आस्था स्थल जो पर्यटन और पुण्य दोनो का लाभ देते हैं

प्रभु श्रीराम और माता सीता से जुड़े आस्था स्थल श्रद्धालुओं को पर्यटन और पुण्य दोनो का लाभ देते हैं। बिहार के मधुबनी में स्थित एसे चार स्थलों पर वर्ष भर आस्थावानों का आगमन होता है। ये आस्था स्थल श्रद्धा से प्रभु को नमन के साथ मिथिलांचल की संस्कृति और खानपान का भी अनुभव कराते हैं।

इस धार्मिक पर्यटन का अभिन्न अंग है वार्षिक मध्यमा परिक्रमा जिसमें श्रद्धालु 15 आस्था स्थल पर जाते हैं। कई वे स्थान हैं जहां श्रीराम स्वयंवर से पहले अनुज लक्ष्मण व गुरु विश्वामित्र के साथ पहुंचे थे। चार स्थल भारत औऱ शेष नेपाल में हैं। इस वर्ष परिक्रमा नेपाल स्थित जनकपुर से आरंभ हो चुकी है। यह सात मार्च को पूरी होगी।

मधुबनी के हरलाखी प्रखंड में कल्याणेश्वर महादेव हैं। कहा जाता है कि राजा जनक ने कल्याणेश्वर महादेव की स्थापना की। हरलाखी में ही फुलहर है जहां माता सीता प्रतिदिन मां गिरजा के पूजन को आती थीं। यहीं वह फुलवारी थी जहां माता सीता औऱ प्रभु श्रीराम ने एक दूसरे को पहली बार देखा था। मधुबनी में ही करूणा नामक स्थान है जहां विवाहोपरांत विदाई के समय सखियों ने माता सीता को जल पिलाया था। विशौल वह जगह है जहां श्रीराम ने लक्ष्मण और गुरू विश्वामित्र के साथ विश्राम किया था। इस धार्मिक यात्रा के अन्य प्रमुख स्थल नेपाल में हैं। मधवापुर प्रखंड के निकट मटिहानी से श्रीराम के विवाहोत्सव की रस्म के लिए मिट्टी लाई गई थी। इससे इस जगह का नाम मटिहानी पड़ा। यहीं जलेश्वर महादेव हैं जिनकी स्थापना राजा जनक ने की थी। नेपाल में ऐसा ही एक आस्था स्थल है धुव्र कुंड जहां नगर भ्रमण के दौरान श्रीराम, लक्षमण व विश्वामित्र पहुंचे थे।

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01-09-2026