भारतीय पुलिसिंग और आंतरिक सुरक्षा की बहस अक्सर सतही रह जाती है, लेकिन इस इंटरव्यू सीरीज में बातें सीधी, बेबाक और अनुभव पर आधारित हैं। पूर्व ED चीफ और दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी रह चुके IPS कर्नल सिंह ने चार भागों में उस सिस्टम की कमजोरियों और संभावनाओं पर बात की जिससे देश की सुरक्षा जुड़ी है।
इस बातचीत को किसी औपचारिक प्रेस कांफ्रेंस की तरह नहीं, बल्कि एक अनुभव-आधारित इनसाइडर व्यू की तरह देखें। नीचे चारों पार्ट का शॉर्ट सार और लिंक दिया है।
IPS कर्नल सिंह ने बताया लाल किला पर हुए ब्लास्ट में किसकी कमी?
इंटरव्यू के पहले हिस्से में कर्नल सिंह ने बताया है कि लाल किला हमले में किसी की कमी रही या क्या था। उन्होंने यह भी बताया कि ब्लास्ट के बाद पुलिस ने कैसा काम किया। पूरी बात सुने नीचे दिए हुए लिंक को क्लिक कर।
कर्नल सिंह का खुलासा लोकल माडयूल या बाहरी नेटवर्क
IPS कर्नल सिंह इंटरव्यू का यह पार्ट लाल किला कार ब्लास्ट में शामिल आतंकियो के बारे में बताता है। इस पार्ट में कर्नल सिंह ने बताया है कि विस्फोट के लिए किस तरह की सामग्री इस्तेमाल की गई होगी। यह भी बताया है कि इसमें कौन लोग शामिल हो सकते हैं।
जरुर पढ़ेंः upsc exam की तैयारी कैसे करें, कौन से पद आईएएस और आईपीएस में होते हैं सबसे बड़े,जानिए पूर्व आईपीएस से
इंटरव्यू का लिंकः
कर्नल सिंह ने बताया असली खतरा अब ड्रोन साइबर मॉडयूल से है
इंटरव्यू के तीसरे हिस्से में कर्नल सिंह ने अत्याधुनिक तकनीक से उपजे खतरों पर बेबाक बात की है। उन्होंने बताया है कि कैसे डार्क वेब परेशानी का कारण बन सकता है।
इंटरव्यू का लिंकः
कर्नल सिंह ने बताया जब फोन कॉल डिटेल्स नहीं मिलते थे तो कैसे सुलझता था आतंकी हमले का केस
इंटरव्यू के चौथे हिस्से में कर्नल सिंह ने उन केसों के बारे में बताया है जिसकी जांच में वह शामिल थे। इनमें सेल कंपनियों के बारे में उन्होंने विस्तार से चर्चा की है। इसके साथ ही कॉल डिटेल्स जब नहीं मिल पाते थे तो कैसे होती थी जांच यह भी बताया है।
latest post:
- Aadhaar Update: आधार में क्या बदल सकते हैं घर बैठे, फोटो और मोबाइल नंबर बदलने का क्या है तरीका
- सोशल मीडिया पर फर्जी विज्ञापन से ठगी का नया ट्रेंड; भूलकर भी न करें ये गलती, जानें शिकायत का तरीका
- PM Kisan 24th Installment: अगली ₹2000 की किस्त कब आएगी? किस्त रुकी है तो ऐसे करें जांच
- Cyber Fraud: पैसा ट्रांसफर होने से पहले कैसे रुक सकती है साइबर ठगी, ₹5,043 करोड़ बचाने वाले सिस्टम को समझिए
- बाबलू डेयरी में किसने चलवाई गोलियां? डिजिटल निगरानी से खुली गांजा, वसूली और बदले की कहानी












