आदिवासी समुदाय के लोग कैसे बढ़ाएं रोजगार, रायपुर में हुआ विचार

आदिवासी समुदाय

आदिवासी समुदाय के लोग वन आधारित आजीविका के अवसरों की तलाश कैसे कर सकते हैं। छतीसगढ़ के रायपुर में इस पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में मंत्रालयों, राज्य सरकारों, गैर सरकारी संगठनों, अनुसंधान संस्थानों और समुदायों का प्रतिनिधित्व करने वाले 120 से अधिक लोग शामिल हुए।

आदिवासी समुदाय के लोगों को रोजगार के लिए क्या करना चाहिए

छत्तीसगढ़ सरकार के वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा नीति आयोग के सहयोग से “जनजातीय समुदायों के लिए वन-आधारित आजीविका के अवसर” विषय पर आयोजित कार्यशाला का उद्देश्य वन आधारित आजीविका के विभिन्न आयामों का पता लगाना है, जिसमें वन उत्पादों, पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं और वन संसाधनों के सतत उपयोग और जनजातीय आबादी के सामाजिक-आर्थिक विकास में उनकी भूमिका पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
कार्यशाला के मुख्य उद्देश्य आदिवासी समुदायों की वन आधारित आजीविका में पहल एवं हितधारकों के बीच सहयोग के अवसरों की खोज करना तथा आदिवासी समुदायों के लिए वन आधारित आजीविका के लिए नीतिगत समर्थन की पहचान करना है।

कार्यशाला में झारखंड के इस अधिकारी ने क्या कहा

आदिवासी समुदाय के लिए आयोजित इस कार्यशाला में संजीव कुमार पीसीसीएफ-सह सदस्य सचिव झारखंड जैव विविधता बोर्ड ने भी भाग लिया। उन्होंने जैव विविधता बोर्ड और वन विभाग के माध्यम से आदिवासी लोगों और सभी ग्रामीणों के लिए तसर और लाह उत्पादन के माध्यम से राज्य में आजीविका सृजन की संभावनाओं के बारे में प्रस्तुति दी।

उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि झारखंड भारत में लाह का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। इसे झारखंड में कृषि उत्पाद का दर्जा प्राप्त है। लेकिन इसके उत्पादन को बढ़ाने की बहुत संभावना है। उन्होंने लाह की खेती से संबंधित मुख्य समस्याओं पर प्रकाश डाला। संरोपण अवधि के दौरान ब्रूडलैक की कमी उनमें से एक है।

दिए गए ये सुझाव

झारखंड जैव विविधता बोर्ड के सह सदस्य संजीव कुमार द्वारा दिए गए कुछ सुझाव- केंद्रीय रेशम बोर्ड की तरह लाह बोर्ड का निर्माण, ब्रूड लाह फार्म को बढ़ाना, क्षमता निर्माण, विपणन, खरीद नीति, लाह के मूल्य संवर्धन के लिए क्लस्टर का गठन, अनुसंधान और प्रशिक्षण को मजबूत करना आदि। लाह विकास बोर्ड के निर्माण की उनकी अवधारणा की सराहना की गई।

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22-07-2026