धार्मिक दृष्टि से जुलाई 2026 का महीना बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस महीने एक के बाद एक कई प्रमुख व्रत और त्योहार मनाए जाएंगे। पंचांग के अनुसार इसी महीने देवशयनी एकादशी के साथ चातुर्मास का आरंभ होगा। चातुर्मास शुरू होने के बाद लगभग चार महीने तक विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते।
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इसी महीने श्री जगन्नाथ रथयात्रा, आषाढ़ गुप्त नवरात्रि, गुरु पूर्णिमा, योगिनी एकादशी और कई अन्य धार्मिक पर्व भी पड़ रहे हैं। धार्मिक मान्यता है कि चातुर्मास के दौरान जप, तप, दान, पूजा और भगवान विष्णु की आराधना का विशेष फल प्राप्त होता है।
जुलाई 2026 व्रत-त्योहार की पूरी सूची
| व्रत एवं त्योहार | तारीख |
|---|---|
| योगिनी एकादशी व्रत | 11 जुलाई 2026 |
| रवि प्रदोष व्रत | 12 जुलाई 2026 |
| आषाढ़ गुप्त नवरात्रि आरंभ | 15 जुलाई 2026 |
| श्री जगन्नाथ रथयात्रा | 16 जुलाई 2026 |
| आषाढ़ गुप्त नवरात्रि समाप्त | 22 जुलाई 2026 |
| हरिशयनी (देवशयनी) एकादशी | 25 जुलाई 2026 |
| श्री विष्णु शयनोत्सव | 25 जुलाई 2026 |
| चातुर्मास का आरंभ | 25 जुलाई 2026 |
| रवि प्रदोष व्रत | 26 जुलाई 2026 |
| गुरु पूर्णिमा एवं व्यास पूजा | 29 जुलाई 2026 |
| कोकिला व्रत आरंभ | 29 जुलाई 2026 |
योगिनी एकादशी का महत्व
आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को योगिनी एकादशी का व्रत रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति को अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति मिलती है। भगवान विष्णु की पूजा और व्रत रखने से पुण्य की प्राप्ति होती है तथा जीवन में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का महत्व
आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि तांत्रिक साधना और दस महाविद्याओं की आराधना के लिए विशेष मानी जाती है। इस दौरान साधक गोपनीय रूप से पूजा, जप और साधना करते हैं। मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई उपासना से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
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श्री जगन्नाथ रथयात्रा का महत्व
पुरी में आयोजित होने वाली श्री जगन्नाथ रथयात्रा देश के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में गिनी जाती है। आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा भव्य रथों पर विराजमान होकर नगर भ्रमण करते हैं। इस दिव्य यात्रा के दर्शन के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं।
देवशयनी एकादशी और चातुर्मास का महत्व
देवशयनी एकादशी, जिसे हरिशयनी एकादशी भी कहा जाता है, भगवान विष्णु के योगनिद्रा में जाने का प्रतीक मानी जाती है। इसी दिन से चातुर्मास की शुरुआत होती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार अगले चार महीनों तक भगवान विष्णु योगनिद्रा में रहते हैं और इस अवधि में विवाह सहित कई मांगलिक कार्य स्थगित रहते हैं। इस समय जप, तप, दान, कथा, भजन और धार्मिक साधना का विशेष महत्व बताया गया है।
गुरु पूर्णिमा का महत्व
जुलाई के अंतिम सप्ताह में आने वाली गुरु पूर्णिमा भारतीय संस्कृति में गुरु के सम्मान का सबसे बड़ा पर्व मानी जाती है। इस दिन महर्षि वेदव्यास की पूजा की जाती है, इसलिए इसे व्यास पूजा भी कहा जाता है। श्रद्धालु अपने गुरु का आशीर्वाद लेकर ज्ञान और आध्यात्मिक उन्नति की कामना करते हैं।
सामान्य प्रश्न
प्रश्न: जुलाई 2026 में देवशयनी एकादशी कब है?
उत्तर: देवशयनी (हरिशयनी) एकादशी 25 जुलाई 2026 को मनाई जाएगी।
प्रश्न: जुलाई 2026 में चातुर्मास कब शुरू होगा?
उत्तर: चातुर्मास की शुरुआत 25 जुलाई 2026 से होगी।
प्रश्न: जुलाई 2026 में जगन्नाथ रथयात्रा कब निकलेगी?
उत्तर: श्री जगन्नाथ रथयात्रा 16 जुलाई 2026 को आयोजित होगी।
प्रश्न: जुलाई 2026 में गुरु पूर्णिमा किस दिन है?
उत्तर: गुरु पूर्णिमा और व्यास पूजा 29 जुलाई 2026 को मनाई जाएगी।
नोट: व्रत एवं त्योहारों की तिथियां प्रचलित पंचांग के अनुसार दी गई हैं। अलग-अलग पंचांगों और स्थानीय परंपराओं के अनुसार इनमें मामूली अंतर संभव है।







