Cyber Fraud का नया मॉडल: AI कैसे बदल रहा है ऑनलाइन ठगी का तरीका

AI और डिजिटल तकनीक ने साइबर ठगी को नया रूप दे दिया है। जानिए Cyber-enabled Fraud क्या है, भारत में इसका असर कितना बड़ा है और 1930 जैसी व्यवस्था किस तरह मदद करती है।
AI Cyber Fraud और Online Scam का बदलता खतरा

एक फर्जी कॉल, नकली वेबसाइट या WhatsApp पर आया एक लिंक कभी-कभी पूरी जिंदगी की कमाई पर भारी पड़ सकता है। लेकिन साइबर ठगी का खतरा अब सिर्फ ऐसे पुराने तरीकों तक सीमित नहीं है।

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Artificial Intelligence यानी AI ने अपराधियों को नकली आवाज, फर्जी पहचान, बेहतर phishing messages और ज्यादा convincing social engineering तैयार करने के नए साधन दिए हैं। इसी वजह से Cyber-enabled Fraud अब दुनिया के बड़े cyber risks में गिना जा रहा है।

World Economic Forum की Global Cybersecurity Outlook 2026 के अनुसार, 73% respondents ने बताया कि 2025 में वे खुद या उनके network का कोई व्यक्ति cyber-enabled fraud से प्रभावित हुआ। 77% respondents ने cyber-enabled fraud और phishing में वृद्धि भी दर्ज की। 2026 में CEOs के लिए cyber-enabled fraud और phishing सबसे बड़ी cybersecurity concerns बन गईं।

यानी साइबर ठगी अब किसी एक scam की कहानी नहीं है। यह technology, social engineering और financial systems को जोड़कर चलने वाला बड़ा fraud ecosystem बनता जा रहा है।

Cyber-enabled Fraud क्या है?

Cyber-enabled fraud को आसान भाषा में समझें तो यह ऐसा धोखा है जिसमें technology का इस्तेमाल करके किसी व्यक्ति या संस्था को गलत जानकारी देकर पैसा, personal data, login credentials या दूसरी संवेदनशील जानकारी हासिल की जाती है।

इसमें phishing email, fake website, fraudulent phone call, identity theft, payment fraud, impersonation और social engineering जैसे तरीके शामिल हो सकते हैं।

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Cyber fraud और traditional fraud में सबसे बड़ा फर्क इसकी reach और speed है।

पहले किसी ठग को एक व्यक्ति को धोखा देने के लिए फोन या आमने-सामने संपर्क करना पड़ता था। अब एक ही तरह का scam हजारों या लाखों लोगों तक digital platforms के जरिए पहुंचाया जा सकता है।

यहीं से Cyber-enabled Fraud की असली ताकत सामने आती है।

दुनिया में Cybercrime की कीमत कितनी बड़ी है?

Cybersecurity Ventures के अनुसार 2025 में global cybercrime की अनुमानित आर्थिक लागत $10.5 trillion annually तक पहुंच गई। इसके 2031 तक बढ़कर $12.2 trillion annually होने का अनुमान है।

यहां एक जरूरी अंतर समझना चाहिए।

$10.5 trillion केवल cyber fraud का आंकड़ा नहीं है।

Cybersecurity Ventures की गणना में data theft, stolen money, fraud, productivity loss, intellectual property theft, business disruption, investigation, system restoration, legal costs और दूसरे cybercrime-related नुकसान शामिल हैं।

इसलिए Cyber-enabled Fraud को $10.5 trillion का अकेला कारण बताना सही नहीं होगा। यह आंकड़ा पूरे cybercrime economy की अनुमानित लागत को दिखाता है।

Cyber-enabled Fraud अब इतनी बड़ी चिंता क्यों है?

