Cyber fraud debit freeze refund को लेकर लोगों में सबसे ज्यादा भ्रम रहता है। अकाउंट फ्रीज़ होने के बाद पैसा कब मिलेगा, इसका जवाब अब नई SOP में साफ किया गया है। साइबर अपराध से जुड़े वित्तीय मामलों में पीड़ितों को वर्षों तक राहत न मिलने की समस्या को देखते हुए, गृह मंत्रालय ने NCRP–CFCFRMS प्लेटफॉर्म के तहत एक नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की है। इस SOP का उद्देश्य जांच को तेज करना, मनमाने डेबिट फ्रीज़ को रोकना और पीड़ितों को समयबद्ध धन बहाली सुनिश्चित करना है।
डेबिट फ्रीज़ और लियन से जुड़े मुख्य प्रावधान
नई SOP में बैंकों और जांच एजेंसियों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
- यदि कोई न्यायालय आदेश या बहाली निर्देश उपलब्ध नहीं है, तो बैंक को 90 दिनों के भीतर डेबिट फ्रीज़ या लियन हटाना अनिवार्य होगा।
- ₹50,000 से कम के साइबर धोखाधड़ी मामलों में, बिना न्यायालय आदेश के तुरंत धनवापसी की जा सकती है ताकि पीड़ितों को अनावश्यक परेशानी न हो।
- सक्षम न्यायालय द्वारा BNSS या अन्य लागू कानूनों के तहत निर्देश दिए जाने पर, फ्रीज़ तब तक जारी रहेगा जब तक मामला निपट नहीं जाता।
- SOP यह सुनिश्चित करती है कि फ्रीज़ प्रक्रिया मनमानी या अनिश्चितकालीन न हो और निर्दोष खाता धारकों के अधिकार सुरक्षित रहें।
NCRP और CFCFRMS की पृष्ठभूमि
- NCRP (राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल) वर्ष 2019 में शुरू किया गया, जिससे नागरिक ऑनलाइन साइबर अपराध की शिकायत दर्ज कर सकें।
- CFCFRMS (नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग एवं प्रबंधन प्रणाली) 2021 में शुरू की गई, जो पुलिस, बैंक और वित्तीय संस्थानों को वास्तविक समय में जोड़ती है।
- नई SOP का उद्देश्य साइबर-सक्षम वित्तीय अपराधों से निपटने के लिए एक समान, निष्पक्ष और पारदर्शी ढांचा तैयार करना है।
आंकड़े जो सिस्टम की जरूरत को दर्शाते हैं
अप्रैल 2021 से नवम्बर 2025 के बीच:
- कुल रिपोर्टेड साइबर वित्तीय धोखाधड़ी: ₹52,969 करोड़
- धोखेबाजों से रोकी गई राशि: ₹7,647 करोड़
- पीड़ितों को लौटाई गई राशि: ₹167 करोड़ (लगभग 2.18%)
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि पीड़ित राहत के लिए तेज और सरल प्रक्रियाओं की आवश्यकता थी।
SOP के प्रमुख उद्देश्य
- सभी भागीदार संस्थाओं के लिए समान प्रक्रियाएँ तय करना
- “पुट-ऑन-होल्ड” और जब्ती तंत्र के दुरुपयोग को रोकना
- पीड़ित-केंद्रित धन बहाली सुनिश्चित करना
- समयबद्ध शिकायत निवारण उपलब्ध कराना
- नागरिक अधिकारों, जैसे जीविका और गोपनीयता के अधिकार, की रक्षा करना
SOP का दायरा
यह SOP निम्न बिंदुओं को कवर करती है:
- संदिग्ध लेन-देन को रोकना और अंतरिम कस्टडी
- डिजिटल बैंकिंग सेवाओं का निलंबन और बहाली
- साइबर अपराध से जुड़े खातों या संपत्ति की जब्ती और रिहाई
- अंतरिम कस्टडी और बहाली के पाँच वैकल्पिक तरीके
- अप्राप्त धन का निपटान
- CFCFRMS के माध्यम से की गई कार्रवाइयों पर शिकायत निवारण
मार्गदर्शक सिद्धांत
- BNSS, CrPC समकक्ष धाराएँ, PMLA और अन्य लागू कानूनों के तहत कानूनी आधार
- केवल वास्तविक साइबर-सक्षम वित्तीय अपराधों पर कार्रवाई
- NCRP-API के माध्यम से बैंकों द्वारा वास्तविक समय में “पुट-ऑन-होल्ड”
- AML/CFT और RBI दिशानिर्देशों का पालन
- पीड़ित-प्रथम दृष्टिकोण और पारदर्शिता, जिसमें हर चरण पर सूचना देना शामिल है
शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया
- पीड़ित NCRP पोर्टल https://cyberpolice.nic.in/ या हेल्पलाइन 1930 के माध्यम से शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
- बैंक अपने ग्राहकों की ओर से भी शिकायत दर्ज करने के लिए अधिकृत हैं।
- आवश्यकता पड़ने पर FIR या e-FIR दर्ज की जाती है और मामला CFCFRMS से जोड़ा जाता है।
पीड़ित संरक्षण और धन बहाली
SOP के तहत अंतरिम कस्टडी, कई पीड़ितों के मामलों में समानुपातिक वितरण और अप्राप्त धन के लिए निर्धारित निपटान तंत्र का प्रावधान किया गया है।
निष्कर्ष
गृह मंत्रालय की यह नई SOP साइबर अपराध मामलों में पीड़ितों को केंद्र में रखकर तैयार की गई है। यह जांच एजेंसियों, बैंकों और वित्तीय संस्थानों के लिए जवाबदेह और पारदर्शी ढांचा प्रदान करती है, जिससे अपराध रोकथाम और नागरिक अधिकारों के बीच संतुलन बना रहे।







