FRI: साइबर धोखाधड़ी के खिलाफ भारत का नया सुरक्षा कवच—क्यों 2026 में हर नागरिक को इसे जानना चाहिए

FRI यानी Financial Fraud Risk Indicator भारत की डिजिटल सुरक्षा व्यवस्था का नया आधार बन रहा है। जानिए यह सिस्टम कैसे संदिग्ध मोबाइल नंबरों को पहचानकर साइबर धोखाधड़ी को पहले ही रोक देता है और नागरिकों को कैसे सुरक्षित बनाता है।
Financial Fraud Risk Indicator (FRI)
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भारत तेज़ी से डिजिटल हो रहा है — भुगतान, बैंकिंग, पहचान, सेवाएँ सब मोबाइल पर आ गई हैं। लेकिन इसके साथ ही साइबर अपराध भी उतनी ही तेज़ी से बदल रहा है। इसी चुनौती के बीच एक ऐसा सिस्टम सामने आया है, जो चुपचाप लेकिन बेहद प्रभावी तरीके से करोड़ों नागरिकों की सुरक्षा कर रहा है — Financial Fraud Risk Indicator (FRI)

FRI को दूरसंचार विभाग (DoT) की नागरिक-केंद्रित पहल Sanchar Saathi के अंतर्गत लागू किया गया है और यह आज भारत की साइबर फ्रॉड रोकथाम रणनीति का एक अहम स्तंभ बन चुका है।ॉ

Financial Fraud Risk Indicator (FRI) क्या है और क्यों यह महत्वपूर्ण है?

FRI एक रिस्क-आधारित इंडिकेटर है जो संदिग्ध मोबाइल नंबरों को उनके धोखाधड़ी जोखिम के आधार पर वर्गीकृत करता है:

  • मध्यम जोखिम
  • उच्च जोखिम
  • अत्यधिक उच्च जोखिम

यह वर्गीकरण कई भरोसेमंद स्रोतों से प्राप्त डेटा के आधार पर होता है, जैसे:

  • NCRP (राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल, I4C)
  • DoT का चक्षु प्लेटफ़ॉर्म
  • बैंक, NBFC, UPI प्रदाता और टेलीकॉम कंपनियाँ

जब कोई लेनदेन किसी उच्च-जोखिम मोबाइल नंबर से जुड़ा होता है, तो बैंक या भुगतान प्रणाली अतिरिक्त जांच करती है, चेतावनी जारी करती है या लेनदेन रोक देती है।

यही वह बिंदु है जहाँ नुकसान होने से पहले ही सुरक्षा शुरू हो जाती है।

FRI का वास्तविक प्रभाव

FRI की शुरुआत के बाद केवल कुछ ही महीनों में:

  • सैकड़ों करोड़ रुपये की संभावित साइबर धोखाधड़ी रोकी जा चुकी है
  • हज़ारों संदिग्ध लेनदेन समय रहते ब्लॉक किए गए
  • बैंक और डिजिटल भुगतान प्लेटफ़ॉर्म पहले से अधिक सतर्क और सक्षम हुए

इसका अर्थ है कि सिस्टम सिर्फ प्रतिक्रिया नहीं करता, बल्कि पूर्व-रक्षा (prevention) करता है।

Sanchar Saathi क्या है और इसमें FRI की भूमिका क्या है?

Sanchar Saathi (https://play.google.com/store/apps/details?id=com.dot.app.sancharsaathi&hl=en_IN) DoT का नागरिक-सशक्तिकरण प्लेटफ़ॉर्म है, जो मोबाइल और डिजिटल सुरक्षा से जुड़ी कई अहम सेवाएँ देता है:

  • संदिग्ध कॉल और SMS की रिपोर्टिंग (चक्षु)
  • अपने नाम पर चल रहे मोबाइल नंबरों की जानकारी
  • खोए या चोरी हुए मोबाइल को ब्लॉक करना
  • हैंडसेट की प्रामाणिकता जाँचना
  • सत्यापित बैंक और संस्थागत संपर्क देखना

इसी इकोसिस्टम में FRI एक बैक-एंड सुरक्षा इंजन की तरह काम करता है जो पूरे डिजिटल सिस्टम को सुरक्षित बनाता है।

Digital Intelligence Platform (DIP) की भूमिका

DIP एक सुरक्षित नेटवर्क है जो 1000 से अधिक संस्थाओं को जोड़ता है:

  • केंद्रीय एजेंसियाँ
  • सभी राज्यों की पुलिस
  • बैंक, वित्तीय संस्थान और भुगतान प्रदाता
  • दूरसंचार कंपनियाँ
  • सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म

यहीं पर FRI से जुड़ा डेटा साझा होता है ताकि हर स्तर पर धोखाधड़ी को रोका जा सके।

क्यों यह सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं, बल्कि नागरिक आंदोलन है

FRI सिर्फ एक सिस्टम नहीं है — यह सोच का बदलाव है।
यह हमें सिखाता है कि:

  • साइबर सुरक्षा केवल सरकार या बैंकों की ज़िम्मेदारी नहीं है
  • हर नागरिक की जागरूकता ही इसकी असली ताकत है
  • रोकथाम इलाज से बेहतर है, यह डिजिटल दुनिया में भी सच है

निष्कर्ष

FRI दिखाता है कि सही नीति, सही तकनीक और सही सहयोग से साइबर अपराध को नियंत्रित किया जा सकता है। यह भारत की डिजिटल सुरक्षा यात्रा का एक ऐसा पड़ाव है, जो आने वाले वर्षों में और भी महत्वपूर्ण होने वाला है।

अगर हम चाहते हैं कि भारत सुरक्षित डिजिटल राष्ट्र बने, तो FRI को समझना, अपनाना और इसके बारे में बात करना हम सबकी साझा ज़िम्मेदारी है।

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