WEF की 2026 रिपोर्ट इस बदलाव को साफ तौर पर दिखाती है।

2025 में ransomware CEOs की सबसे बड़ी cyber concern थी। लेकिन 2026 में cyber-enabled fraud और phishing सबसे ऊपर पहुंच गए। AI vulnerabilities दूसरे स्थान पर रहीं। दूसरी तरफ CISOs के लिए ransomware अभी भी सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है।

इस अंतर से एक महत्वपूर्ण बात सामने आती है।

Cybersecurity का खतरा अब सिर्फ computer systems को hack करने तक सीमित नहीं है। लोगों को manipulate करके उनसे पैसा या information हासिल करना भी उतना ही बड़ा जोखिम बन चुका है।

AI ने Cyber Fraud का तरीका कैसे बदल दिया?

AI ने fraud की हर समस्या हल नहीं कर दी है, लेकिन इसने अपराधियों को कुछ काम ज्यादा तेजी से करने में मदद की है।

AI Voice और Deepfake

किसी परिचित व्यक्ति, अधिकारी या संस्था की आवाज जैसी आवाज तैयार करके फोन किया जा सकता है। इसी तरह fake images और videos का इस्तेमाल identity impersonation में किया जा सकता है।

Digital Arrest जैसे scams में पहले से ही पुलिस, CBI या दूसरी सरकारी agencies के नाम पर डर पैदा किया जाता रहा है। AI-generated voice या manipulated video ऐसे scams को ज्यादा convincing बना सकते हैं।

AI-powered Phishing

पुराने phishing emails में भाषा की गलतियां या अजीब formatting आसानी से दिखाई दे जाती थी।

AI की मदद से ज्यादा स्वाभाविक भाषा में messages तैयार किए जा सकते हैं। इससे किसी व्यक्ति या संस्था के नाम से भेजा गया fake communication पहले की तुलना में ज्यादा विश्वसनीय लग सकता है।

Social Engineering

Social engineering में technology से ज्यादा इंसानी psychology काम करती है।

ठग डर, लालच, urgency या authority का इस्तेमाल करता है। उदाहरण के लिए:

  • आपका bank account बंद होने वाला है
  • आपका SIM बंद किया जा रहा है
  • आपके नाम से criminal case है
  • investment का guaranteed return मिलेगा
  • KYC तुरंत पूरा करें
  • parcel या e-challan के नाम पर payment करें

AI इन messages को अलग-अलग लोगों के लिए ज्यादा targeted बनाने में मदद कर सकता है।

भारत में Cyber Fraud का खतरा कितना बड़ा है?

भारत में digital payments, online banking, mobile connectivity और government services के बढ़ते इस्तेमाल ने नागरिकों को बड़ी सुविधा दी है। लेकिन इसी के साथ financial fraud के लिए digital channels का इस्तेमाल भी बढ़ा है।

भारत सरकार के अनुसार NCRP और CFCFRMS पर 2021 से 2025 के बीच 65.89 लाख से ज्यादा financial fraud complaints दर्ज हुईं। इनमें reported amount ₹55,050 करोड़ से अधिक था। इसी अवधि में ₹8,189 करोड़ से ज्यादा रकम lien पर रखी गई और 1.95 लाख से ज्यादा FIR दर्ज हुईं।

यह आंकड़ा केवल यह नहीं बताता कि कितने लोगों ने शिकायत की। यह यह भी दिखाता है कि financial cyber fraud अब law enforcement और financial institutions दोनों के लिए बड़ा operational issue बन चुका है।

भारत में Cyber-enabled Fraud के प्रमुख तरीके

Digital Arrest Scam

इसमें अपराधी पुलिस, CBI, ED या किसी दूसरी सरकारी agency का अधिकारी बनकर व्यक्ति को डराता है।

वीडियो कॉल, fake documents, uniform और official language का इस्तेमाल किया जा सकता है।

मकसद आमतौर पर पीड़ित को इतना डराना होता है कि वह बिना verification के पैसे transfer कर दे या अपनी banking information साझा कर दे।

Phishing और Credential Theft

Fake banking websites, emails, SMS और messages के जरिए login details, OTP या दूसरे credentials हासिल करने की कोशिश की जाती है।

