google hindi news: स्वदेशी जागरण मंच की राष्ट्रीय परिषद की बैठक में प्रस्ताव पारित कर संभावित भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते में किसानों और लघु उद्योगों के हितों को प्राथमिकता देने की बात कही गई है। स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय सह-संयोजक डा. अश्वनी महाजन ने यह जानकारी दी। स्वदेशी जागरण मंच और स्वावलंबी भारत अभियान की दो दिवसीय राष्ट्रीय परिषद की बैठक 9 और 10 मार्च को छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में हुई, जहाँ राष्ट्रीय और राज्य स्तर के पदाधिकारियों ने विचार-विमर्श किया।
google hindi news: स्वदेशी जागरण मंच की बैठक में अमेरिकी टैरिफ की आलोचना
स्वदेशी जागरण मंच की इस बैठक में कहा गया कि अमेरिका के राष्ट्रपति का पदभार संभालने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया भर के कई देशों से आयात पर उच्च टैरिफ (पारस्परिक आधार पर) लगाने की अपनी मंशा की घोषणा करके वैश्विक मुक्त व्यापार प्रणाली पर सीधा हमला किया है। इसका उद्देश्य अमेरिका में विनिर्माण को वापस लाना है ताकि उसकी बेरोजगारी की समस्या का समाधान हो सके।
स्वदेशी जागरण मंच के इस बैठक में कहा गया कि अगर हम इतिहास में जाएं तो यह अमेरिका और उसके सहयोगी ही थे जिन्होंने दुनिया को मुक्त व्यापार की ओर धकेला था, खासकर विश्व व्यापार संगठन के आगमन के साथ, जिसने नियम आधारित वैश्विक व्यापार प्रणाली की शुरुआत की। हालांकि, अमरीका ने इसमें अपने लिए देश विशेष टैरिफ लगाने का एक अलग अधिकार सुरक्षित कर लिया। स्वदेशी जागरण मंच के व्यापक विरोध के बावजूद, भारत में तत्कालीन सरकार ने डब्ल्यूटीओ समझौते पर हस्ताक्षर किए।
1990 के दशक से यह धारणा जोर पकड़ रही थी कि उदारीकरण, वैश्वीकरण और निजीकरण की नीति ही दुनिया के लिए, खास तौर पर विकासशील देशों के लिए, आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता है, हालांकि स्वदेशी जागरण मंच हमेशा उदारीकरण और वैश्वीकरण के प्रस्तावित रूप के खिलाफ रहा है।
अमेरिका, जो कभी मुक्त व्यापार और नियम आधारित वैश्विक व्यापार प्रणाली का सबसे बड़ा समर्थक था, उसे डोनाल्ड ट्रंप के शासन में अचानक एहसास हुआ कि दशकों से उसने दुनिया के बाकी हिस्सों से जितना माल बेचा है, उससे कहीं ज्यादा खरीदा है, जिसके कारण अमेरिका को भारी व्यापार घाटे का सामना करना पड़ रहा है। 2024 में अमेरिका का व्यापार घाटा 918.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर का था। अब डोनाल्ड ट्रंप इस स्थिति को उलटना चाहते हैं। लेकिन डब्ल्यूटीओ में शुरुआती वार्ता की पृष्ठभूमि को समझना जरूरी है।
google news hindi स्वदेशी जागरण मंच विकसित देशों की सौदेबाजी रक साधा निशाना
स्वदेशी जागरण मंच ने अमेरिका सहित विकसित देशों का विकासशील देशों के साथ सौदेबाजी पर भी निशाना साधा और कहा कि अमेरिका सहित विकसित देशों ने विकासशील देशों के साथ सौदेबाजी करते हुए गैट में नए मुद्दों को स्वीकार करने और ट्रिप्स, ट्रिम्स, कृषि और सेवाओं पर समझौते करने के लिए विकसित देशों की तुलना में वस्तुओं पर अधिक टैरिफ लगाने की अनुमति दी।
यानि यह उस समय एक सौदा था जिसे अमेरिका अब जानबूझकर नजरअंदाज कर रहा है। डब्ल्यूटीओ प्रणाली ने अमेरिका और अन्य विकसित देशों को बहुत लाभ पहुंचाया, क्योंकि इसने एक मजबूत पेटेंट और अन्य आईपीआर (बौद्धिक संपदा अधिकार) व्यवस्था का मार्ग प्रशस्त किया, जिससे उनकी फार्मा और अन्य कंपनियों को उनके आईपीआर के लिए रॉयल्टी के रूप में भारी लाभ हुआ, बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा निवेश के लिए विकासशील देशों के दरवाजे खुले और साथ ही भारत सहित विकासशील देशों में अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए बाजार खुले।
