आपकी भाषा में आपको मिले ऑफर तो हो जाएं सावधान ! जानिए कि ऑनलाइन लोन फ्रॉड से कैसे बचें?

फर्जी लोन कॉल और Loan App Scam में ठग आसान लोन, कम ब्याज और तत्काल मंजूरी का झांसा देकर Processing Fee और दूसरे शुल्क के नाम पर पैसे मांगते हैं। जानिए ऑनलाइन लोन फ्रॉड की पहचान कैसे करें और 1930 पर शिकायत कैसे दर्ज करें।
ऑनलाइन लोन फ्रॉड से सावधान फर्जी लोन कॉल और साइबर ठगी

क्या आपको भी फोन पर आपकी भाषा में कोई लोन का ऑफर आता है ? फोन पर अचानक आसान लोन का ऑफर मिले, सामने वाला आपकी भाषा में बात करे और कुछ ही मिनट में लाखों रुपये का लोन मंजूर कराने का दावा करे, तो इसे तुरंत असली मान लेना भारी पड़ सकता है।

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साइबर ठग अब सिर्फ आकर्षक ब्याज दर या तुरंत लोन का लालच नहीं देते, बल्कि भरोसा पैदा करने के लिए क्षेत्रीय भाषा में बातचीत, फर्जी वित्तीय संस्थान के प्रतिनिधि के तौर पर पहचान और बाद में कानूनी कार्रवाई की धमकी जैसे तरीके भी इस्तेमाल कर रहे हैं। हाल ही में दिल्ली में तेलंगाना साइबर सुरक्षा ब्यूरो की कार्रवाई में सामने आया धोखाधड़ी कॉल सेंटर इसी तरीके के संगठित लोन फ्रॉड की ओर इशारा करता है।

इस मामले में सामने आई जानकारी के मुताबिक, कॉल सेंटर से जुड़े लोग खुद को बजाज फाइनेंस का प्रतिनिधि बताकर लोगों को आकर्षक शर्तों पर लोन देने का झांसा देते थे। शुरुआत में लोन मंजूर होने की बात कही जाती और इसके बाद प्रोसेसिंग फीस, वेरिफिकेशन फीस, दस्तावेज शुल्क और बीमा प्रीमियम जैसे अलग-अलग नामों पर पैसे मांगे जाते थे। शुरुआती भुगतान के बाद संपर्क बंद कर देना या किसी नए शुल्क के नाम पर दोबारा पैसे मांगना इस धोखाधड़ी के तरीके का हिस्सा था।

यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें क्षेत्रीय भाषा का इस्तेमाल भरोसा पैदा करने के लिए किया गया। लेकिन किसी कॉलर का हिंदी, तेलुगु या कोई दूसरी भारतीय भाषा में सहजता से बात करना उसकी पहचान का प्रमाण नहीं है। साइबर ठग जानते हैं कि अपनी भाषा में बात करने वाला व्यक्ति अधिक भरोसेमंद लग सकता है। इसलिए लोन का ऑफर मिलने पर भाषा, आवाज या बातचीत के आत्मविश्वास के बजाय संस्था और ऑफर की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना जरूरी है।

दिल्ली के फर्जी कॉल सेंटर में कैसे चल रहा था लोन फ्रॉड?

तेलंगाना साइबर सुरक्षा ब्यूरो की कार्रवाई से सामने आई जानकारी के अनुसार, इस नेटवर्क में 25 से 40 वर्ष की उम्र की ज्यादातर तेलुगु भाषी महिलाओं को टेली-कॉलर के रूप में भर्ती किया गया था। इनकी भर्ती कोरुतला, जगतियाल, सईदाबाद, बोराबंदा और महबूबनगर जैसे इलाकों से की गई थी। कॉल सेंटर दिल्ली में संचालित किया जा रहा था और इसके पीछे तीन मुख्य मास्टरमाइंड बताए गए हैं, जो कार्रवाई के समय फरार थे।

