चुनाव 2019- आयोग के साथ गृह मंत्रालय ने इस तरह निभाई भूमिका

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नई दिल्ली, इंडिया विस्तार। हिंसा, नक्सल और आतंकी धमकियों के बीच भी चुनाव आखिरकार तकरीबन शांति से निपट गया। एक्जीट पोल ने सरकार भी बनवा दी। लेकिन 90 करोड़ मतदाताओं को पोलिंग सेंटर पर निर्भय होकर जाने के लिए सबसे बड़ी और जरूरी चीज के इंतजाम की चर्चा होना अभी बाकी है। जी हां आपके एक वोट के लिए चुनाव आयोग के विभिन्न इंतजामों के साथ सबसे बड़ा इंतजाम सुरक्षा का होता है। इसे गृहमंत्रालय के आला अफसर चुनाव आयोग के साथ मिलकर संपन्न करवाते हैं।

कभी आकाश से कभी समूद्र से तो कभी ट्रेन से हर फेज में सुरक्षा के लिए लगातार तैनात रहे सुरक्षा कर्मी

इसलिए जरूरी है सुरक्षा

जम्मू काशमीर, छतीसगढ़ या हो बंगाल से लेकर कोई औऱ राज्य चुनाव के दौरान पोलिंग सेटर पर सुरक्षा के ये जवान आपको हर जगह दिखे होंगे। खास व्यक्ति की सुरक्षा में और हर हाल में वोटरों को पोलिंग सेंटर तक पहुंचाने में भी ये बढ़ चढकर हिस्सा लेते हैं। पूरे चुनाव में इस बार करीब 20 लाख जवान तैनात किए गए। तभी तो बंगाल में बवाल हो, छतीसगढ़ में नक्सलियों की और काशमीर में आतंकियों की धमकिय़ों के बाद भी वोटरों का उत्साह कम नहीं हुआ है। 90 करोड़ वोटरों में से 54 करोड़ वोटर इस बार भी वोट डाल रहे हैं।

शायद यही वजह है कि देश में 1989 के मुकाबले चुनावी हिंसा में 25 प्रतिशत की कमी आई है।चुनावी कैजुअल्टी में 70 प्रतिशत और चुनावी हिंसा में घायल होने के मामले में 60 प्रतिशत की कमी आई है।इस बार चुनावी हादसों में कुल 13 सुरक्षाकर्मियों की मौत हुई है 2014 में यह संख्या 44 थी। 

अहमियत

सुरक्षा बलों की खास भूमिका और उनके अहमियत की बात तो औऱ अहम तब हो गई जब खुद भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने दिल्ली में आयोजित प्रैस कांफ्रेंस में कह दिया कि सीआरपीएफ ना होती तो उनका बचना मुश्किल होता।
दरअसल देश के करीब साढे दस लाख मतदान केंद्र ही नहीं बल्कि सामान्य कानून व्यवस्था से लेकर विशिष्ट शख्सियत औऱ चुनावीरैली  प्रदर्शन तक की चुनौती चुनाव आयोग के साथ साथ गृह मंत्रालय के लिए बड़ी सिरदर्द होती है औऱ इसके लिए बृहद स्तर पर तैयारी की जाती है। इसका अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि ग्राफिक्स इन 2014 के आम चुनाव में अकेले केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की तैनाती में 70 प्रतिशत की वृद्धि हुई। यानि इस बार चुनाव में बल के करीब 10 लाख  लोग तैनात हुए हैं। 2014 में सीआरपीएफ 2468 कंपनियां तैनात थीं 2019 के चुनाव में 3067 कंपनियां तैनात की गईं। वीओ- सुरक्षा बलों की तैनाती से बड़ा काम होता है चरणवार इनको एक जगह से दूसरी जगह भेजना। 40-45 दिनों के अंदर सुरक्षा बलों को एक जगह से दूसरी जगह भेजा जाता है। इसके लिए सड़क, जल, आकाश और रेल का सहारा लिया जाता है। इस बार के चुनाव में करीब 150 चुनाव स्पेशल ट्रेनों का इस्तेमाल किया गया।

यह केवल सुरक्षाकर्मियों की बातें थी चुनाव में तैनात दूसरे कर्मियों के लिए भी इतनी ही कवायद होती है। सोचिए आपके एक वोट के लिए कितनी कवायद होती है औऱ अगर आपने वोट ना दिया तो ये सारी कवायद बेकार हो जाती है।

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