म्यूल अकाउंट क्यों नहीं रुक रहे? RBI के सख्त KYC नियमों के बावजूद बड़ा सच

RBI के सख्त KYC नियम कागज़ पर मजबूत हैं, लेकिन कमजोर प्रवर्तन, मानवीय हेरफेर और नागरिक लापरवाही म्यूल अकाउंट्स को साइबर अपराध का मौन वाहक बना रही है।
म्यूल अकाउंट और RBI KYC नियमों से जुड़ा साइबर अपराध चित्रण
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मजबूत ढाँचे कमजोर कानूनों से नहीं, बल्कि कमजोर प्रवर्तन और मानवीय हेरफेर से असफल होते हैं।
भारत में RBI के अपडेटेड KYC निर्देश (2025) और FATF-अनुरूप नियम मौजूद हैं, फिर भी म्यूल अकाउंट्स साइबर अपराध की रीढ़ बने हुए हैं। सवाल नियमों का नहीं, उनके ज़मीनी अमल का है।

म्यूल अकाउंट की चुनौती: नियम मौजूद हैं, खतरा क्यों कायम है?

भारतीय रिज़र्व बैंक ने मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवादी वित्तपोषण को रोकने के लिए सख्त KYC ढांचा तय किया है, जिसमें शामिल हैं:

🔹 RBI KYC Framework के प्रमुख स्तंभ

  • Customer Due Diligence (CDD) – व्यक्ति, फर्म और कानूनी इकाइयाँ
  • Beneficial Owner की पहचान – 10–15% स्वामित्व/नियंत्रण सीमा
  • Enhanced Due Diligence (EDD) – उच्च जोखिम वाले ग्राहक
  • Video CIP (V-CIP) और Digital KYC – प्रतिरूपण जोखिम कम करने हेतु
  • Ongoing Due Diligence – रिकॉर्ड का निरंतर अद्यतन
  • Suspicious Transaction Reporting (STR) – FIU-IND को रिपोर्टिंग

कागज़ पर यह ढांचा FATF के वैश्विक मानकों के अनुरूप है। फिर भी, म्यूल अकाउंट्स रुक नहीं रहे।

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म्यूल अकाउंट क्यों अब भी फल-फूल रहे हैं

1️⃣ सोशल इंजीनियरिंग और भर्ती

  • छात्र, बेरोज़गार युवा और गिग वर्कर “आसान कमीशन” के जाल में फँसते हैं।
  • कई मामलों में पीड़ित स्वेच्छा से अपना खाता अपराधियों को सौंप देते हैं।

2️⃣ पहचान चोरी और कृत्रिम पहचान

  • चोरी हुए आधार, पैन और वोटर आईडी से फर्जी प्रोफाइल।
  • ग्रामीण शाखाओं या बड़े अकाउंट ड्राइव में सत्यापन कमजोर पड़ता है।

3️⃣ बैंकों की परिचालन खामियाँ

  • समय पर re-KYC और पता अद्यतन नहीं।
  • टार्गेट और दबाव में “स्पीड” को “स्क्रूटनी” से ऊपर रखा जाता है।

4️⃣ अंदरूनी मिलीभगत

  • कुछ मामलों में कर्मचारी रिश्वत या दबाव में सहयोग करते हैं।
  • सहकारी और छोटे बैंकों में audit trail कमजोर होता है।

5️⃣ सीमा-पार कमजोरियाँ

  • विदेशी शाखाओं और correspondent banking में नियामकीय असमानता।
  • अपराधी लेन-देन को कई परतों में छिपाते हैं।

6️⃣ डिजिटल अंधे क्षेत्र

  • V-CIP में deepfake और नकली दस्तावेज़ का खतरा।
  • AI-आधारित बॉट्स चोरी किए गए डेटा से खाते तैयार करते हैं।

7️⃣ नागरिक जागरूकता की कमी

  • लोग नहीं जानते कि खाता “किराए पर देना” आपराधिक सहभागिता है।
  • जागरूकता अभियान अपराधियों की रफ्तार से पीछे हैं।

संबंधित जानकारीः म्यूल बैंक खातों का खतरनाक कारोबार: कैसे आम लोग बन रहे हैं साइबर ठगी का हथियार

Frequently Asked Questions (FAQ)

❓ म्यूल अकाउंट क्या होता है?

ऐसा बैंक खाता जिसे कोई व्यक्ति अपने नाम पर खोलकर अवैध लेन-देन के लिए अपराधियों को उपयोग करने देता है।

❓ क्या खाता देने वाला भी अपराधी माना जाता है?

हाँ। कानून में यह मनी लॉन्ड्रिंग में सहभागिता के दायरे में आता है।

❓ RBI के KYC नियम क्या म्यूल अकाउंट रोकने के लिए पर्याप्त नहीं?

नियम पर्याप्त हैं, समस्या उनके असमान और कमजोर प्रवर्तन की है।

❓ V-CIP और डिजिटल KYC सुरक्षित हैं?

तकनीकी रूप से हाँ, लेकिन deepfake और AI-फ्रॉड के कारण अतिरिक्त निगरानी ज़रूरी है।

❓ आम नागरिक खुद को कैसे सुरक्षित रखें?

कभी भी अपना खाता, OTP या KYC दस्तावेज़ किसी को न दें, चाहे “कमीशन” कितना भी आकर्षक लगे।

निष्कर्ष

“KYC ताला है, लेकिन सतर्कता चाबी है।”
नियम मौजूद हैं, पर नागरिक जिम्मेदारी, बैंक जवाबदेही और सख्त प्रवर्तन के बिना म्यूल अकाउंट्स साइबर अपराध के मौन वाहक बने रहेंगे।

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