NIA चार्जशीट: कंबोडिया लिंक्ड मानव तस्करी और साइबर गुलामी का बड़ा खुलासा

NIA की जांच में कंबोडिया से जुड़े साइबर गुलामी नेटवर्क का खुलासा हुआ, जिसमें भारतीय युवाओं को नौकरी के नाम पर फंसाकर जबरन साइबर अपराध में लगाया जाता था।
कंबोडिया साइबर गुलामी केस में NIA जांच की प्रतीकात्मक तस्वीर

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (National Investigation Agency) ने कंबोडिया से जुड़े मानव तस्करी और साइबर गुलामी के एक गंभीर मामले में पांच आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है। यह मामला बताता है कि किस तरह विदेशी नौकरी का सपना दिखाकर भारतीय युवाओं को साइबर गुलामी के जाल में फंसाया जा रहा है।

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कैसे फैला साइबर गुलामी का नेटवर्क

जांच के दौरान सामने आया कि इस गिरोह का संचालन सुनियोजित तरीके से किया जा रहा था। मास्टरमाइंड आनंद कुमार सिंह उर्फ मुन्ना सिंह, जो अभी फरार है, भारत में एजेंटों और ट्रैवल नेटवर्क के जरिए युवाओं की पहचान करता था। उन्हें अच्छी सैलरी और सुरक्षित नौकरी का भरोसा दिलाया जाता था, जिससे वे बिना ज्यादा जांच किए विदेश जाने के लिए तैयार हो जाते थे।

सुनिए साइबर गुलामी के शिकार युवक की आपबीतीः

नौकरी का वादा और फिर कैद

कंबोडिया पहुंचने के बाद सच्चाई बिल्कुल अलग होती थी। युवाओं के पासपोर्ट तुरंत छीन लिए जाते थे और उन्हें ऐसे स्थानों पर रखा जाता था जहां से निकल पाना लगभग असंभव था। उन्हें साइबर फ्रॉड से जुड़ी गतिविधियों में काम करने के लिए मजबूर किया जाता था और यही स्थिति धीरे-धीरे साइबर गुलामी में बदल जाती थी, जहां व्यक्ति की इच्छा और स्वतंत्रता पूरी तरह खत्म हो जाती थी।

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अमानवीय अत्याचार की परतें

इस मामले में पीड़ितों के साथ जो व्यवहार हुआ, वह बेहद चिंताजनक है। जांच एजेंसी के अनुसार विरोध करने पर उन्हें मानसिक और शारीरिक यातनाएं दी जाती थीं। कई मामलों में इलेक्ट्रिक शॉक दिए गए, लंबे समय तक बंद कमरों में रखा गया और भोजन तथा पानी तक से वंचित किया गया। इस तरह का दबाव उन्हें मजबूर करता था कि वे गिरोह के निर्देशों के अनुसार काम करते रहें।

आरोपी और उनका नेटवर्क

इस केस में पांच लोगों को आरोपित किया गया है, जिनमें मास्टरमाइंड आनंद कुमार सिंह के अलावा अभय नाथ दुबे, अभिरंजन कुमार, रोहित यादव और प्रह्लाद कुमार सिंह शामिल हैं। इनमें से तीन को फरवरी 2026 में कंबोडिया से लौटते समय गिरफ्तार किया गया था, जबकि एक आरोपी फिलहाल जमानत पर है।

जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि हर युवक को फर्जी कंपनियों को दो से तीन हजार अमेरिकी डॉलर में ‘बेचा’ जाता था। यह पूरी व्यवस्था मानव तस्करी और साइबर गुलामी का संगठित रूप बन चुकी थी, जिसमें इंसान को एक साधन की तरह इस्तेमाल किया जा रहा था।

क्यों बढ़ रहा है साइबर गुलामी का खतरा

विदेश में बेहतर अवसर की तलाश कर रहे युवाओं के लिए यह मामला एक गंभीर चेतावनी है। इंटरनेट और सोशल मीडिया के जरिए दिए जा रहे आकर्षक जॉब ऑफर कई बार धोखे का माध्यम बन जाते हैं। साइबर गुलामी अब एक उभरती हुई आपराधिक प्रवृत्ति है, जो सीमाओं के पार फैल रही है और युवाओं को सबसे ज्यादा निशाना बना रही है।

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Alok Verma

a senior journalist with a 25 years experience of print, electronics and digital. worked with dainik jagran, news18india, R,bharat, zee news

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