Digital Arrest Scam India: कैसे मनोवैज्ञानिक डर से करोड़ों की ठगी हो रही है

भारत में Digital Arrest Scam तेजी से फैल रहा है जिसमें अपराधी सरकारी अधिकारी बनकर डर के ज़रिये करोड़ों की ठगी कर रहे हैं। जानिए तरीका, केस स्टडी और बचाव।
Digital Arrest Scam India
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भारत में साइबर अपराध अब केवल तकनीकी हमला नहीं रहा, बल्कि यह मनोवैज्ञानिक युद्ध बन चुका है। अपराधी तकनीक से ज़्यादा मानव मस्तिष्क को निशाना बना रहे हैं।
“डिजिटल अरेस्ट स्कैम” इसी का सबसे ख़तरनाक उदाहरण है, जिसमें डर, अधिकार का भ्रम और अलगाव पैदा करके पीड़ित से उसकी पूरी जीवन भर की कमाई निकलवा ली जाती है। हैरानी की बात यह है कि इसके शिकार केवल अनपढ़ नहीं, बल्कि डॉक्टर, प्रोफेसर और रिटायर्ड बैंक अधिकारी भी हो रहे हैं।

मनोवैज्ञानिक फ्रॉड की कार्यप्रणाली

1️⃣ डिजिटल अरेस्ट स्कैम का तरीका

• अपराधी खुद को सरकारी अधिकारी (TRAI, पुलिस, CBI आदि) बताकर कॉल करते हैं।
• पीड़ित को मनी लॉन्ड्रिंग, टैक्स चोरी या अंतरराष्ट्रीय अपराधों का आरोपी बताया जाता है।
• “कानूनी सुरक्षा” के नाम पर पैसा ट्रांसफर करवाया जाता है।
• पीड़ित को किसी से बात न करने को कहा जाता है।
• लगातार दबाव, धमकी और आधिकारिक भाषा का प्रयोग किया जाता है।

2️⃣ मनोवैज्ञानिक हथकंडे

• Fear Conditioning — गिरफ्तारी और कानूनी डर
• Isolation — परिवार से काट देना
• Authority Illusion — सरकारी शक्ति का भ्रम
• Cognitive Overload — लगातार कॉल, दस्तावेज़ और निर्देश

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केस स्टडी: साउथ दिल्ली के रिटायर्ड डॉक्टर दंपति

• दो सप्ताह तक TRAI और मुंबई पुलिस बनकर कॉल।
• मनी लॉन्ड्रिंग का फर्जी आरोप।
• डर के कारण ₹15 करोड़ ट्रांसफर।
• मामला IFSO को सौंपा गया।

अन्य प्रमुख मामले

तिथिप्रोफाइलराशिअवधि
Dec 202585 वर्षीय महिला₹1.3 करोड़1 माह
Nov 2025वृद्ध पुरुष₹1 करोड़कुछ दिन
Sept 202573 वर्षीय रिटायर्ड बैंकर
March 202590 वर्षीय नागरिक₹3.4 करोड़
Oct 2024जापानी प्रोफेसर₹7 लाख

मुख्य कारण

• अनजान कॉल्स को गंभीरता से लेना
• संवाद में उलझते जाना
• डर में विवेक का क्षरण
• डिजिटल साक्षरता की कमी
• स्कैम पैटर्न की जानकारी का अभाव

समाधान और सुझाव

नागरिकों के लिए

• सरकारी बनकर डराने वाली कॉल तुरंत काटें।
• स्थानीय पुलिस से पुष्टि करें।
• कभी पैसा ट्रांसफर न करें।
• 1930 पर तुरंत शिकायत करें।

निष्कर्ष

डिजिटल अरेस्ट स्कैम साबित करता है कि आधुनिक अपराध का सबसे बड़ा हथियार तकनीक नहीं, बल्कि मानव मन है। इससे लड़ाई केवल पुलिस नहीं जीत सकती, इसके लिए हर नागरिक को सजग, शांत और सूचित रहना होगा

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