ड्रग तस्करी का ये तरीका कभी सुना है, नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पुलिस ने किया खुलासा आपने देखें वीडियो

नई दिल्ली, इंडिया विस्तार। काले रंग का लोहे वाला संदूक, पुलिसवाली वेश भूषा और रेलवे प्रोट्क्शन फोर्स यानि आरपीएफ का एक नहीं दो दो आई कार्ड। जनाब ये किसी पुलिसवाले का हुलिया नहीं है। हम आपको एक ऐसे गांजा तस्कर के बारे में बता रहे हैं जो इस वेश-भूषा का इस्तेमाल रेल के जरिए तस्करी के लिए करता था। नई दिल्ली रेलवे पुलिस स्टेशन जीआरपी पुलिस ने इस तस्कर को गिरफ्तार किया है। इसके कब्जे से 72.5 किलोग्राम गांजा बरामद किया गया है। इस तस्कर का नाम है रोहित कुमार। 26 साल का रोहित साइंस में ग्रेजुएट है और रिफाइनरी फैक्टरी से लेकर ट्रेन में अटेंडेंट तक की नौकरी कर चुका है। लॉकडाउन में पैसे की कमी हुई तो वह गांजे की तस्करी में लिप्त हो गया।

गांजा तस्कर ऐसे पकड़ा गया

जीआरपी रेलवे दिल्ली के डीसीपी हरेन्द्र सिंह के मुताबिक 24 अगस्त को एएसआई प्रमोद, भरत, हवलदार सत्यजीत अन्य पुलिसकर्मियों के साथ गश्त कर रहे थे। फुटओवर ब्रिज के नजदीक उन्हें यह शख्स रोहित दो ट्राली बैग औऱ एक लोहे का संदूक कुली के माध्यम से लेकर आ रहा था। पुलिसकर्मियों को उस पर संदेह हुआ। उससे सामान दिखाने के लिए कहा गया तो उसने कहा कि सामान उसके भाई का है जो चाबी लेकर जा चुका है। उसने खुद को आरपीएफ का कांस्टेबल बताते हुए आई कार्ड दिखाया और ये भी कहा कि उसका भाई सीआईएसएफ में काम करता है। लेकिन पुलिसवालों का शक बड़ा तो उसे नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के थाने लाया जाया गया। नई दिल्ली रेलवे थानाध्यक्ष सतीश राणा, अतिरिक्त थानाध्यक्ष त्रिभुवन नेगी के नेतृत्व में एएसआई प्रमोद, भरत, हवलदार जयवीर, विनीत, सत्यजीत औऱ कांस्टेबल राहुल ने जांच शुरू की। पहले रोहित के कथित भाई का इंतजार किया गया काफी देर तक जब वह नहीं आया तो पुलिस ने सामान का ताला तोड़कर तलाशी ली गई। तलाशी में 35 पैकेट बरामद हुए जिसमें गांजा था।

पुलिस ने रोहित को गिरफ्तार कर लिया । पूछताछ में पता चला कि रोहित ने अपना हुलिया य़हां तक की बाल भी छोटे छोटे इसलिए करा रखे थे ताकि देखने में पुलिसवाला होने का आभास हो। गांजे की खेप लाने ले जाने के लिए लोहे का संदूक इसलिए इस्तेमाल किया जाता था क्योंकि पुलिसबल भी यात्रा के दौरान इसी तरह का संदूक इस्तेमाल करते हैं। उसके पास से इलाहाबाद औऱ हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन से जारी आरपीएफ के दो आईकार्ड भी मिले।  रोहित ने पुलिस को बताया कि 2018 में वह आंध्रा एक्सप्रेस, जम्मू राजधानी औऱ डिब्रूगढ़ राजधानी में अटेंडेंट का काम करता था। उसी समय ग्वालियर में रहने वाले कालू नाम के शख्स ने उसे तस्करी की दुनिया में आने का लालच दिया। बाद में लॉकडाउन की वजह से उसे पैसो की तंगी हुई तो उसने कालू से संपर्क किया और तस्करी में लिप्त हो गया। कालू ने ही उसे दो फर्जी आईकार्ड दिए थे।

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03-10-2026