दिल्ली नगर निगम को मिला नया अधिकार, ऐसे आएगी अब सारे कामों में तेजी

दिल्ली नगर निगम आयुक्त को 50 करोड़ तक के प्रोजेक्ट को अपने स्तर पर ही स्वीकृत करने का पावर देने का लाभ क्या होगा।
दिल्ली नगर निगम

दिल्ली सरकार ने दिल्ली नगर निगम को नया अधिकार देने का फैसला किया है। इसके तहत दिल्ली नगर निगम आयुक्त की फाइनेंशियल पावर में वृद्धि हो गई है। नगर निगम आयुक्त अब अपने स्तर पर ही 50 करोड़ रुपये तक की योजनाओं को स्वीकृत कर सकते हैं।

दिल्ली नगर निगम को होंगे ये पांच फायदे

  1. पांच करोड़ रुपये से अधिक और 50 करोड़ रुपये तक के प्रोजेक्ट को अब नगर निगम आयुक्त ही स्वीकृत कर सकते हैं। इससे छोटे प्रोजेक्ट को जल्द शुरू करने और पूरा करने में तेजी आएगी।
  2. निगम अफसर 50 करोड़ रुपये तक के प्रोजेक्ट से जुड़ी डीपीआर के प्रस्ताव तैयार कर सीधे निगम आयुक्त से स्वीृत करा सकेंगे।
  3. अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था के नवीनीकरण जैसे काम में तेजी आएगी।
  4. अभी तक 5 करोड़ से अधिक के प्रोजेक्ट को स्वीकृत करने के लिए स्थायी समिति, सदन से स्वीकृति जरूरी थी जिसमें समय लगता था। अब इसकी बचत होगी।
  5. नगर निगम को सभी जोन में आयुक्त कई प्रोजेक्ट को सीधे स्वीकृत कर सकेंगे।

देश भर में क्या है

मुंबई में बीएमसी आयुक्त को ढाई करोड़ तक के फंड से जुड़े प्रोजेक्ट को स्वीकृत करने का पावर है। बेंगलुरु में निगम आयुक्त तीन करोड़ जबकि हैदराबाद में यह पावर 20 लाख रुपये की रकम तक का है। चेन्नई में निगम आयुक्त को 30 लाख, चंडीगढ़ में 50 लाख रुपये फंड का पावर है।

क्या है दिल्ली सरकार का तर्क

सरकार का मानना है कि नगर निगम आयुक्त के वित्तीय अधिकार बढ़ने से ने केवल निर्णय प्रक्रिया में तेजी आएगी बल्कि बुनियादी सुविधाओं से जुड़े काम समयबद्ध पूरे किए जा सकेंगे। दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली के विकास के लिए स्थानीय निकायों को सशक्त बनाना सरकार की प्राथमिकता है।

माना जा रहा है कि इस कदम के बाद सड़कों, नालों, सफाई व्यवस्था, सामुदायिक सुविधाओं और अन्य बुनियादी नागरिक सेवाओं से जुड़े कार्य पहले की तुलना में अधिक तेजी से पूरे होंगे। लंबे समय तक लंबित रहने वाली परियोजनाओं में तेजी आएगी।

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