फोन पर आने वाले लोन अप्रूवल, स्कॉलरशिप और आर्थिक मदद साइबर फ्राड का नया तरीका है। इससे सावधान रहें। याद रखिएगा कि इस तरह के जाल में फंसने के बाद फोन करने वाला आपसे बैंख खाता डिटेल, यूपीआई के जरिए भुगतान या किसी अन्य खाते में पैसे भेजने के लिए कहेगा। इसे बाद आपका सब कुछ हैक हो सकता है।
यहीं से शुरू हो सकता है फर्जी लोन और स्कॉलरशिप के नाम पर ऑनलाइन फ्रॉड।
साइबर ठगी करने वाले गिरोह अब अलग-अलग लोगों को अलग-अलग जिम्मेदारियां देकर काम करते हैं। कोई बैंक खाते और सिम कार्ड का इंतजाम करता है, कोई फोन करके लोगों को अपने जाल में फंसाता है और कोई ठगी से मिली रकम निकालकर आगे पहुंचाता है। इस तरह एक संगठित नेटवर्क के जरिए लोगों की मेहनत की कमाई ठगी जा सकती है।
दिल्ली पुलिस की पश्चिमी जिला के साइबर सेल की कार्रवाई में भी ऐसा ही एक नेटवर्क सामने आया है। थाना साइबर वेस्ट ने फर्जी लोन और स्कॉलरशिप से जुड़े साइबर फ्रॉड की जांच में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक, इस नेटवर्क में बैंक खाते और सिम कार्ड उपलब्ध कराने से लेकर ठगी की रकम निकालने और कॉलिंग ऑपरेशन चलाने तक अलग-अलग भूमिकाएं निभाई जा रही थीं।
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फर्जी लोन और स्कॉलरशिप स्कैम क्या है?
फर्जी लोन स्कैम में ठग खुद को बैंक, वित्तीय कंपनी, लोन एजेंट या किसी वित्तीय सेवा से जुड़ा प्रतिनिधि बताकर लोगों से संपर्क करते हैं। वे कम ब्याज पर तुरंत लोन, बिना ज्यादा दस्तावेज के कर्ज या आसानी से लोन मंजूर कराने का दावा कर सकते हैं।
इसी तरह स्कॉलरशिप फ्रॉड में छात्रों और उनके अभिभावकों को छात्रवृत्ति, सरकारी आर्थिक सहायता या किसी विशेष योजना का लाभ दिलाने का झांसा दिया जाता है।
शुरुआत में बातचीत भरोसा पैदा करने वाली होती है। इसके बाद रजिस्ट्रेशन फीस, प्रोसेसिंग चार्ज, फाइल चार्ज या अन्य किसी शुल्क के नाम पर पैसे मांगे जा सकते हैं। कई मामलों में बैंक खाते या यूपीआई के जरिए रकम मंगाई जाती है।
ध्यान रखें, किसी योजना का नाम लेकर फोन करने वाला व्यक्ति जरूरी नहीं कि सरकारी विभाग या बैंक का प्रतिनिधि हो।
फर्जी लोन के नाम पर साइबर ठगी कैसे होती है?
ऐसी ठगी में आमतौर पर कुछ तरीके अपनाए जाते हैं।
1. तुरंत लोन देने का झांसा
लोगों को कम ब्याज, बिना गारंटी या बिना ज्यादा दस्तावेज के लोन दिलाने का दावा किया जाता है। जरूरतमंद व्यक्ति जल्दी में उनकी बातों पर भरोसा कर सकता है।
2. प्रोसेसिंग फीस के नाम पर पैसे मांगना
लोन मंजूर कराने से पहले रजिस्ट्रेशन, प्रोसेसिंग या अन्य शुल्क मांगा जाता है। पैसे मिलने के बाद ठग फोन उठाना बंद कर सकते हैं।
3. स्कॉलरशिप और सरकारी सहायता का लालच
छात्रों या अभिभावकों को बताया जाता है कि उनके लिए छात्रवृत्ति या आर्थिक सहायता मंजूर हुई है। इसके नाम पर उनसे व्यक्तिगत और बैंकिंग जानकारी हासिल करने की कोशिश की जाती है।
4. बैंक खाते और यूपीआई आईडी का इस्तेमाल
ठगी की रकम सीधे ठगों के खाते में लेने के बजाय दूसरे लोगों के बैंक खातों, यूपीआई आईडी या क्यूआर कोड में मंगाई जा सकती है। इससे पैसे का वास्तविक लाभार्थी छिपाने की कोशिश होती है।
म्यूल बैंक अकाउंट क्या होता है और साइबर ठगी में इसका इस्तेमाल कैसे होता है?
साइबर अपराध की भाषा में ऐसे बैंक खातों को म्यूल अकाउंट कहा जाता है, जिनका इस्तेमाल अवैध रूप से प्राप्त रकम को लेने और आगे ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है।
कई बार खाताधारक कमीशन के लालच में अपना बैंक खाता दूसरों को इस्तेमाल करने देते हैं। कुछ मामलों में उन्हें यह भी नहीं पता होता कि उनके खाते में आने वाला पैसा साइबर ठगी से जुड़ा है।
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ठगी की रकम ऐसे खाते में आने के बाद एटीएम से निकाली जा सकती है या दूसरे खातों में भेजी जा सकती है। इस काम में शामिल लोगों को कमीशन दिया जा सकता है।
अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, यूपीआई या सिम कार्ड किसी दूसरे व्यक्ति को इस्तेमाल करने देना कानूनी परेशानी पैदा कर सकता है। यदि खाते में ठगी का पैसा आता है तो खाताधारक भी जांच के दायरे में आ सकता है।
फर्जी कॉलिंग नेटवर्क कैसे करता है काम?