Investment Scam

WhatsApp, Telegram और social media पर investment groups बनाकर लोगों को तेजी से पैसा कमाने का लालच दिया जा सकता है।

कई मामलों में शुरुआत में छोटा withdrawal देकर भरोसा बनाया जाता है और बाद में बड़ी रकम जमा कराने के लिए दबाव बनाया जाता है।

Impersonation Fraud

Bank अधिकारी, police officer, सरकारी कर्मचारी, company representative या परिचित व्यक्ति बनकर संपर्क करना इसका सामान्य तरीका है।

AI voice और deepfake technologies इस तरह के impersonation को और convincing बना सकती हैं।

Fake Websites और Links

सरकारी service, bank, courier, electricity bill, traffic challan या KYC के नाम पर नकली website या link भेजा जा सकता है।

एक बार व्यक्ति उस website पर sensitive information डाल देता है तो उसका इस्तेमाल आगे fraud में किया जा सकता है।

Fraud अब एक ecosystem क्यों बन रहा है?

आज एक cyber fraud में कई अलग-अलग हिस्से काम कर सकते हैं।

एक व्यक्ति data हासिल करता है। दूसरा fake identity तैयार करता है। कोई तीसरा victim से संपर्क करता है। पैसा किसी दूसरे account में जाता है और फिर उसे आगे transfer किया जा सकता है।

इस तरह fraud एक व्यक्ति के manual प्रयास से निकलकर organised operation का रूप ले सकता है।

यही वजह है कि cyber fraud से निपटने के लिए सिर्फ antivirus या firewall पर्याप्त नहीं हैं।

Financial institutions, telecom companies, digital platforms और law enforcement agencies के बीच information sharing भी जरूरी है।

WEF ने भी fraud ecosystems से निपटने में sectors और governments के बीच बेहतर coordination की जरूरत पर जोर दिया है।

भारत में 1930 और NCRP क्यों महत्वपूर्ण हैं?

Cyber financial fraud में समय बहुत महत्वपूर्ण होता है।

भारत में financial cyber fraud की तत्काल reporting के लिए 1930 helpline और National Cyber Crime Reporting Portal की व्यवस्था है।

भारत सरकार के अनुसार 30 जून 2026 तक CFCFRMS के जरिए 32.80 लाख से ज्यादा complaints में ₹11,158 करोड़ से अधिक की financial amount बचाई गई

इसका मतलब यह नहीं है कि हर मामले में पूरी रकम वापस मिल जाएगी। लेकिन जल्दी reporting से transaction को रोकने या रकम को आगे जाने से रोकने की संभावना बढ़ सकती है।

इसलिए अगर financial cyber fraud हो जाए तो:

  1. तुरंत 1930 पर संपर्क करें।
  2. National Cyber Crime Reporting Portal पर complaint दर्ज करें।
  3. अपने bank या संबंधित financial institution को तुरंत inform करें।
  4. Transaction details, screenshots, phone numbers, URLs और messages सुरक्षित रखें।
  5. किसी आरोपी को और पैसा भेजकर मामला “settle” करने की कोशिश न करें।

भारत सरकार के अनुसार NCRP पर दर्ज cybercrime complaints की आगे की जांच और FIR जैसी कार्रवाई संबंधित State और UT law enforcement agencies करती हैं।

Cyber Fraud से बचने के लिए क्या करें?

Cyber fraud से बचने का सबसे आसान नियम है:

जल्दी में कोई financial decision न लें।

अगर कोई व्यक्ति phone या video call पर डराता है तो पहले उसकी पहचान independently verify करें।

अगर कोई link भेजता है तो link पर क्लिक करने के बजाय संबंधित संस्था की official website या app खुद खोलें।

OTP, PIN, password और banking credentials किसी के साथ share न करें।

Unknown applications install करने से बचें। खासकर तब जब कोई व्यक्ति phone call पर APK या दूसरी file install करने के लिए कह रहा हो।

Investment के मामले में सिर्फ WhatsApp या Telegram group देखकर पैसा न लगाएं।

और सबसे जरूरी बात, सरकारी agency का नाम सुनकर घबराएं नहीं।

किसी अधिकारी के नाम, uniform, video call या official-looking document को अपने आप में proof न मानें।

कंपनियों के लिए खतरा क्या है?