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जांच में सामने आया कि यह नेटवर्क करीब डेढ़ साल से सक्रिय था और अलग-अलग टीमों के जरिए काम कर रहा था। टेली-कॉलर संभावित ग्राहकों से संपर्क करते, खुद को बजाज फाइनेंस का प्रतिनिधि बताते और आकर्षक शर्तों के साथ लोन मंजूर कराने की बात करते थे। ग्राहक के भरोसे में आने के बाद लोन की प्रक्रिया पूरी करने के नाम पर अलग-अलग शुल्क मांगे जाते थे।

लोन प्रोसेसिंग शुल्क के बाद वेरिफिकेशन शुल्क, दस्तावेज शुल्क और बीमा प्रीमियम जैसी मांगें सामने आती थीं। अगर पीड़ित सवाल करता या पैसे देने से इनकार करता तो बातचीत का तरीका बदल जाता था। नकली मुकदमे में फंसाने, प्रतिष्ठा खराब करने या व्यक्तिगत दस्तावेजों का इस्तेमाल कर ब्लैकमेल करने जैसी धमकियों के जरिए पीड़ित पर दबाव बनाया जाता था।

तेलंगाना साइबर सुरक्षा ब्यूरो के अनुसार इस नेटवर्क का संबंध तेलंगाना में 22 साइबर अपराध मामलों से पाया गया है। यह पहलू बताता है कि फर्जी लोन कॉल अब अलग-अलग लोगों को ठगने वाली छोटी घटनाओं तक सीमित नहीं हैं। इनके पीछे संगठित कॉलिंग, भर्ती और भुगतान वसूली का पूरा नेटवर्क हो सकता है।

फर्जी लोन कॉल कैसे काम करती है?

ऑनलाइन लोन फ्रॉड में ठग अक्सर बातचीत की शुरुआत बहुत आसान प्रस्ताव से करते हैं। कॉलर कह सकता है कि आपका लोन पहले ही अप्रूव हो चुका है, ब्याज बहुत कम है या बिना किसी परेशानी के रकम आपके खाते में भेज दी जाएगी। कई मामलों में ग्राहक ने लोन के लिए आवेदन भी नहीं किया होता, फिर भी उसे फोन करके तत्काल लोन का ऑफर दिया जाता है।

भरोसा बनने के बाद रकम जारी करने से पहले किसी शुल्क की मांग की जाती है। इसे Processing Fee, Verification Fee, File Charge, Insurance, GST या किसी अन्य नाम से बताया जा सकता है। RBI ने भी फर्जी लोन ऑफर के मामलों में ऐसे upfront charges को लेकर लोगों को सतर्क किया है और कम ब्याज या आसान शर्तों वाले ऑनलाइन लोन ऑफर पर भुगतान या सुरक्षित वित्तीय जानकारी साझा करने से पहले वास्तविक स्रोत से सत्यापन की सलाह दी है।

यहीं से धोखाधड़ी का अगला चरण शुरू होता है। एक बार पीड़ित पैसा भेज देता है तो कॉलर कोई नया शुल्क बता सकता है। अगर ग्राहक भुगतान रोक देता है तो कभी-कभी उसे डराने या दबाव बनाने की कोशिश की जाती है। कई मामलों में इसके बाद नंबर बंद हो जाता है और कथित लोन कभी मिलता ही नहीं।

फर्जी लोन ऑफर की पहचान कैसे करें?

अगर किसी अनजान नंबर से फोन करके तुरंत लोन देने का दावा किया जा रहा है, तो सबसे पहले यह देखें कि आपने वास्तव में उस संस्था के पास लोन के लिए आवेदन किया था या नहीं। बिना आवेदन के अचानक मिला लोन ऑफर अपने आप में सत्यापन की वजह है। बहुत कम ब्याज, बिना दस्तावेज लोन या कुछ मिनट में बड़ी रकम मंजूर करने जैसे दावे भी आपको जल्दबाजी में फैसला लेने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

