ग़ज़ल

corona
👁️ 494 Views

कॉरोना की शक्ल में ढला है
लाइलाज़ यह कौन सी बला है

फ़ासले-दर-फ़ासले बढ़ा दिए जिसने
क्या – क्या मंसूबे लेकर चला है

मौत का शैल – ए – आब जैसे
अयाँ ख़रोश ज़लज़ला है

मुसल्सल गर्दिश – ए – ज़ाँ और जहाँ
क़यामत का सिलसिला है

माँ वो माँ अभागन ही होगी
जिसकी कोख़ में ये कम्बख़्त पला है

कितना और ढहाएगा क़हर
न जाने कैसा मसअला है

मंज़र देखकर तो यही लगता है ‘यश’
यह बला से भी बड़ी बला है

सुख़नवर
डाॅ.यशोयश
कवि एवं साहित्यकार , आगरा

Latest Posts

Breaking News
दिल्ली में 100 करोड़ का हेरोइन बरामद देखें वीडियो | दिल्ली में पकड़ा गया खलिस्तानी आतंकी | वित्तीय साइबर अपराध क्यों बढ़ रहे हैं ? बैंकिंग सिस्टम में सुधार क्यों हो गया जरूरी | वायरल मैसेज का सच: नहीं बनेगा कोई नया केंद्रशासित प्रदेश, PIB ने दी चेतावनी। | Panaji police cyber crime model: क्या पूरे देश में लागू हो सकता है गोवा पुलिस का सुरक्षा मॉडल | cisf raising day: मेट्रो से एयरपोर्ट तक CISF की अनकही कहानी | क्या आप जानते हैं डिजिटल सेतु और इसके फायदों को | QR code स्कैम से सावधान, जान लें बचने के ये उपाय | प्राइवेसी सेटिंग्स के बारे में जान लें ये जरूरी बातें | क्या आप जानते हैं किसी लिंक पर क्लिक करने के खतरे से बचने का उपाय ? | वर्दी बताएगी अनुभवः CISF में इस फैसले से वरिष्ठ कांस्टेबलों को मिली नई पहचान | अब आपका whatsapp ऐसे चलेगा, जान लें ये जरूरी नियम |
08-03-2026