डोनाल्ड ट्रम्प अच्छी तरह से समझते थे कि अमेरिका की मुक्त व्यापार नीति ही किसी न किसी तरह से अर्थव्यवस्था में मंदी और बढ़ती बेरोजगारी के लिए जिम्मेदार है क्योंकि इसने चीन से सस्ते आयात के लिए रास्ते खोल दिए। इस स्थिति से निपटने के लिए डोनाल्ड ट्रम्प चीन, कनाडा, मैक्सिको, ब्रिटेन, दक्षिण कोरिया और भारत सहित कई देशों पर रेसीप्रोकल टैरिफ यानि पारस्परिक आयात शुल्क लगा रहे हैं।
अपनी स्थापना के समय से ही स्वदेशी जागरण मंच, सार्वजनिक स्वास्थ्य, किसानों, उद्योग और आम आदमी पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले असमान डब्ल्यूटीओ समझौतों के खिलाफ लड़ रहा है। यह स्पष्ट करते हुए कि स्वदेशी जागरण मंच अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा देने के खिलाफ नहीं है, हमारा दृढ़ विश्वास है कि बहुपक्षीय व्यापार समझौते अर्थव्यवस्था के लिए अच्छे नहीं हैं, क्योंकि सभी देशों को मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा देने का कोई मतलब नहीं है। भारत सरकार ने यह भी कहा है कि बहुपक्षवाद समाप्त होने के कारण द्विपक्षीय व्यवस्थाएं ही दिन-प्रतिदिन प्रचलित होती जा रही हैं।
स्वदेशी जागरण मंच के मुताबिक पिछले पांच वर्षों में भारत ने आत्मनिर्भर भारत की नीति के माध्यम से उन सभी वस्तुओं के विनिर्माण को देश में बढ़ावा देने का निर्णय लिया है, जिसके लिए वह चीन सहित अन्य देशों पर निर्भर था। इस नीति से अच्छे परिणाम मिल रहे हैं। भारत को सुरक्षात्मक वातावरण में रखकर अपने उद्योगों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना होगा। हमारे निर्यात पर अमेरिका के सीधे हमले के मद्देनजर, इस निरर्थक तर्क पर कि भारत उच्च टैरिफ लगाता है, और उनके द्वारा टैरिफ में वृद्धि की संभावना है, एक बार फिर स्वदेशी के महत्व को रेखांकित करता है।
स्वदेशी जागरण मंच की राष्ट्रीय परिषद का मत है कि भारत को बहुपक्षीय व्यापार समझौतों के बजाय द्विपक्षीय व्यापार समझौतों के साथ अपने विदेशी व्यापार को बढ़ाना चाहिए। अमेरिका और अन्य देशों के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते करते समय, राष्ट्रीय हितों की रक्षा की जानी चाहिए, विशेष रूप से हमारे किसानों और छोटे उद्यमियों के हितों की।
अतीत में हमने देखा है कि पिछले 10 वर्षों में सरकार किसानों के हितों और उनकी आजीविका की रक्षा करती रही है, जबकि व्यापार समझौतों पर बातचीत करते समय, चाहे वह क्षेत्रीय व्यापार और निवेश समझौता हो, रीजनल कोम्प्रेहेंसिव एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन समझौता हो, डेयरी और कृषि पर इसके प्रतिकूल प्रभाव की चिंताओं के कारण इसे वापस ले लिया गया। जहां तक कृषि एवं लघु उद्योग का सवाल है, इस नीति को जारी रखने की जरूरत है, खासकर जहां किसानों और श्रमिकों की आजीविका शामिल है।
स्वदेशी जागरण मंच भारतीय रुपये में विदेशी व्यापार को बढ़ाने के सरकार के प्रयास की सराहना करता है, हालांकि, यह सुनिश्चित करने के लिए भी प्रयास किए जाने चाहिए कि विदेशी मुद्रा और स्विफ्ट जैसी भुगतान प्रणाली को दबाव की रणनीति के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति न दी जाए। पूरा विश्व भू-आर्थिक विखंडन के एक सिंड्रोम से गुजर रहा है और इस परिदृश्य में सफलता की कुंजी स्वदेशी जागरण मंच के दर्शन पर आधारित “राष्ट्र प्रथम” की नीति है।
स्वदेशी जागरण मंच की राष्ट्रीय परिषद ने भारत के नागरिकों से आग्रह किया है कि जहां भी घरेलू उत्पाद, कृषि और औद्योगिक दोनों उपलब्ध हों, हमें भारतीय उत्पादों का ही उपयोग करना चाहिए।साथ जी साथ आरोग्य के लिए पेटेंटीकृत दवाओं के स्थान पर आयुष उत्पादों और क्रियाओं के उपयोग को बढ़ावा दिया जाए।
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