सबसे बड़ा संकेत तब मिलता है जब लोन देने से पहले किसी निजी खाते, व्यक्तिगत UPI ID या संदिग्ध माध्यम से रकम भेजने को कहा जाए। RBI की वित्तीय जागरूकता सामग्री में भी फर्जी लोन ऑफर के मामलों में Processing Fee, GST, advance EMI और अन्य शुल्क के नाम पर रकम वसूलने की घटनाओं का उल्लेख है।

कॉलर अगर OTP, UPI PIN, CVV, इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड या अन्य संवेदनशील बैंकिंग जानकारी मांगता है तो भुगतान या जानकारी साझा करने के बजाय बातचीत रोक देना चाहिए। इसी तरह WhatsApp या SMS से भेजे गए किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करके लोन आवेदन करना भी जोखिम बढ़ा सकता है।

Loan App Scam से कैसे बचें?

हर डिजिटल लोन ऐप फर्जी नहीं होता। RBI के अनुसार डिजिटल लेंडिंग ऐप बैंक और NBFC जैसे regulated entities या उनके अधिकृत Lending Service Providers से जुड़े हो सकते हैं। इसलिए किसी ऐप को इस्तेमाल करने से पहले यह देखना जरूरी है कि उसका संबंध किस RBI-regulated bank या NBFC से है। RBI लोगों को बैंक या NBFC की वेबसाइट के माध्यम से इस संबंध की पुष्टि करने और SMS या सोशल मीडिया लिंक से मिले संदिग्ध ऐप डाउनलोड करने से बचने की सलाह देता है।

RBI ने डिजिटल लेंडिंग ऐप्स के संबंध में सार्वजनिक repository बनाने की व्यवस्था भी शुरू की है, ताकि ग्राहक यह सत्यापित कर सकें कि कोई ऐप किसी regulated entity से जुड़ा होने का दावा सही है या नहीं। इसलिए Google Search में दिखने वाले विज्ञापन, WhatsApp संदेश या किसी कॉलर के दावे को अंतिम प्रमाण मानने के बजाय संबंधित बैंक या NBFC के आधिकारिक चैनल से जानकारी जांचना ज्यादा सुरक्षित है।

लोन लेने से पहले किन बातों की जांच करें?

किसी भी लोन ऑफर को स्वीकार करने से पहले lender का वास्तविक नाम, वेबसाइट, संपर्क विवरण, ब्याज दर, कुल लागत, शुल्क और शिकायत निवारण व्यवस्था की पुष्टि करें। डिजिटल लोन के मामले में RBI की व्यवस्था के तहत borrower को Key Fact Statement जैसी महत्वपूर्ण जानकारी दी जानी चाहिए, जिसमें Annual Percentage Rate और दूसरे जरूरी विवरण शामिल होते हैं।

लोन की लागत और शुल्क पहले से स्पष्ट होना भी महत्वपूर्ण है। RBI के नियमों में regulated lenders के लिए शुल्क और loan cost की जानकारी पारदर्शी रखने पर जोर दिया गया है। इसलिए अगर कोई व्यक्ति फोन पर बार-बार नए शुल्क बताकर तत्काल भुगतान का दबाव बना रहा है तो इसे सामान्य loan processing मानकर आगे बढ़ना उचित नहीं है।

क्षेत्रीय भाषा में बात करने वाला कॉलर असली क्यों नहीं माना जा सकता?

साइबर ठगी में भरोसा बनाना पहला लक्ष्य होता है। जब कॉलर ग्राहक की मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा में बातचीत करता है तो बातचीत अधिक व्यक्तिगत और विश्वसनीय लग सकती है। दिल्ली के इस मामले में तेलुगु भाषी टेली-कॉलर्स की भर्ती और तेलुगु भाषी संभावित पीड़ितों से बातचीत इसी रणनीति का हिस्सा बताई गई है।

लेकिन भाषा पहचान का विकल्प नहीं है। किसी कंपनी के वास्तविक प्रतिनिधि होने की पुष्टि कंपनी के आधिकारिक फोन नंबर, वेबसाइट या ग्राहक सेवा चैनल से की जानी चाहिए। अगर कोई कॉलर कहता है कि वह किसी बैंक या NBFC से बोल रहा है तो उसी कॉलर के दिए नंबर पर वापस फोन करने के बजाय संस्था के आधिकारिक स्रोत से संपर्क करना ज्यादा सुरक्षित है।

लोन के नाम पर धमकी मिले तो क्या करें?

