अनु मलिक CISF मुख्यालय कार्यक्रम 07 जनवरी 2026 को आयोजित हुआ, जहाँ प्रसिद्ध संगीतकार अनु मलिक ने सीआईएसएफ के जवानों के साथ समय बिताया और उनसे विशेष संवाद किया। यह कार्यक्रम केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं बल्कि संगीत, प्रेरणा और वर्दीधारी पुरुष-महिलाओं के बीच भावनात्मक जुड़ाव का सशक्त उदाहरण बना।
अनु मलिक CISF मुख्यालय कार्यक्रम: संगीत और मनोबल का संगम
कार्यक्रम के दौरान सीआईएसएफ ब्रास बैंड द्वारा एक सुसंगठित और प्रभावशाली प्रस्तुति दी गई। लगभग 50 पुरुष एवं महिला कार्मिकों से युक्त इस बैंड ने ट्रंपेट, मेलोफोन, कॉर्नेट, ट्यूबा, सैक्सोफोन और ड्रम जैसे लगभग दस वाद्य यंत्रों के माध्यम से सदाबहार धुनों का सुंदर संगम प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण फिल्म बॉर्डर का अमर गीत “संदेसे आते हैं” रहा, जिसे अत्यंत सटीकता और भावनात्मक गहराई के साथ प्रस्तुत किया गया। इस प्रस्तुति ने स्वयं गीत के संगीतकार अनु मलिक से भी स्वतः तालियाँ और भावपूर्ण प्रशंसा प्राप्त की।

अपनी प्रतिक्रिया में श्री अनु मलिक ने इस अनुभव को अत्यंत भावुक और स्मृतियों से भरा बताया। उन्होंने कहा कि आज के समय में इस स्तर की लाइव बैंड प्रस्तुति दुर्लभ होती जा रही है और ऐसे कला रूपों में ही शुद्ध, आत्मीय और जीवंत संगीत की वास्तविक अनुभूति मिलती है।
उन्होंने बैंड सदस्यों द्वारा संगीत नोटेशन पढ़ते हुए पूर्ण तालमेल में प्रस्तुति देने, बैंड मास्टर के पेशेवर संचालन तथा दो भिन्न संगीत शैलियों को एक-दूसरे में सहजता से पिरोने की कला की विशेष सराहना की। उन्होंने 1970 के दशक के गीतों पर आधारित “यादें रीमिक्स” धुन को भी रचनात्मकता और उत्कृष्ट प्रस्तुति के लिए विशेष रूप से सराहा।
यह उल्लेखनीय है कि वर्ष 2023 में गठित सीआईएसएफ महिला बैंड ने अल्प समय में ही 26वीं अखिल भारतीय पुलिस बैंड प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक प्राप्त किया है। अनु मलिक ने महिला बैंड सदस्यों को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी और इसे अत्यंत प्रेरणादायक बताया।

इस अवसर पर महानिदेशक, सीआईएसएफ, श्री प्रवीर रंजन ने कहा कि महान संगीतकारों की रचनाएँ जवानों को आंतरिक ऊर्जा, साहस और देशसेवा की प्रेरणा देती हैं, विशेषकर जब वे दूरस्थ और चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में तैनात होते हैं।
कार्यक्रम के अंत में महानिदेशक द्वारा अनु मलिक को स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। वरिष्ठ अधिकारी और विभिन्न इकाइयों से आए जवान इस आयोजन के साक्षी बने और सभी ने इसे मन से सराहा।