Cyber-enabled fraud का असर सिर्फ individual users तक सीमित नहीं है।

Businesses में phishing के जरिए employee credentials चोरी किए जा सकते हैं। Fake invoices, impersonation और business email compromise के जरिए financial transfers करवाए जा सकते हैं।

इसलिए organisations को सिर्फ malware detection पर निर्भर रहने के बजाय:

  • employee awareness
  • identity verification
  • multi-factor authentication
  • transaction monitoring
  • incident response
  • fraud intelligence
  • forensic readiness
  • third-party risk management

पर भी ध्यान देना चाहिए।

AI के दौर में defence systems में AI का इस्तेमाल detection और response को बेहतर करने में मदद कर सकता है। लेकिन वही technology attackers के हाथ में भी जा सकती है।

यही कारण है कि AI को cybersecurity में एकतरफा समाधान मानना सही नहीं होगा।

क्या AI Cyber Fraud को खत्म कर सकता है?

नहीं।

AI fraud को रोकने में मदद कर सकता है, लेकिन अकेला AI इसका समाधान नहीं है।

एक तरफ AI suspicious transactions, phishing patterns और unusual behaviour पहचानने में मदद कर सकता है। दूसरी तरफ अपराधी भी AI का इस्तेमाल ज्यादा convincing scams तैयार करने में कर सकते हैं।

इसलिए आने वाले समय में cybersecurity का फोकस सिर्फ technology पर नहीं रहेगा।

Cyber Fraud का भविष्य कैसा होगा?

Cyber-enabled fraud का सबसे बड़ा बदलाव शायद यह होगा कि scam और वास्तविक communication में फर्क करना और कठिन हो सकता है।

आज भी किसी व्यक्ति को fake bank call और genuine bank call में फर्क करने में परेशानी होती है। आने वाले समय में AI-generated voice, video और personalised messages इस समस्या को और बढ़ा सकते हैं।

लेकिन इसका दूसरा पहलू भी है।

AI fraud detection, identity verification और suspicious activity monitoring को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।

यानी आने वाले समय में AI अपराधियों का हथियार भी होगा और defence का tool भी।

निष्कर्ष

Cyber-enabled Fraud को सिर्फ एक नया नाम देकर पुराने online scams की सूची बनाना पर्याप्त नहीं है।

असल बदलाव यह है कि technology ने धोखे की reach, speed और scale को बढ़ा दिया है। AI ने phishing, impersonation और social engineering जैसे तरीकों को ज्यादा convincing बनाने की क्षमता पैदा की है।

WEF की Global Cybersecurity Outlook 2026 में 73% respondents का cyber-enabled fraud से प्रभावित होने की बात कहना इस खतरे की व्यापकता दिखाता है। वहीं भारत में NCRP और CFCFRMS के आंकड़े बताते हैं कि financial cyber fraud पहले ही बड़े स्तर की समस्या बन चुका है।

इसलिए Cyber Fraud से मुकाबला सिर्फ technology से नहीं होगा।

समय पर reporting, बेहतर verification, financial controls, public awareness और agencies के बीच information sharing उतने ही जरूरी हैं।

आज के cyber fraud में सबसे बड़ा target हमेशा computer नहीं होता। कई बार target इंसान का भरोसा होता है।

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inspector raman kumar
इंस्पेक्टर रमण कुमार सिंह,दिल्ली पुलिस में बतौर इंस्पेक्टर तैनात है । वे दिल्ली के कई पुलिस थानों के साथ साथ साइबर पुलिस स्टेशन के थानाध्यक्ष रहे है । वे साइबर जागरूकता के लिए साइबर सेफ व्हाट्सएप्प ग्रुप और बी द पुलिस नाम से फेसबुक पेज और फेसबुक ग्रुप के संचालक है ।

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