सीआईएसएफ को मिला नया मुख्यालय, जानिए इसकी विशेषताएं

नई दिल्ली के सीजीओ कॉम्प्लेक्स में CISF के नए मुख्यालय भवन की आधारशिला रखी गई। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार ने ₹136.03 करोड़ की विभिन्न बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का उद्घाटन करते हुए बल की आधुनिक सुरक्षा और कल्याणकारी पहलों को रेखांकित किया।
नई दिल्ली में CISF के नए मुख्यालय भवन की आधारशिला कार्यक्रम में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार और वरिष्ठ अधिकारी और बल के डीजी प्रवीर रंजन

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार ने रविवार को नई दिल्ली के लोधी रोड स्थित सीजीओ कॉम्प्लेक्स में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के नए मुख्यालय भवन की आधारशिला रखी। इस दौरान उन्होंने ₹136.03 करोड़ की लागत से तैयार और विकसित की गई विभिन्न बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का उद्घाटन कर उन्हें राष्ट्र को समर्पित किया।

सीआईएसएफ के नए बनने वाले मुख्यालय में कई विशेषताएं होंगी।

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कार्यक्रम में केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, इंटेलिजेंस ब्यूरो के निदेशक तपन कुमार डेका, सांसद बांसुरी स्वराज, CISF महानिदेशक प्रवीर रंजन, विभिन्न केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के वरिष्ठ अधिकारी, CPWD और SBI के प्रतिनिधि तथा CISF के पूर्व महानिदेशक मौजूद रहे।

सीआईएसएफ मुख्यालय बनेगा संचालन का प्रमुख केंद्र

CPWD द्वारा लगभग ₹75.78 करोड़ की लागत से निर्मित होने वाला नया मुख्यालय भवन CISF के प्रशासनिक, परिचालन और रणनीतिक कार्यों का प्रमुख केंद्र होगा। नौ मंजिला इस आधुनिक भवन में महानिदेशक कार्यालय के साथ विभिन्न शाखाओं के कार्यालय, उन्नत नियंत्रण कक्ष, आधुनिक सम्मेलन कक्ष, सभागार, पुस्तकालय और व्यायामशाला जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

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गृह राज्य मंत्री ने कहा कि मजबूत बुनियादी ढांचा किसी भी सुरक्षा बल की कार्यक्षमता को नई ऊंचाई देता है और यह भवन CISF की बढ़ती जिम्मेदारियों के अनुरूप तैयार किया जा रहा है।

तीन महत्वपूर्ण परियोजनाओं का भी हुआ उद्घाटन

समारोह में CISF से जुड़ी तीन महत्वपूर्ण परियोजनाओं का उद्घाटन भी किया गया। इनमें हैदराबाद स्थित राष्ट्रीय औद्योगिक सुरक्षा अकादमी (NISA) में ₹34.22 करोड़ की लागत से निर्मित अधीनस्थ अधिकारी मेस “आदित्य”, ₹20.53 करोड़ की लागत वाला आधुनिक प्रशिक्षण भवन “अभ्यास” तथा तमिलनाडु के शिवगंगा जिले के अमरावतीपुदुर स्थित चौथी आरक्षित वाहिनी में ₹5.50 करोड़ की लागत से बने अधीनस्थ अधिकारी आवास शामिल हैं।

इन परियोजनाओं का उद्देश्य प्रशिक्षण सुविधाओं को मजबूत करना और कर्मियों के लिए बेहतर आवासीय व्यवस्था उपलब्ध कराना है।

शहीद कर्मियों के परिवारों को मिली आर्थिक सहायता

कार्यक्रम के दौरान ड्यूटी के दौरान अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले CISF कर्मियों के आश्रित परिवारों को व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा योजना के तहत ₹1-1 करोड़ की सहायता राशि के चेक प्रदान किए गए।

इसके अलावा CISF की ‘संरक्षिका’ और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की संयुक्त पहल के तहत विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को कस्टमाइज्ड मोटराइज्ड व्हीलचेयर भी वितरित की गईं।

CAPF जवानों के कल्याण पर सरकार का जोर

अपने संबोधन में बंडी संजय कुमार ने कहा कि केंद्र सरकार केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के जवानों और उनके परिवारों के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।

उन्होंने आयुष्मान CAPF, CAPFIMS, CAPF ई-आवास पोर्टल और नई विकलांगता नीति जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि ड्यूटी के दौरान शारीरिक रूप से अक्षम होने वाले जवानों को अब सेवा से बाहर नहीं किया जाएगा। वे सम्मान, पदोन्नति और पूर्ण सेवा लाभों के साथ अपनी सेवाएं जारी रख सकेंगे।

उन्होंने जवानों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए चलाए जा रहे प्रोजेक्ट MANN और केंद्रीय पुलिस कल्याण भंडार (KPKB) नेटवर्क की भी सराहना की।

साइबर सुरक्षा, ड्रोन और हाइब्रिड खतरों पर CISF का फोकस

CISF महानिदेशक प्रवीर रंजन ने कहा कि सुरक्षा चुनौतियां तेजी से बदल रही हैं। अब साइबर हमले, डिजिटल तोड़फोड़, ड्रोन और तकनीक आधारित हाइब्रिड खतरे सुरक्षा एजेंसियों के सामने नई चुनौतियां बनकर उभरे हैं।

उन्होंने बताया कि RTC बहरोड़ को ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक के उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को ड्रोन हमलों से सुरक्षित रखने के लिए CISF को नोडल एजेंसी की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है।

उन्होंने कहा कि IIT मद्रास प्रवर्तक, नेशनल फोरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी (NFSU) गांधीनगर और सी-डैक (C-DAC) जैसे संस्थानों के सहयोग से CISF की विशेष साइबर सुरक्षा टीमों को प्रशिक्षित किया जा रहा है।

बंदरगाह सुरक्षा और जेल प्रबंधन में बढ़ी भूमिका

महानिदेशक ने बताया कि CISF को इंटरनेशनल शिप एंड पोर्ट फैसिलिटी सिक्योरिटी (ISPS) कोड के तहत मान्यता प्राप्त सुरक्षा संगठन (RSO) का दर्जा मिला है। इसके बाद बल अब देश के प्रमुख बंदरगाहों के सुरक्षा ऑडिट और मूल्यांकन का कार्य भी करेगा।

उन्होंने यह भी बताया कि CISF ने जम्मू-कश्मीर के संवेदनशील क्षेत्रों में उच्च सुरक्षा वाली जेलों की जिम्मेदारी संभाली है, जिससे आंतरिक सुरक्षा ढांचे में उसकी भूमिका और मजबूत हुई है।

पहली पूर्ण महिला आरक्षित बटालियन को मंजूरी

महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में गृह मंत्रालय ने हरियाणा के नूंह में CISF की पहली पूर्ण महिला आरक्षित बटालियन की स्थापना को मंजूरी दी है। इस बटालियन में 1,024 महिला कर्मी शामिल होंगी।

CISF नेतृत्व का मानना है कि यह निर्णय बल में महिला भागीदारी बढ़ाने और सुरक्षा व्यवस्था में उनकी भूमिका को और मजबूत करने में मदद करेगा।

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19-07-2026