नई दिल्ली में 22 और 23 जून 2026 को आयोजित हो रही BRICS राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में बढ़ती गैर पारंपरिक चुनौतियों पर केंद्रित है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की अध्यक्षता में हो रही यह बैठक साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उभरती तकनीकों से जुड़े खतरों पर विशेष ध्यान दे रही है।
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BRICS NSA Meeting 2026 Delhi में सदस्य देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और प्रतिनिधिमंडल प्रमुख भाग ले रहे हैं। बैठक का मुख्य विषय वर्तमान समय की गैर पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियां हैं, जिनमें साइबर सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में शामिल है।
साइबर सुरक्षा क्यों बनी प्रमुख चिंता?
डिजिटल तकनीकों के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर खतरों का स्वरूप भी तेजी से बदल रहा है। बैठक में इस बात पर चर्चा हो रही है कि किस प्रकार डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र को शत्रुतापूर्ण तत्व उन्नत तकनीकों की मदद से निशाना बना रहे हैं।
Brics nsa meeting 2026 cyber security के एजेंडे में तेजी से विकसित हो रहे साइबर खतरों और उनके प्रभावों का आकलन प्रमुख विषयों में शामिल है। सदस्य देशों के प्रतिनिधि साइबर सुरक्षा को राष्ट्रीय और वैश्विक सुरक्षा के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देख रहे हैं।
AI और Deepfake से बढ़ी नई चुनौतियां
बैठक में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम कंप्यूटिंग और डीपफेक तकनीकों पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इन तकनीकों ने जहां विकास की नई संभावनाएं खोली हैं, वहीं नई कमजोरियां भी पैदा की हैं।
Ajit Doval BRICS Meeting 2026 के दौरान इस बात पर विचार किया जा रहा है कि उभरती तकनीकों के दुरुपयोग को कैसे रोका जाए और डिजिटल सुरक्षा ढांचे को कैसे मजबूत बनाया जाए। डीपफेक तकनीक और एआई आधारित साइबर खतरों को भविष्य की प्रमुख चुनौतियों में गिना जा रहा है।
महत्वपूर्ण अवसंरचना की सुरक्षा पर फोकस
बैठक में वित्तीय प्रणालियों, ऊर्जा ग्रिड और संचार नेटवर्क की सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी गई है। प्रतिनिधियों का मानना है कि इन क्षेत्रों पर साइबर घुसपैठ का प्रभाव व्यापक हो सकता है।
यही कारण है कि Critical Infrastructure Cyber Attacks से सुरक्षा को BRICS देशों के सहयोग के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में शामिल किया गया है।
सीमा पार साइबर अपराध पर साझा चिंता
बैठक में सीमा पार साइबर अपराधों पर भी चर्चा हो रही है। विशेष रूप से What is Ransomware as a Service (RaaS) जैसे उभरते खतरों, फिशिंग सिंडिकेट्स और हाइब्रिड साइबर युद्ध के खिलाफ समन्वित प्रतिक्रिया की आवश्यकता पर बल दिया जा रहा है।
प्रतिनिधियों का मानना है कि साइबर अपराध अब किसी एक देश की समस्या नहीं रह गया है और इसके मुकाबले के लिए सहयोगात्मक दृष्टिकोण आवश्यक है।
सूचना युद्ध भी चर्चा के केंद्र में
सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म के बढ़ते प्रभाव के बीच दुष्प्रचार अभियानों की चुनौती भी बैठक के प्रमुख विषयों में शामिल है।
Information Warfare Examples in India समेत विभिन्न देशों के अनुभवों के संदर्भ में यह चर्चा हो रही है कि डिजिटल मंचों का दुरुपयोग राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए किस प्रकार चुनौती बन सकता है।
BRICS कार्य समूहों की होगी समीक्षा
BRICS National Security Advisors Meeting India के दौरान आतंकवाद निरोधक संयुक्त कार्य समूह की प्रगति की समीक्षा भी की जाएगी। इसमें डिजिटल माध्यमों से आतंक वित्तपोषण के साइबर आयामों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
इसके अलावा सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के उपयोग में सुरक्षा संबंधी संयुक्त कार्य समूह के कार्यों का भी आकलन किया जाएगा। यह समूह साइबर मानदंडों, जिम्मेदार राज्य व्यवहार, घटना प्रतिक्रिया तंत्र और डेटा साझाकरण जैसे विषयों पर काम कर रहा है।
भारत की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण?
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के नेतृत्व में भारत की मेजबानी वैश्विक साइबर सुरक्षा सहयोग के प्रति देश की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। बैठक से साइबर रक्षा, डिजिटल फॉरेंसिक और क्षमता निर्माण के क्षेत्रों में BRICS सहयोग को और मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
Brics cyber security agreement 2026 को लेकर आधिकारिक घोषणा का उल्लेख प्रेस सामग्री में नहीं है, लेकिन बैठक का पूरा फोकस साइबर सुरक्षा सहयोग, साइबर लचीलापन और डिजिटल खतरों के खिलाफ साझा दृष्टिकोण विकसित करने पर केंद्रित है।
नई दिल्ली में आयोजित यह बैठक इस तथ्य को रेखांकित करती है कि साइबर सुरक्षा अब केवल तकनीकी विषय नहीं रह गई है, बल्कि राष्ट्रीय और वैश्विक सुरक्षा का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है।
