जानिए कैसे दर्ज होती है एफआईआर

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नई दिल्ली। क्या आपके साथ कोई हादसा हो गया …., क्या पुलिसवाला आपको नहीं सुन रहा क्या आपकी एफआईआर दर्ज नहीं हो रही…। अगर इन सब सवालों से सीधे या किसी तरीके से आपका संबंध है तो इस जानकारी को पूरा पढिए औऱ वीडियो भी देखिए। मैं आपको इन सवालों का जवाब भी बताएंगे और उपाय भी।

एफआईआर का महत्व ना केवल हमारे आपके लिए है बल्कि पुलिस के लिए भी यह काफी अहम है। कैसे बताते हैं आपको।

पुलिस स्टेशन के रिकॉर्ड का उचित रखरखाव एक पुलिस स्टेशन के सुचारू कामकाज की मूल जरूरत है। यह रिकॉर्ड अपराध की रोकथाम अपराधियों की गतिविधियों पर नज़र रखने में बहुत मदद करती हैं।  चूँकि रिकॉर्ड सर्वोपरि हैं, इसलिए यह सुनिश्चित करने के लिए एक पुलिस स्टेशन के एसएचओ की जिम्मेवारी बन जाती है कि रिकार्ड सुरक्षित रखे जाएं। इस रिकार्ड में हल्की सी ओवरराइटिंग या काट छांट तक की इजाजत नहीं है।

एफआईआर

एफआईआर यानि फस्ट इंफार्मेशन रिपोर्ट यानि प्रथम सूचना रिपोर्ट किसी भी पुलिस थाने का सबसे पहला और सबसे अहम राजिस्टर होता है। पुलिसिया भाषा में इसे राजिस्टर नंबर1 भी कहा जाता है। इसे राजिस्टर 24.5(1) के रूप में मुद्रित पुस्तक पर रखना निर्धारित है।

हरेक थाने में एफआईआर के लिए हर कैलेंडर वर्ष के लिए एक सीरियल नंबर निर्धारित होता है। एफआईआर की चार प्रतियां होती हैं एक प्रति दिल्ली जैसे शहरों में डीसीपी को, एक मजिस्ट्रेट को औऱ तीसरी शिकायतकर्ता को दिए जाने का नियम है। चौथी प्रति थाने में सुरक्षित रखी जाती है।  गलत रिपोर्ट लिखना आईपीसी की धारा 218 के तहत अपराध है।

पूरी जानकारी के लिए देखें वीडियो

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