फर्जी लोन फ्रॉड में पैसा मांगने के साथ मानसिक दबाव भी बनाया जा सकता है। मुकदमे की धमकी, पुलिस कार्रवाई का डर, दस्तावेजों के गलत इस्तेमाल की बात या परिवार और परिचितों को जानकारी भेजने की धमकी इसी दबाव का हिस्सा हो सकती है। ऐसी स्थिति में डरकर दोबारा पैसा भेजना समस्या को और बढ़ा सकता है।

कॉलर की धमकी को सत्य मानकर भुगतान करने के बजाय बातचीत और भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड सुरक्षित रखें। फोन नंबर, WhatsApp चैट, SMS, ईमेल, वेबसाइट लिंक, UPI ID, बैंक खाते और लेनदेन की जानकारी आगे की शिकायत में उपयोगी हो सकती है। अगर कोई वित्तीय नुकसान हो चुका है तो शिकायत में देरी न करना खास तौर पर महत्वपूर्ण है।

ऑनलाइन लोन फ्रॉड हो जाए तो 1930 पर करें शिकायत

अगर फर्जी लोन कॉल के जरिए आपके खाते से पैसा निकल गया है तो तुरंत 1930 राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन पर रिपोर्ट करें। National Cyber Crime Reporting Portal के अनुसार 1930 ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी की रिपोर्टिंग के लिए उपलब्ध है और पोर्टल पर भी Financial Fraud की शिकायत दर्ज की जा सकती है।

शिकायत करते समय लेनदेन की तारीख, रकम, बैंक या वॉलेट की जानकारी, UPI ID, Transaction ID और उपलब्ध स्क्रीनशॉट जैसे विवरण तैयार रखना उपयोगी है। National Cyber Crime Reporting Portal पर Financial Fraud के लिए ऑनलाइन शिकायत की सुविधा उपलब्ध है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि साइबर फ्रॉड होने के बाद शिकायत करने में समय बर्बाद न करें। जल्दी रिपोर्ट करने से संबंधित वित्तीय संस्थाओं और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को लेनदेन पर आवश्यक कार्रवाई करने का अवसर मिल सकता है।

फर्जी लोन फ्रॉड से बचने का आसान नियम

लोन का ऑफर फोन पर मिला है तो उसे तुरंत स्वीकार न करें। पहले यह पता करें कि कॉल करने वाला वास्तव में किस संस्था से जुड़ा है। फिर उस संस्था की आधिकारिक वेबसाइट या ग्राहक सेवा के जरिए ऑफर की पुष्टि करें। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर Processing Fee, Verification Fee, Insurance या किसी अन्य नाम से पैसा भेजने से पहले पूरी जानकारी जांचें।

याद रखें, भरोसेमंद आवाज, आपकी अपनी भाषा में बातचीत, कंपनी का नाम और आकर्षक ब्याज दर अपने आप में लोन ऑफर को असली साबित नहीं करते। साइबर ठगी में सबसे बड़ा हथियार अक्सर तकनीक नहीं, बल्कि भरोसा और जल्दबाजी होती है। इसलिए फोन पर मिला लोन ऑफर जितना आसान और आकर्षक लगे, भुगतान करने से पहले उसकी स्वतंत्र पुष्टि उतनी ही जरूरी है।

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inspector raman kumar
इंस्पेक्टर रमण कुमार सिंह,दिल्ली पुलिस में बतौर इंस्पेक्टर तैनात है । वे दिल्ली के कई पुलिस थानों के साथ साथ साइबर पुलिस स्टेशन के थानाध्यक्ष रहे है । वे साइबर जागरूकता के लिए साइबर सेफ व्हाट्सएप्प ग्रुप और बी द पुलिस नाम से फेसबुक पेज और फेसबुक ग्रुप के संचालक है ।

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12-08-2026