राष्ट्रीय अपराध ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट बताती है कि भारत में साइबर अपराध के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ रही है। साइबर क्राइम के मामले दर्ज कराने में अब लोग आगे आने लगे हैं। इसीलिए ऐसे मामलो में तेज उछाल देखने को मिला है। ताजा आंकड़ो के अनुसार 2026 में 86,420 मामले दर्ज हुए, जबकि 2021 में यह संख्या 52,974 थी। यह लगभग 63% की वृद्धि दर्शाता है।
क्या कहते हैं आंकड़े
साइबर अपराध के आंकड़े बताते हैं कि सर्वाधिक प्रभावित राज्य कर्नाटक, दिल्ली और उत्तर प्रदेश हैं। आम लोग जिन तरह के साइबर अपराध के शिकार हुए उनमें पहचान की नकल, वित्तीय ठगी, डिजिटल अरेस्ट स्कैम, फिशिंग और ओटीपी फ्राड हैं।
भारत में साइबर अपराध बढ़ने के कारण
UPI, मोबाइल बैंकिंग और ई-कॉमर्स के बढ़ते उपयोग ने लोगों की सुविधा बढ़ाई है, लेकिन साथ ही धोखाधड़ी के नए रास्ते भी खुले हैं। डिजिटल अरेस्ट स्कैम में अपराधी खुद को पुलिस या सरकारी अधिकारी बताकर डर पैदा करते हैं और पैसे ट्रांसफर करवाते हैं।
यह भी पढ़ेंः साइबर खतरों से कैसे बचा रही हैं ये 2 डिजिटल सुरक्षा पहलें? ज्योतिरादित्य सिंधिया ने किया खुलासा
सोशल मीडिया पर फर्जी प्रोफाइल, सेक्स्टार्शन और लिंक स्कैम तेजी से बढ़ें हैं। पहचान छिपाना आसान होने के कारण बदमाशों को लाभ मिलता है। मामले बढ़ने का एक कारण रिपोर्टिंग सिस्टम में हुआ सुधार भी है।
सरकारी पोर्टल और हेल्पलाइन बेहतर हुए हैं, जिससे अब ज्यादा लोग शिकायत दर्ज कर रहे हैं। इसके अलावा एआ आधिरत साइबर हमलो नें भी इसको बढ़ावा दिया है। नई तकनीक का इस्तेमाल कर फर्जी कॉल, ईमेल और मैसेज अधिक विश्वसनीय बनाए जा रहे हैं।
सर्वाधिक खतरा इनको
वरिष्ठ नागरिक, छोटे व्यापारी, नए इंटरनेट उपयोगकर्ता और ग्रामीण क्षेत्र के लोग ज्यादा निशाना बनते हैं। इन वर्गों में जागरूकता कम होने से धोखाधड़ी का जोखिम अधिक रहता है।
साइबर अपराध से कैसे बचें? (Practical Tips)
- कभी भी OTP या बैंक डिटेल किसी के साथ साझा न करें
- अनजान लिंक या ऐप डाउनलोड से बचें
- कॉल पर खुद को पुलिस या अधिकारी बताने वालों से सतर्क रहें
- बैंक या UPI ऐप का उपयोग करते समय केवल आधिकारिक ऐप ही इस्तेमाल करें
- किसी भी संदिग्ध घटना की तुरंत रिपोर्ट करें (1930 हेल्पलाइन) या https://cyberpolice.nic.in/
क्या यह सिर्फ खतरा है या एक संकेत भी?
साइबर अपराध के बढ़ते मामले दो चीजें दिखाते हैं। एक तरफ ऑनलाइन धोखाधड़ी का विस्तार हो रहा है, दूसरी तरफ लोग अब अधिक जागरूक होकर शिकायत दर्ज करा रहे हैं। यह बदलाव बताता है कि सुरक्षा और जागरूकता दोनों पर साथ काम करने की जरूरत है।









