77वां गणतंत्र दिवस: ग्रेट रन ऑफ कच्छ में फहरा दुनिया का सबसे विशाल खादी तिरंगा

77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर गुजरात के धोरडो स्थित ग्रेट रन ऑफ कच्छ में खादी से निर्मित दुनिया का सबसे विशाल राष्ट्रीय तिरंगा पूरे सैन्य सम्मान के साथ प्रदर्शित किया गया, जिसने राष्ट्रभक्ति, स्वदेशी भावना और सांस्कृतिक विरासत का अद्वितीय संदेश दिया।
ग्रेट रन ऑफ कच्छ में प्रदर्शित दुनिया का सबसे विशाल खादी राष्ट्रीय तिरंगा

77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर गुजरात के सीमावर्ती भुज जिले के धोरडो क्षेत्र में स्थित ग्रेट रन ऑफ कच्छ में राष्ट्रभक्ति और स्वदेशी चेतना का एक ऐतिहासिक दृश्य सामने आया। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, खादी से निर्मित दुनिया का सबसे विशाल स्मारकीय राष्ट्रीय ध्वज पूरे सम्मान और गौरव के साथ प्रदर्शित किया गया। यह आयोजन खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (KVIC), सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा किया गया।

नमक के सफेद रेगिस्तान में तिरंगे का भव्य प्रदर्शन

‘सफेद नमक के रेगिस्तान’ के विस्तार में जब विशाल खादी तिरंगा लहराया, तो यह दृश्य केवल एक आयोजन नहीं बल्कि भारतीय एकता, स्वदेशी शक्ति और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बन गया। उपस्थित जनसमूह ने देश की अखंडता और गौरवशाली परंपराओं को सजीव रूप में अनुभव किया।

वीडियो देखेंः

देशभर के खादी कारीगरों ने वीडियो संदेशों के माध्यम से इस ऐतिहासिक तिरंगे को सैल्यूट कर नया कीर्तिमान स्थापित किया ।

भारतीय सेना और BSF का पूर्ण सैन्य सम्मान

इस अवसर पर भारतीय सेना और सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवानों ने दुनिया के सबसे विशाल खादी तिरंगे को पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ स्थापित किया और गणतंत्र दिवस पर सलामी दी। यह क्षण राष्ट्रसेवा और बलिदान की भावना से ओत-प्रोत रहा।

शहीद परिवार को सम्मान, भावुक क्षण

कार्यक्रम के दौरान भावुक वातावरण तब बना, जब KVIC अध्यक्ष ने भारतीय सेना के वीर शहीद सार्जेंट मुरलीधर की पत्नी श्रीमती राजकुमारी को मंच से सम्मानित कर उनके त्याग और बलिदान को नमन किया।

कार्यक्रम में उपस्थित विशिष्ट जन

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि KVIC अध्यक्ष श्री मनोज कुमार रहे। समारोह में भारतीय सेना व BSF के वरिष्ठ अधिकारी, गुजरात सरकार के प्रतिनिधि, KVIC के अधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि और खादी कारीगर बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
ग्रामोद्योग विकास योजना के अंतर्गत गुजरात के कारीगरों को उपकरण और टूलकिट भी वितरित किए गए।

2001 भुज भूकंप की 25वीं स्मृति

26 जनवरी 2026 का दिन भुज भूकंप (2001) की 25वीं वर्षगांठ का भी साक्षी बना। कार्यक्रम में भूकंप से प्रभावित नागरिकों को स्मरण करते हुए कच्छ की अदम्य जिजीविषा, पुनर्निर्माण क्षमता और विकास यात्रा को रेखांकित किया गया।

KVIC अध्यक्ष मनोज कुमार का संबोधन

KVIC अध्यक्ष श्री मनोज कुमार ने कहा कि ग्रेट रन ऑफ कच्छ में दुनिया के सबसे विशाल खादी तिरंगे का प्रदर्शन राष्ट्र के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण क्षण है। यह आयोजन ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के वीर जवानों को समर्पित है।
उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे खादी भवनों से राष्ट्रीय ध्वज खरीदकर अपने घरों पर फहराएं, जिससे स्वदेशी आंदोलन को बल मिले।

उन्होंने यह भी कहा कि आज का नया और सुरक्षित भुज, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और योजनाबद्ध विकास का परिणाम है।

खादी क्षेत्र की प्रगति और रोजगार

KVIC अध्यक्ष ने बताया कि बीते वर्षों में खादी एवं ग्रामोद्योग क्षेत्र ने उल्लेखनीय प्रगति की है।

  • कारोबार: ₹1.70 लाख करोड़ से अधिक
  • रोजगार: 2 करोड़ से अधिक लोग
  • कारीगर पारिश्रमिक: ₹4 प्रति हैंक से बढ़कर ₹15 प्रति हैंक

यह बदलाव कारीगरों के सम्मान, आय और जीवन स्तर में सकारात्मक परिवर्तन को दर्शाता है।

दुनिया के सबसे विशाल खादी तिरंगा की विशेषताएं

  • लंबाई: 225 फीट
  • चौड़ाई: 150 फीट
  • वजन: लगभग 1400 किलोग्राम
  • क्षेत्रफल: 33,750 वर्ग फुट
  • अशोक चक्र व्यास: 30 फीट
  • उपयोग की गई खादी: 4500 मीटर
  • कारीगर: 70
  • निर्माण अवधि: 49 दिन
  • श्रम समय: 3500 घंटे से अधिक

यह तिरंगा ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के लिए तैयार किया गया था और पहले भी विभिन्न राष्ट्रीय आयोजनों में प्रदर्शित हो चुका है।

Frequently Asked Questions (FAQ)

दुनिया का सबसे विशाल खादी तिरंगा कहां प्रदर्शित किया गया?

गुजरात के भुज जिले के धोरडो क्षेत्र में स्थित ग्रेट रन ऑफ कच्छ में।

इस खादी तिरंगे का निर्माण किसने कराया?

खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (KVIC), MSME मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा।

तिरंगे का कुल आकार कितना है?

यह 225 फीट लंबा और 150 फीट चौड़ा है, जो 33,750 वर्ग फुट क्षेत्र को कवर करता है।

इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य क्या था?

राष्ट्रभक्ति, स्वदेशी भावना और खादी की सांस्कृतिक विरासत को प्रोत्साहित करना।

क्या यह आयोजन 2001 भुज भूकंप से भी जुड़ा था?

हां, 26 जनवरी 2026 को भुज भूकंप की 25वीं वर्षगांठ भी थी, जिसे कार्यक्रम में स्मरण किया गया।

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