Munshi premchand-जैसे आज के हालात भी जानते थे मुंशी प्रेमचंद

munshi premchand
👁️ 544 Views

Munshi premchand- उपन्यास सम्राट की ‘कर्मभूमि’ कागज तो ‘रंगभूमि’ कैनवास थी। न जाने कितने कागजों पर उन्होंने ‘निर्मला’ रंगी और ‘गोदान’ में न जाने कितने शब्दों का दान किया। रंगने की कोशिश में शब्दों की कहीं कमी नहीं की। 56 वर्षों तक साहित्य की सेवा तमाम मुश्किलों के ‘सदन’ में रहकर की। भोजपुरी की एक कहावत है ‘तेतरी बिटिया राज रजावे, तेतरा बेटवा भीख मंगावे’ जैसी रुढि़वादी परंपरा को तोड़ते मुंशी जी ने जन्म लिया। होश संभाला तो अंग्रेजों का क्रूर शासन चुनौती बना। अब उनकी लेखनी वर्तमान समाज के लिए चुनौती है।

Munshi premchand Details


उनके 15 उपन्यास, 300 से अधिक कहानियां, तीन नाटक, 10 पुस्तकों का अनुवाद, सात बाल साहित्य और न जाने कितने लेख इस बात की गवाही देते हैं कि उस समय अंधविश्वास कितना चरम पर था। सामाजिक और आर्थिक विषमताओं को झेलते हुए उन्होंने दैनिक जीवन की तमाम दुश्वारियों को अपनी लेखनी से कहानियों में ढाल दिया। आज समाज में उनके शब्दों का अनुसरण हो जाए तो शायद विषमताएं समाप्त हो जाएं, लेकिन उनके गांव लमही में ही यह सब चरितार्थ होते नहीं दिख रहा तो विश्व पटल पर यह कैसे संभव हो पाए। उनके साहित्य में गरीबी को बिल्कुल ठंडे दिमाग से झेलने की क्षमता भी है।


लिव इन रिलेशनशिप जैसे शब्द आज के दौर में सामने आए हैं। प्रेमचंद तो उस जमाने के थे जब गौना के बगैर पति-पत्नी मिल भी नहीं सकते थे। उन्होंने उस दौर में मीसा पद्मा जैसी कहानी लिखी जिसमें आज के दौर की झलक समाहित है। इससे अंदाजा लगाना मुश्किल है कि कितने आगे थे मुंशी जी।


जिस लमही ने दुनिया को भारत से परिचित कराया वही लमही आज भारत के अंतिम छोर पर खड़ा है। साहित्य के सूरज का जन्मदिन आने पर सरकारी महकमे टेंट लगा कर फर्ज अदायगी में तेज होते हैं तो विद्यालयों में रस्म निबाहने का दस्तूर भी पूरा होता है। उसके बाद पूरे साल उनका हाल जानने वाला कोई नहीं है। इस हाल पर साहित्यकारों का दर्द सामने आता रहता है कि आखिर मुंशी जी के लिए केवल एक दिन का प्यार क्यों?


मुंशी जी का गांव अब गांव नहीं रह गया है। कुछ वर्षों पहले हेरिटेज विलेज घोषित हुआ लमही अब नगर निगम के दस्तावेज में दर्ज हो गया है। गरीबों का शोषण कर कुछ दिमागदारों ने जमीनें लूटकर कंक्रीट के जंगल खड़े कर दिए। इनके बीच असल लमही गुम हो गया। बस मुंशी जी के किरदार किताबों से निकल कर भटकते दिख जाते हैं।

Latest Posts

Breaking News
दिल्ली में 100 करोड़ का हेरोइन बरामद देखें वीडियो | दिल्ली में पकड़ा गया खलिस्तानी आतंकी | Whatsapp-Signal यूजर्स सावधानः Linked devices से हो सकती है जासूसी | AI Deepfake से निवेश ठगी: मंत्री का नकली वीडियो, करोड़ों का नुकसान—ऐसे फंस रहा है पढ़ा-लिखा भारत | प्रेम और मातृत्व में क्या फर्क है? व्यक्तित्व सत्र में डा. जायसवाल की गहरी व्याख्या | गार्गी नारीशक्ति सम्मेलन 2026ः पटना में महिलाओं का महाकुंभ, विकसित बिहार की नई सोच | अनिल अंबानी की मुश्किलें बढ़ींः सीबीआई के नए एफईआईआर में क्या | जब इंटरनेट बन जाए युद्धभूमिः muddy water APT और डिजिटल युद्ध का बढ़ता खतरा | वित्तीय साइबर अपराध क्यों बढ़ रहे हैं ? बैंकिंग सिस्टम में सुधार क्यों हो गया जरूरी | वायरल मैसेज का सच: नहीं बनेगा कोई नया केंद्रशासित प्रदेश, PIB ने दी चेतावनी। | Panaji police cyber crime model: क्या पूरे देश में लागू हो सकता है गोवा पुलिस का सुरक्षा मॉडल | cisf raising day: मेट्रो से एयरपोर्ट तक CISF की अनकही कहानी |
10-03-2026