अपराध की दुनिया में कालिया नाम से जाना जाने वाला कालिया और उसके साथी को पश्चिमी दिल्ली स्पेशल स्टाफ ने गिरफ्तार किया है। उसका असली नाम संदीप है। कालिया के खिलाफ मकोका सहित 202 मामले दर्ज हैं जबकि उसके साथी का नाम भी संदीप है और उसके खिलाफ 107 मामले दर्ज हैं। यह दोनों खासकर चेन झपटमारी के लिए कुख्यात हैं। इनको दबोचने के लिए 250 सीसीटीवी खंगाले गए।
अपराध की दुनिया का कालिया को इस तरह दबोचा
पश्चिमी दिल्ली डीसीपी विचित्र वीर के मुताबिक लूटपाट की घटनाओं के मद्देनजर एसीपी अरविंद कुमार की देखरेख और इंस्पेक्टर राजेश कुमार मौर्य के नेतृत्व में एसआई ठाकुर सिंह, अनिल कुमार, एएसआई ऋषि, हवलदार घुम्मन, फैलराम, नरेन्द्र, उमेश, दीपक, विक्रांत शमशेर, कांस्टेबल मलीष और परमवीर की टीम को विशेष निर्देश दिए गए थे।
पुलिस टीम ने 250 से अधिक सीसीटीवी कैमरों को खंगालने के बाद बाइक पर सवार होकर चेन लूटने वाले बदमाशों के रूट की शिनाख्त की। एएसआई ऋषि और कांस्टेबल मनीष को इन बदमाशों के रामा विहार में होने की सूचना मिली। सूचना के आधार पर संदीप उर्फ कालिया को दबोच लिया गया। उसके साथी संदीप को मोहन गार्डन से गिरफ्तार किया गया। उनके कब्जे से लूटपाट के लिए इस्तेमाल की जाने वाली स्कूटी भी बरामद हुई।
पुलिस के मुताबिक कालिया की उम्र 40 साल है। वह पहली बार साल 2004 में गिरफ्तार हुआ था। उसके बाद उसके खिलाफ 202 मामले हैं। 2007 में उसे साथियों सहित मकोका के तहत गिरफ्तार किया गया। मगर 2012 में 5 साल जेल में रहने के बाद वह बाहर आकर फिर झपटमारी में लिप्त हो गया। उसके खिलाफ नशे की तस्करी, आर्म्स आदि के मामले भी दर्ज हैं।
उसके साथी संदीप को 2020 में मर्डर के मामले में गिरफ्तार किया गया। इसी साल मई में वह भाई की मौत के आधार पर पैरोल लेकर बाहर आया था। मगर उसके बाद से फरार था। उसकी मां के खिलाफ नशे की तस्करी का आरोप है। संदीप के खिलाफ भी झपटमारी आदि के 107 मामले दर्ज हैं।
यह भी पढ़ें
- मोबाइल रेडिएशन से कैंसर होता है ? जानिए सेहत पर इसके असर का सच
- Aadhaar Update: आधार में क्या बदल सकते हैं घर बैठे, फोटो और मोबाइल नंबर बदलने का क्या है तरीका
- सोशल मीडिया पर फर्जी विज्ञापन से ठगी का नया ट्रेंड; भूलकर भी न करें ये गलती, जानें शिकायत का तरीका
- PM Kisan 24th Installment: अगली ₹2000 की किस्त कब आएगी? किस्त रुकी है तो ऐसे करें जांच
- Cyber Fraud: पैसा ट्रांसफर होने से पहले कैसे रुक सकती है साइबर ठगी, ₹5,043 करोड़ बचाने वाले सिस्टम को समझिए












