गृह मंत्रालय का यह वाला कदम ऐसे कर रहा है साइबर अपराधियों की पहचान

गृह मंत्रालय

भारत सरकार साइबर क्राइम को लेकर काफी गंभीर है। गृह मंत्रालय भारत सरकार की तरफ से उठाए गए एक खास कदम ने साइबर बदमाशों की पहचान में मददगार साबित हुई है। भारत की संदिग्ध रजिस्ट्री, जिसे सितंबर 2024 में गृह मंत्रालय द्वारा लॉन्च किया गया था, अब देश की साइबर अपराध से लड़ाई में सबसे शक्तिशाली हथियारों में से एक बन चुकी है।

गृह मंत्रालय, भारत सरकार की संदिग्ध राजिस्ट्री ऐसे काम करती है

संदिग्ध रजिस्ट्री क्या है?
• इसे भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) द्वारा विकसित किया गया है।
• इसका आधार है राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) से प्राप्त डेटा।
• इसमें 14 लाख से अधिक संदिग्ध साइबर अपराधियों की पहचान शामिल है, जिनमें अधिकांश वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े हैं।
• यह राज्य, केंद्र शासित प्रदेशों, केंद्रीय जांच एजेंसियों, और 61+ बैंक/वित्तीय संस्थानों को उपलब्ध है।
यह कैसे काम करती है?
• रीयल-टाइम निगरानी: बैंक इस रजिस्ट्री का उपयोग ग्राहक की पहचान सत्यापित करने और संदिग्ध खातों में लेनदेन पर नजर रखने के लिए करते हैं।
• डेटा साझाकरण: संदिग्ध पहचान बैंक और I4C के बीच साझा की जाती है ताकि धोखेबाजों को सिस्टम में प्रवेश करने से रोका जा सके।
• खाता फ्रीजिंग: धोखाधड़ी से जुड़े खातों को तुरंत फ्रीज़ किया जाता है, अक्सर पैसे निकालने से पहले ही।
• वित्तीय सिस्टम से एकीकरण: इसमें निजी बैंक, राष्ट्रीयकृत बैंक, वॉलेट्स और भुगतान प्लेटफ़ॉर्म जैसे SBI, Axis Bank, Airtel Payments Bank आदि शामिल हैं।
अब तक का प्रभाव (अगस्त 2025 तक)
मापदंड आंकड़ा
रोके गए धोखाधड़ी वाले लेनदेन 13 लाख+
बचाई गई राशि ₹5,111.80 करोड़
साझा की गई संदिग्ध पहचान 13.06 लाख
फ्रीज़ किए गए खाते 3.54 लाख
ब्लॉक किए गए सिम 7 लाख
चिन्हित किए गए डिवाइस 1.4 लाख
वर्ष 2021–2024 के बीच ₹33,000 करोड़ से अधिक की साइबर धोखाधड़ी दर्ज की गई, जिनमें 80% से अधिक मामले वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े थे।
साइबर अपराध रोकथाम में रणनीतिक योगदान
• पूर्व-निरोधक ब्लॉकिंग: संदिग्ध तत्वों को पहले ही चिन्हित कर धोखाधड़ी को होने से रोकता है।
• एजेंसी समन्वय: पुलिस, बैंक और खुफिया एजेंसियों के बीच निर्बाध सहयोग को सक्षम बनाता है।
• धोखाधड़ी जोखिम प्रबंधन: निवेश धोखाधड़ी, डिजिटल गिरफ्तारी और म्यूल खातों जैसे स्कैम से वित्तीय प्रणाली को मजबूत करता है।
• नागरिक सुरक्षा: पीड़ितों को रिफंड दिलाने और हानिकारक ऐप्स, वेबसाइट्स व मोबाइल नंबरों को ब्लॉक करने में मदद करता है।

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inspector raman kumar
इंस्पेक्टर रमण कुमार सिंह,दिल्ली पुलिस में बतौर इंस्पेक्टर तैनात है । वे दिल्ली के कई पुलिस थानों के साथ साथ साइबर पुलिस स्टेशन के थानाध्यक्ष रहे है । वे साइबर जागरूकता के लिए साइबर सेफ व्हाट्सएप्प ग्रुप और बी द पुलिस नाम से फेसबुक पेज और फेसबुक ग्रुप के संचालक है ।

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