दिल्ली में अपराध: 2023 से 2025 तक के आंकड़े क्या बताते हैं?

दिल्ली में अपराध को लेकर धारणाएं बहुत हैं, लेकिन 2023 से 2025 तक के आधिकारिक आंकड़े क्या कहते हैं—यह रिपोर्ट सिर्फ नंबरों के आधार पर पूरी तस्वीर सामने रखती है।
प्रतिकात्मक इमेज। दिल्ली अपराध आंकड़े 2023 से 2025 का विश्लेषण

दिल्ली में अपराध को लेकर बहस नई नहीं है। कभी कहा जाता है कि अपराध बढ़ रहे हैं, तो कभी दावा किया जाता है कि पुलिस की कार्रवाई तेज हुई है। लेकिन भावनाओं और धारणाओं से अलग, अगर सिर्फ आंकड़ों को देखा जाए, तो तस्वीर कुछ और ही कहानी कहती है। साल 2023, 2024 और 2025 के अपराध आंकड़े यह समझने में मदद करते हैं कि राजधानी दिल्ली में अपराध की दिशा क्या रही है और कानून व्यवस्था किस हद तक प्रभावी रही है।

हत्या और हत्या के प्रयास

हत्या जैसे गंभीर अपराधों में पिछले तीन वर्षों के दौरान मामूली लेकिन स्पष्ट गिरावट दर्ज की गई है।
2023 में हत्या के 506 मामले सामने आए, जो 2025 में घटकर 491 रह गए। खास बात यह है कि इन मामलों में सॉल्व रेट 95 प्रतिशत से अधिक रहा, जो जांच की मजबूती को दर्शाता है।

वहीं, हत्या के प्रयास के मामलों में 2024 के दौरान बढ़ोतरी देखी गई, लेकिन 2025 में यह संख्या फिर संतुलित होती दिखाई दी। यह संकेत देता है कि हिंसक टकराव पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं।

लूट और बलात्कार के आंकड़े

लूट के मामलों में लगातार गिरावट दर्ज की गई है।
2023 में 1654 मामलों से घटकर 2025 में यह संख्या 1326 तक आ गई। सॉल्व रेट 97 प्रतिशत से अधिक रहा, जो स्ट्रीट क्राइम पर पुलिस की पकड़ को दिखाता है।

बलात्कार के मामलों में भी तीन वर्षों में कमी देखी गई है। हालांकि यह विषय अत्यंत संवेदनशील है, लेकिन आंकड़े यह संकेत देते हैं कि रिपोर्टिंग के बाद जांच और कार्रवाई में सुधार हुआ है।

उगाही और स्नैचिंग: चिंता का क्षेत्र

उगाही के मामलों में कोई बड़ा सुधार नजर नहीं आता। 2025 में भी इन मामलों की संख्या लगभग स्थिर बनी रही और सॉल्व रेट अपेक्षाकृत कमजोर रहा।

स्नैचिंग के मामलों में संख्या जरूर घटी है—2023 के लगभग 8 हजार मामलों से घटकर 2025 में करीब 5400—लेकिन सॉल्व रेट अब भी चुनौती बना हुआ है। यही वह अपराध है जो आम नागरिक की रोजमर्रा की सुरक्षा भावना को सबसे ज्यादा प्रभावित करता है।

महिलाओं से जुड़े अपराध

महिलाओं से जुड़े अपराधों में लगातार गिरावट दर्ज की गई है।
M.O. Women कैटेगरी के मामलों में 2023 से 2025 तक साफ कमी दिखती है।
ईव-टीज़िंग के मामलों में भी धीमी लेकिन सकारात्मक गिरावट देखी गई है। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि महिला सुरक्षा के मामले में ज़ीरो टॉलरेंस ही सही पैमाना होना चाहिए।

निष्कर्ष

पूरे डेटा को देखने पर साफ होता है कि दिल्ली में अपराध पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं, लेकिन उनकी प्रकृति और नियंत्रण में बदलाव जरूर आया है। गंभीर अपराधों में जांच मजबूत हुई है, जबकि स्ट्रीट और छोटे अपराधों में अभी और प्रयास की जरूरत है। दिल्ली की अपराध तस्वीर अब सिर्फ डर की नहीं, बल्कि डेटा और जवाबदेही की कहानी कहती है।

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Alok Verma
a senior journalist with a 30 years experience of print, electronics and digital. worked with dainik jagran, news18india, R,bharat, zee news

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11-09-2026