सीआईएसएफ साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण क्या है, जवानों को साइबर हमले से निपटने के लिए क्या सिखाया जाता है?

सीआईएसएफ साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण में जवानों को साइबर खतरे पहचानने, नेटवर्क और कंप्यूटर प्रणाली की सुरक्षा, डिजिटल फोरेंसिक तथा साइबर हमले के बाद त्वरित प्रतिक्रिया की जानकारी दी जाती है।
राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय में साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण पूरा करने वाले सीआईएसएफ जवान

साइबर हमला अब सिर्फ किसी व्यक्ति के मोबाइल या कंप्यूटर तक सीमित मामला नहीं है। किसी बड़े संस्थान की सूचना प्रणाली, नेटवर्क या तकनीकी व्यवस्था को निशाना बनाया जाए तो उसका असर कामकाज और सुरक्षा व्यवस्था तक पहुंच सकता है। ऐसे में सुरक्षा बलों के लिए साइबर सुरक्षा की समझ और साइबर हमले की स्थिति में तुरंत सही कार्रवाई करने की क्षमता महत्वपूर्ण हो जाती है।

इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के जवानों को साइबर सुरक्षा, डिजिटल फोरेंसिक और साइबर हमले के बाद त्वरित कार्रवाई से जुड़ा विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। हाल ही में दिल्ली स्थित राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय के परिसर में 40 सीआईएसएफ कर्मियों ने 12 सप्ताह का विशेष प्रशिक्षण पूरा किया है।

लेकिन सवाल यह है कि सीआईएसएफ साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण में आखिर क्या सिखाया जाता है और यह प्रशिक्षण इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

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सीआईएसएफ के लिए साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण क्यों जरूरी है?

केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल की जिम्मेदारियों में हवाईअड्डों सहित कई महत्वपूर्ण और संवेदनशील प्रतिष्ठानों की सुरक्षा शामिल है। ऐसे स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था में तकनीक और सूचना प्रणालियों का महत्व भी है।

इसलिए किसी साइबर खतरे की पहचान करना, उससे होने वाले नुकसान को समझना और हमले की स्थिति में तत्काल प्रतिक्रिया देना सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है।

साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण का उद्देश्य जवानों को सिर्फ साइबर खतरे के बारे में जानकारी देना नहीं है। उन्हें यह समझने की जरूरत होती है कि किसी संभावित हमले की स्थिति में क्या देखा जाए, किस तरह प्रतिक्रिया दी जाए और उपलब्ध डिजिटल जानकारी की जांच कैसे की जाए।

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साइबर हमले की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया क्या होती है?

साइबर हमला होने के बाद समय बहुत महत्वपूर्ण होता है। जितनी जल्दी घटना की पहचान होगी और सही कार्रवाई शुरू होगी, उतना ही नुकसान को सीमित करने में मदद मिल सकती है।

इसीलिए प्रशिक्षण में साइबर घटना पर त्वरित प्रतिक्रिया को विशेष महत्व दिया जाता है।

इसका मतलब है कि साइबर हमले की जानकारी मिलने के बाद स्थिति को समझना, जरूरी जानकारी जुटाना, प्रभावित व्यवस्था की पहचान करना और उपलब्ध तकनीकी जानकारी के आधार पर आगे की कार्रवाई करना।

सीआईएसएफ के प्रशिक्षण में इसी तरह की व्यावहारिक क्षमता विकसित करने पर जोर दिया गया है, ताकि जवान साइबर खतरों का सामना करते समय सीखी हुई जानकारी को अपने काम में इस्तेमाल कर सकें।

डिजिटल फोरेंसिक जांच क्यों महत्वपूर्ण है?

किसी साइबर घटना के बाद यह पता लगाना भी जरूरी होता है कि क्या हुआ, किस तरह की डिजिटल जानकारी प्रभावित हुई और घटना से जुड़े कौन से प्रमाण उपलब्ध हैं। यहीं डिजिटल फोरेंसिक जांच की भूमिका सामने आती है।

डिजिटल फोरेंसिक में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और डिजिटल जानकारी की वैज्ञानिक तरीके से जांच की जाती है। इसका उद्देश्य उपलब्ध डिजिटल प्रमाणों को समझना और घटना से जुड़ी जानकारी को व्यवस्थित तरीके से सामने लाना होता है।

सीआईएसएफ के विशेष प्रशिक्षण में डिजिटल फोरेंसिक को शामिल किया जाना इस बात को दर्शाता है कि साइबर सुरक्षा को सिर्फ हमले को रोकने तक सीमित नहीं रखा गया है। घटना के बाद उपलब्ध डिजिटल जानकारी को समझना भी प्रशिक्षण का हिस्सा है।

नेटवर्क और कंप्यूटर प्रणाली की सुरक्षा में क्या सिखाया जाता है?

साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा नेटवर्क और कंप्यूटर प्रणालियों की सुरक्षा है।

प्रशिक्षण में जवानों को उभरते साइबर खतरों, नेटवर्क सुरक्षा और प्रणाली की सुरक्षा से जुड़े विषयों की जानकारी दी गई। इसका उद्देश्य ऐसी तकनीकी समझ विकसित करना है जिससे साइबर खतरे को पहचानने और उसके सामने उचित प्रतिक्रिया देने की क्षमता बेहतर हो सके।

आम भाषा में समझें तो साइबर सुरक्षा का मतलब सिर्फ पासवर्ड सुरक्षित रखना नहीं है। किसी संस्था की डिजिटल व्यवस्था में मौजूद अलग-अलग प्रणालियों और उनके बीच होने वाले संपर्क को सुरक्षित रखना भी इसका हिस्सा है।

सीआईएसएफ के 40 जवानों को कहां दिया गया प्रशिक्षण?

दिल्ली के रोहिणी स्थित लोक नायक जयप्रकाश नारायण राष्ट्रीय अपराध विज्ञान एवं फोरेंसिक विज्ञान संस्थान, राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय के दिल्ली परिसर में यह 12 सप्ताह का विशेष प्रशिक्षण आयोजित किया गया।

प्रशिक्षण 13 जुलाई 2026 से 8 अक्टूबर 2026 तक चला। इसमें देश के अलग-अलग हवाईअड्डों पर तैनात विभिन्न हवाईअड्डा सुरक्षा समूहों के 40 सीआईएसएफ कर्मियों ने हिस्सा लिया।

प्रशिक्षण में साइबर खतरे, नेटवर्क सुरक्षा, कंप्यूटर प्रणाली की सुरक्षा, डिजिटल फोरेंसिक और साइबर घटना पर त्वरित प्रतिक्रिया जैसे विषय शामिल रहे।

प्रशिक्षण में संस्थानों के दौरे क्यों कराए गए?

साइबर सुरक्षा की समझ सिर्फ कक्षा तक सीमित नहीं रहती। प्रशिक्षण में शामिल जवानों को कई महत्वपूर्ण संस्थानों और विशेषज्ञ केंद्रों का व्यावहारिक अनुभव भी कराया गया।

इसके तहत सूचना संलयन एवं रणनीतिक संचालन, केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला, पावर ग्रिड, दिल्ली मेट्रो और भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण से जुड़े संस्थानों का दौरा कराया गया।

इन दौरों का उद्देश्य साइबर सुरक्षा, डिजिटल फोरेंसिक और साइबर घटना पर प्रतिक्रिया से जुड़े काम को वास्तविक परिस्थितियों के करीब जाकर समझने का अवसर देना था।

सीआईएसएफ साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण से क्या फायदा होगा?

साइबर खतरे लगातार नए रूप में सामने आ सकते हैं। इसलिए सुरक्षा बलों के लिए एक बार प्रशिक्षण लेना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। तकनीकी जानकारी को समय के साथ बेहतर करना और साइबर घटना के समय तुरंत प्रतिक्रिया देने की तैयारी बनाए रखना जरूरी है।

सीआईएसएफ के इस प्रशिक्षण में भी साइबर क्षमता को लगातार बेहतर करने और प्रशिक्षण से मिली जानकारी को रोजमर्रा के काम में इस्तेमाल करने पर जोर दिया गया।

यही इस तरह के प्रशिक्षण का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष है। साइबर सुरक्षा सिर्फ तकनीकी विशेषज्ञों का विषय नहीं रह गई है। संवेदनशील सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कर्मियों के लिए भी इसकी बुनियादी और व्यावहारिक समझ महत्वपूर्ण होती जा रही है।

सीआईएसएफ और राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय का प्रशिक्षण

सीआईएसएफ के 40 कर्मियों का यह 12 सप्ताह का प्रशिक्षण इस बात का उदाहरण है कि सुरक्षा से जुड़े कर्मियों को साइबर खतरे, डिजिटल जांच और साइबर घटना पर त्वरित कार्रवाई के लिए किस तरह तैयार किया जा सकता है।

इस प्रशिक्षण में विश्वविद्यालय के प्रशिक्षण उप निदेशक, सहायक और सहयोगी प्रोफेसरों तथा विषय विशेषज्ञों ने मार्गदर्शन दिया।

8 अक्टूबर 2026 को प्रशिक्षण पूरा होने के साथ एक चरण समाप्त हुआ, लेकिन साइबर सुरक्षा की तैयारी किसी एक प्रशिक्षण कार्यक्रम तक सीमित नहीं है। साइबर खतरे को समझना, डिजिटल प्रमाणों की जांच करना और साइबर घटना के समय सही प्रतिक्रिया देना अब सुरक्षा व्यवस्था की महत्वपूर्ण जरूरतों में शामिल है।

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08-10-2026