पहली प्राथमिकता होती है चार्जशीट कुछ इस तरह से तैयार करना ताकि मामला कोर्ट में फतह हो सके। इसके लिए जरूरत होती है सबूतों की गवाहों की। इसलिए बिना सोचे समझे पुलिसिया कार्यशैली या सतारूढ़ पार्टी की सरकार को कटघरे में खड़ा करने से बचना चाहिए। दिल्ली हिंसा के मामले में जैसे जैसे चार्जशीट दाखिल हो रही है पुलिस पर सवालिया निशान लगाने वालों को जवाब मिल रहा है। जवाब ये कि दंगे की जांच में पुलिस की फाइल पर आने वाला आरोपी केवल दंगाई होता है जिसका कोई धर्म नहीं होता। यह पड़ताल आप पढ़ते जाइए आपको मेरी उपरोक्त बातो का खुद यकीन हो जाएगा।

लोकेश सोलंकी, सुमित चौधरी, अंकित चौधरी, पंकज शर्मा, हितेश, पवन, ऋषभ चौधरी जैसे 205 हिंदू नाम हैं जो दिल्ली हिंसा में आरोपी बनाए गए हैं। यह नाम सिर्फ मैं आपको बता रहा हूं इस एक्सक्लूसिव जानकारी को निकालने के पीछे एक मकसद था। मकसद ये कि दिल्ली पुलिस के दावो की पड़ताल की जाए। यह पड़ताल इसलिए क्योंकि दिल्ली हिंसा की जांच से लेकर चार्जशीट दाखिल करने तक में पुलिस बारबार निष्पक्ष औऱ पेशेवर जांच करने का दावा कर रही थी। इस पड़ताल को आगे बढ़ाए इससे पहले शनिवार को दाखिल चार्जशीट के बारे में जान लेते हैं।

शनिवार को दाखिल चार्जशीट

शनिवार को पुलिस ने दयालपुर थाने में दर्ज एफआईआर नम्बर 75/2020 के मामले में चार्जशीट दाखिल की। यह मामला राहुल सोलंकी से जुड़ा हुआ है। 27 साल का राहुल 24 फरवरी की शाम 5 बजे अपने घर से कुछ दूर सामान लेने गया था। शिव विहार तिहारा इलाके में हिंसा के दौरान मृतक को गोली लग गयी थी। जांच में पता चला कि  घोषित किया था। चार्जशीट में कहा गया है कि इस मामले में सीसीटीवी फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों का बयान है। इसी के आधार पर 7 लोगो को गिरफ्तार किया गया। 7 लोग ही इस मामले में आरोपी हैं मुख्य सलमान को बनाया गया है। आरोप है कि सलमान ने ही एक कम्युनिटी पर गोली चलाई। उससे .32 बोर की पिस्टल बरामद की जा चुकी है। अन्य आरोपियों की पहचान के लिए लगातार जांच जारी है। आरोपियों पर हत्या, साजिश और अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया था।

चार्जशीट और जांच का हिसाब किताब-

दिल्ली पुलिस की चार्जशीट में अगर शनिवार को राहुल सोलंकी हत्या मामले में दाखिल चार्जशीट को भी शामिल कर लिया जाए तो ताहिर हुसैन सहित 212 नाम मुस्लिम समुदाय के हैं। शुक्रवार तक दाखिल चार्जशीट में दोनो समुदाय के लोगों की संख्या बराबर थी। यानि कुल 410 लोगो के खिलाफ चार्जशीट हुई थी जिसमें 205 हिंदू औऱ इतने ही मुस्लिम समुदाय के लोग थे। उपरोक्त तथ्य का उल्लेख इसलिए इसलिए भी जरूरी हो जाता है कि दंगे का कोई धर्म नहीं होता यह एक बार फिर सामने आया है। चार्जशीट में शामिल किए गए नाम, जांच में दिल्ली पुलिस पर पक्षपात का सवाल उठाने वालों को भी जवाब दे रहे हैं। संक्षेप में दिल्ली पुलिस की अब तक दाखिल चार्जशीट में किसी एक का नहीं बल्कि सबका हिसाब किताब रखा गया है। पुलिस के वरिष्ठ अफसर कहते हैं कि जांचकर्ता के लिए ना तो कोई हिंदू होता है ना मुस्लिम। इन अफसरों के मुताबिक जांच में जैसे जैसे और जिसके खिलाफ सबूत मिलते जाते हैं चार्जशीट बनाई जाती है।   

दिल्ली हिंसा में अब तक गिरफ्तारी-

दिल्ली हिंसा के मामले में दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की एसआईटी ने 332 लोगो को अब तक गिरफ्तार किया है। इनमें से 325 अभी तक जेल में हैं। इस मामले में उत्तर-पूर्वी दिल्ली पुलिस ने 982 और स्पेशल सेल ने 14 लोग गिरफ्तार किए। यानि दिल्ली हिंसा में अब तक कुल 1328 लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं। और अगर सबको मिला लिया जाए तो लगभग 1100 लोग अभी भी जेल में हैं।

अब अगर आरोपीवार चार्जशीट को देखा जाए तो शुक्रवार तक दाखिल  केसवार 78 चार्जशीट में 410 लोगों को आरोपित किया जा चुका है। इनमें शुक्रवार तक 205 हिंदू और इतने ही मुस्लिम समुदाय के लोग शामिल हैं। 

चार्जशीट दाखिल करना ट्रायल के पहले की कार्यवाही है। दिल्ली हिंसा की समाप्ति के बाद पुलिस ने 700 क्रिमिनल केस दर्ज किए थे। गौरतलब है कि दिल्ली हिंसा में 53 लोग मारे गए और सैकड़ो घायल हुए थे। 23 से 25 फरवरी तक हुए इस दंगे के बाद सियासी लोगो ने भी अपने-अपने सियासी दावे किए थे। पुलिस पर भी प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से तमाम आरोप लगाए गए। मगर दो महीने के भीतर दाखिल चार्जशीट ने सियासी दावो की पोल खोलनी शुरू की है।

दिल्ली हिंसा के मामले में लोकल पुलिस जो दंगा, हिंसा और संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने आदि का मामला देख रही थी उसने अब तक 164 हिंदू औऱ 142 मुस्लिम समुदाय के लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है।

अब आप समझ गए होंगे कि दंगो में भूमिका अदा करने वाले जब किसी धर्म या समुदाय के नहीं होते तो जांच करने वाली पुलिस कैसे उनकी हो सकती है।

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Alok Verma

a senior journalist with a 25 years experience of print, electronics and digital. worked with dainik jagran, news18india, R,bharat, zee news

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14-05-2026