दिल्ली पुलिस ने एक सप्ताह के अंदर बब्बर खालसा के एक और आतंकी को गिरफ्तार करने में सफलता पाई है। आकाशदीप उर्फ बाज के बाद पुलिस ने उसके सहयोगी करनवीर उर्फ करण को दबोचा है। वह आकाशदीप के साथ थाना किला लाल सिंह पर ग्रेनेड हमले में भी शामिल था। पुलिस के मुताबिक ये लोग दिल्ली पर हमले की योजना भी बना रहे थे।
दिल्ली पुलिस ने ऐसे दबोचा
दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल के डीसीपी अमित कौशिक के मुताबिक एसीपी ह्रदय भूषण और राहुल विक्रम की निगरानी में इंस्पेक्टर सतीश राणा और अशोक के नेतृत्व में पुलिस की खास टीम ने करनवीर को पंजाब के गुरदास पुर से गिरफ्तार किया। स्पेशल सेल उसकी तलाश हथियार सप्लाई के एक मामले में भी कर रही थी।
पुलिस के मुताबिक करनवीर और उसका भाई पहले पकड़े गए आतंकी आकाशदीप के साथ 7 अप्रैल को थाना किला लास सिंह पर ग्रेनड हमला करने में शामिल थे। हमले के बाद, प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन “बब्बर खालसा इंटरनेशनल” (BKI) से जुड़े हैप्पी पासिया, मन्नू अगवान और गोपी नवांशहरिया द्वारा सोशल मीडिया पर एक पोस्ट प्रसारित की गई थी, जिसमें हमले का दावा किया गया था और दिल्ली को भी धमकी दी गई थी।
डीसीपी अमित कौशिक के मुताबिक यह लोग दिल्ली के लिए हथियारों की खेप लेकर आने वाले थे। आकाशदीप उर्फ़ बाज़ को पुलिस रिमांड पर लिया गया था। उससे पूछताछ और मानव स्रोतों व तकनीकी विश्लेषण से प्राप्त जानकारी के आधार पर,करणबीर उर्फ़ करण को 26 जुलाई 2025 को गुरदासपुर, पंजाब से थाना स्पेशल सेल के आर्म्स एक्ट के मामले में गिरफ्तार किया गया। पूछताछ के दौरान, उसने ग्रेनेड हमले के मामले में अपनी संलिप्तता का भी खुलासा किया, जिसकी वर्तमान में एनआईए द्वारा जाँच की जा रही है।
आरोपी करणबीर उर्फ़ करण 22 वर्ष का है और 12वीं पास है। पूछताछ के दौरान, उसने खुलासा किया कि वह पंजाब के एक व्यक्ति के संपर्क में था, जो विदेश में रहता था और प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन, बब्बर खालसा इंटरनेशनल के लिए ऑपरेशन संभालता था।
वह सोशल मीडिया एप्लिकेशन के माध्यम से इस हैंडलर के संपर्क में था और आपराधिक/आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने के निर्देश प्राप्त कर रहा था। उसने वर्ष 2024 में एक पश्चिम एशियाई देश का भी दौरा किया था। उसने उक्त ग्रेनेड हमले को अंजाम देने के लिए अपने हैंडलर से पैसे लिए थे। उसने हमले से पहले अपने घर पर दो लोगों को ठहरने की सुविधा भी दी थी, जिन्होंने पुलिस स्टेशन किला लाल सिंह पर ग्रेनेड फेंकने का काम किया था। हमले में शामिल उसका भाई गुरसेवक पहले ही इस मामले में गिरफ्तार हो चुका है।
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