दिल्ली पुलिस की पश्चिमी जिला इकाई की जांच में सामने आया कि कथित नेटवर्क में अलग-अलग लोगों की भूमिका तय थी।
पुलिस के मुताबिक, अमित कपूर बैंक खातों और सिम कार्ड की व्यवस्था करने तथा रकम निकालने में शामिल था। शिवा सिंह चौधरी पर बैंक खाते उपलब्ध कराने और निकाली गई रकम दूसरे लोगों तक पहुंचाने में भूमिका निभाने का आरोप है। एस. गौरव उर्फ अप्पू कथित तौर पर बैंक खाते उपलब्ध कराने वालों और कॉलिंग नेटवर्क के बीच संपर्क का काम करता था।
पुलिस ने विकासपुरी के बुधेला स्थित एक परिसर में छापा मारकर सेराज अंसारी उर्फ दाऊद को भी गिरफ्तार किया। उस पर वहां चल रहे संदिग्ध कॉलिंग ऑपरेशन का प्रबंधन करने का आरोप है। परिसर में पांच महिला टेली कॉलर्स भी मिलीं, जिन्हें मामले में पाबंद किया गया।
इस कार्रवाई में पुलिस ने 12 मोबाइल फोन, 9 कीपैड फोन, 10 नोटपैड, पांच रजिस्टर, एक डेबिट कार्ड, दो चेकबुक और 45,170 रुपये नकद बरामद किए।
पुलिस के अनुसार, तमिलनाडु और दक्षिण भारत के अन्य हिस्सों के लोगों को स्कॉलरशिप और अन्य आर्थिक लाभ का झांसा देकर पैसे ट्रांसफर करवाए गए थे। मामले में थाना साइबर वेस्ट में FIR संख्या 56/2026 दर्ज की गई है। जांच जारी है।
फर्जी लोन और स्कॉलरशिप फ्रॉड की पहचान कैसे करें?
कुछ संकेत ऐसे हैं जिनसे आप ठगी की आशंका पहचान सकते हैं।
- बिना किसी जांच के तुरंत लोन मंजूर करने का दावा।
- लोन मिलने से पहले अनजान खाते में प्रोसेसिंग फीस मांगना।
- सरकारी स्कॉलरशिप दिलाने के नाम पर फोन करके पैसे मांगना।
- किसी अनजान व्यक्ति का अपना बैंक खाता या यूपीआई आईडी इस्तेमाल करने के लिए कहना।
- क्यूआर कोड स्कैन करके पैसा प्राप्त करने का दावा करना।
- फोन पर जल्दबाजी में निर्णय लेने या तुरंत भुगतान करने का दबाव बनाना।
- बैंक खाते, ओटीपी, एटीएम पिन या यूपीआई पिन की जानकारी मांगना।
इनमें से कोई संकेत मिलने पर भुगतान करने से पहले संबंधित बैंक या सरकारी विभाग से आधिकारिक माध्यम से पुष्टि करें।
ऑनलाइन लोन और स्कॉलरशिप फ्रॉड से कैसे बचें?
लोन लेने से पहले बैंक या वित्तीय संस्था की आधिकारिक वेबसाइट और ऐप की जांच करें। यह भी सुनिश्चित करें कि लोन देने वाली संस्था भारतीय रिजर्व बैंक के नियामकीय दायरे में आने वाली बैंक या एनबीएफसी है।
स्कॉलरशिप के लिए संबंधित सरकारी विभाग या आधिकारिक छात्रवृत्ति पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी देखें। किसी अनजान कॉलर के कहने पर दस्तावेज, बैंक विवरण या ओटीपी साझा न करें।
अपना बैंक खाता किसी दूसरे व्यक्ति को इस्तेमाल करने के लिए न दें। खाते में अचानक कोई संदिग्ध रकम आती है तो उसे खुद निकालकर किसी अनजान व्यक्ति को न सौंपें। अपने बैंक को इसकी सूचना दें।
साइबर ठगी हो जाए तो तुरंत क्या करें?
यदि आपके साथ ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी हो गई है तो समय बर्बाद न करें।
सबसे पहले राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें। इसके बाद आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।
साथ ही अपने बैंक को तत्काल सूचना देकर संदिग्ध लेनदेन की जानकारी दें और उपलब्ध शिकायत संख्या सुरक्षित रखें। बैंक ट्रांजैक्शन का विवरण, फोन नंबर, मैसेज, यूपीआई आईडी और भुगतान का स्क्रीनशॉट जांच में उपयोगी हो सकते हैं।
जल्दी शिकायत करने से ठगी की रकम को आगे ट्रांसफर होने से रोकने की संभावना बढ़ सकती है।
फर्जी लोन और स्कॉलरशिप के नाम पर होने वाली ठगी में सबसे बड़ा हथियार लोगों का भरोसा और जल्दी आर्थिक लाभ पाने की उम्मीद होती है। किसी भी अनजान कॉल पर पैसे भेजने से पहले उसकी पुष्टि करें। याद रखें, आपका बैंक खाता आपकी जिम्मेदारी है और उसे किसी दूसरे के हाथ में देना आपको साइबर अपराध की जांच तक पहुंचा सकता है।

