दिल्ली पुलिस स्मृति दिवस 2026: अशोक कुमार, संदीप दहिया और मोहर सिंह मीणा ने ड्यूटी के दौरान गंवाई जान, पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने पढ़े शहीदों के नाम
वर्दी पहनकर कर्तव्य निभाने निकलने वाला हर पुलिसकर्मी अपने साथ जिम्मेदारियों का एक संसार लेकर चलता है। लेकिन कभी कोई ड्यूटी से लौटते समय घर नहीं पहुंच पाता, तो कभी सरकारी काम से निकला सफर उसकी जिंदगी का आखिरी सफर बन जाता है। पीछे रह जाती हैं यादें और कर्तव्य के प्रति समर्पण की ऐसी मिसाल, जिसे देश लंबे समय तक याद रखता है।
दिल्ली में बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को पुलिस स्मृति दिवस परेड के दौरान ऐसा ही भावुक माहौल देखने को मिला। किंग्सवे कैंप स्थित न्यू पुलिस लाइंस के परेड ग्राउंड में देश की सेवा करते हुए शहीद हुए 154 पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि दी गई। इनमें दिल्ली पुलिस के तीन कर्मी भी शामिल थे, जिन्होंने ड्यूटी के दौरान हुए सड़क हादसों में अपनी जान गंवाई।
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ड्यूटी पर निकले थे, लेकिन वापस नहीं लौट सके
दिल्ली पुलिस की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में तीन शहीद पुलिसकर्मियों के नाम और उनकी मृत्यु से जुड़ी परिस्थितियों का उल्लेख किया गया है। ये घटनाएं याद दिलाती हैं कि पुलिस की जिम्मेदारी निभाने के दौरान खतरे हमेशा किसी मुठभेड़ या अपराधी से ही नहीं आते। कभी सड़क हादसा भी किसी परिवार की जिंदगी बदल देता है।
एएसआई अशोक कुमार: 24 दिसंबर 2025 को सहायक उपनिरीक्षक (कार्यकारी) अशोक कुमार की ड्यूटी जीआरएपी-IV से संबंधित कार्य में लगी थी। वह द्वारका जिले के मोहन गार्डन थाने में तैनात थे। निर्धारित ड्यूटी पूरी करने के बाद लौटते समय उनका घातक सड़क हादसा हो गया। उन्हें तत्काल आरटीआर अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
कांस्टेबल संदीप दहिया: 5 अगस्त 2026 को कांस्टेबल (कार्यकारी) संदीप दहिया सरकारी काम से एक टीम के साथ राजस्थान के जयपुर गए थे। वापसी में मुंबई-दिल्ली एक्सप्रेसवे पर नूंह, हरियाणा के जयंसिंहपुर पुलिस चौकी के अधिकार क्षेत्र में सरकारी वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे में उन्हें गंभीर चोटें आईं। उन्हें नूंह के शहीद हसन खान मेवाती राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, नल्हड़ ले जाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
कांस्टेबल मोहर सिंह मीणा: 15 जनवरी 2026 को कांस्टेबल (कार्यकारी) मोहर सिंह मीणा सरकारी काम से राजस्थान के अलवर जा रहे थे। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर जिस बस में वह यात्रा कर रहे थे, वह दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस हादसे में उन्हें घातक चोटें आईं और उनकी मृत्यु हो गई।
इन तीनों मामलों में एक बात समान थी। तीनों पुलिसकर्मी सरकारी कर्तव्य से जुड़े सफर या ड्यूटी के दौरान अपनी जान गंवा बैठे।
जब शहीदों की किताब पर पढ़े गए नाम
पुलिस स्मृति दिवस समारोह की शुरुआत गंभीर और सम्मानपूर्ण माहौल में हुई। शहीदों की पुस्तक को धीमी मार्च की धुन के साथ परेड में लाया गया। इस दौरान “वतन की राह पर वतन के नौजवान शहीद हों” गीत बजाया गया। गार्ड ने सलामी शस्त्र प्रस्तुत किया और अधिकारियों ने शहीदों की पुस्तक को सलामी दी।

दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने शहीद पुलिसकर्मियों के नाम पढ़े। इनमें दिल्ली पुलिस के तीन कर्मियों के साथ विभिन्न राज्यों और केंद्रीय पुलिस संगठनों के वे जवान शामिल थे, जिन्होंने 1 सितंबर 2025 से 31 अगस्त 2026 के बीच सेवा के दौरान अपनी जान गंवाई।
कुल 154 पुलिसकर्मियों ने सर्वोच्च बलिदान दिया। इनमें सीमा सुरक्षा बल के 25, उत्तर प्रदेश के 6, बिहार के 12, मध्य प्रदेश के 9, जम्मू-कश्मीर के 9, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के 9 और रेलवे सुरक्षा बल के 8 कर्मी शामिल थे। दिल्ली पुलिस के तीन कर्मियों के नाम भी इस सूची में दर्ज थे।
पुष्पचक्र अर्पित कर दी श्रद्धांजलि
समारोह के बाद शहीदों की पुस्तक को मंच से स्मारक तक ले जाया गया। दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर शहीदों को श्रद्धांजलि दी।
दिल्ली की पूर्व उपराज्यपाल डॉ. किरण बेदी ने भी शहीदों को नमन किया। पूर्व पुलिस आयुक्त टी. आर. कक्कड़, आर. एस. गुप्ता, नीरज कुमार, एस. एन. श्रीवास्तव, राकेश अस्थाना और संजय अरोड़ा समेत दिल्ली पुलिस के सेवारत और सेवानिवृत्त अधिकारियों तथा कर्मियों ने भी पुष्पचक्र अर्पित किए।
शहीदों की स्मृति में दो मिनट का मौन रखा गया। यह मौन उन सभी पुलिसकर्मियों के प्रति सम्मान का प्रतीक था, जिन्होंने देश की सेवा करते हुए अपनी जान गंवाई।
21 अक्टूबर को ही क्यों मनाया जाता है पुलिस स्मृति दिवस?
पुलिस स्मृति दिवस का इतिहास 21 अक्टूबर 1959 से जुड़ा है। उस दिन लद्दाख के हॉट स्प्रिंग क्षेत्र में भारतीय क्षेत्र की रक्षा करते हुए चीनी सैनिकों के घात लगाकर किए गए हमले में दस पुलिसकर्मियों ने जान गंवाई थी। यह घटना अक्साई चिन में हुई थी।
उन दस जवानों की शहादत को याद करने के लिए 21 अक्टूबर को पुलिस स्मृति दिवस मनाया जाता है। इस दिन उन सभी पुलिसकर्मियों को भी श्रद्धांजलि दी जाती है, जिन्होंने बीते एक वर्ष में देश की सेवा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।
दिल्ली में आयोजित समारोह ने एक बार फिर याद दिलाया कि पुलिस की वर्दी के पीछे ऐसे लोग हैं, जिनकी जिम्मेदारी अपने कर्तव्य को निभाना है, भले ही उसके लिए उन्हें अपनी जान ही क्यों न गंवानी पड़े। अशोक कुमार, संदीप दहिया और मोहर सिंह मीणा के नाम उन 154 पुलिसकर्मियों की सूची में दर्ज हैं, जिन्हें देश ने उनकी सेवा और बलिदान के लिए नमन किया।












