भारत में साइबर सुरक्षा अब तकनीकी नहीं, राष्ट्रीय भरोसे की चुनौती बन चुकी है।डिजिटल इंडिया के विस्तार के साथ भारत में साइबर सुरक्षा सबसे बड़ी नीतिगत चुनौती बनकर उभरी है। डिजिटल भुगतान, सरकारी पोर्टल और ऑनलाइन सेवाओं ने नागरिकों को सुविधा दी, लेकिन इसके साथ साइबर अपराध भारत में तेज़ी से बढ़े हैं। आज जोखिम सिर्फ हैकिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि डेटा लीक, पहचान की चोरी और वित्तीय धोखाधड़ी तक फैल चुका है।
डेटा संरक्षण कानून भारत: क्यों यह साइबर सुरक्षा से जुड़ा है
डेटा संरक्षण कानून भारत में लागू होने का उद्देश्य केवल निजता की रक्षा नहीं, बल्कि साइबर अपराध रोकथाम भी है।
जब व्यक्तिगत डेटा असुरक्षित रहता है:
- वह डार्क वेब पर पहुँचता है
- फर्जी बैंक कॉल और OTP फ्रॉड में इस्तेमाल होता है
- पहचान दुरुपयोग को जन्म देता है
यही कारण है कि कमजोर डेटा प्रबंधन अब केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि साइबर सुरक्षा जोखिम माना जा रहा है।
भारत में साइबर शासन और नियामकों की जिम्मेदारी
आज भारत में साइबर शासन केवल कानून बनाने तक सीमित नहीं रह सकता।
नियामकों को यह मानना होगा कि:
- कमजोर आईटी सिस्टम = राष्ट्रीय जोखिम
- साइबर लापरवाही = सिस्टम फेल्योर
वित्तीय क्षेत्र, टेलीकॉम और डिजिटल प्लेटफॉर्म
अब एक-दूसरे से जुड़े हुए साइबर इकोसिस्टम का हिस्सा हैं।
साइबर सुरक्षा में सबसे बड़ी कमजोरी: बुनियादी लापरवाही
अधिकांश साइबर अपराध
उन्नत हैकिंग से नहीं, बल्कि साधारण गलतियों से होते हैं:
- एक ही पासवर्ड बार-बार इस्तेमाल करना
- सॉफ्टवेयर अपडेट में देरी
- साइबर जागरूकता की कमी
यह दिखाता है कि भारत में साइबर सुरक्षा की समस्या तकनीक से ज्यादा व्यवहार की है।
DoT की भूमिका: भारत की साइबर सुरक्षा में केंद्रीय कड़ी
भारत की संघीय व्यवस्था में पुलिसिंग राज्यों के अधीन है, जबकि टेलीकॉम और डिजिटल ढांचा केंद्र के पास। इसी कारण https://dot.gov.in/ की भूमिका भारत में साइबर सुरक्षा के लिए निर्णायक हो जाती है।
DoT की प्रमुख जिम्मेदारियाँ:
- टेलीकॉम नेटवर्क की सुरक्षा
- सेवा प्रदाताओं पर साइबर सुरक्षा मानक लागू करना
- CERT-In के साथ समन्वय
- 5G नेटवर्क सुरक्षा और एन्क्रिप्शन
- SIM KYC और डिजिटल धोखाधड़ी रोकथाम
डिजिटल इंडिया और साइबर सुरक्षा: भरोसे का सवाल
डिजिटल इंडिया की सफलता सिर्फ ऐप्स और प्लेटफॉर्म से नहीं, बल्कि डिजिटल भरोसे से तय होगी।नागरिक तभी डिजिटल सेवाओं से जुड़ेंगे जब उन्हें लगे कि उनका डेटा सुरक्षित है।
निष्कर्ष
भारत में साइबर सुरक्षा अब केवल आईटी मुद्दा नहीं, बल्कि डिजिटल शासन और नागरिक विश्वास का आधार है। DoT केवल टेलीकॉम नियामक नहीं, बल्कि भारत के डिजिटल ढांचे का साइबर संरक्षक है।जैसे-जैसे डिजिटल अर्थव्यवस्था बढ़ेगी, वैसे-वैसे मजबूत साइबर शासन भारत की विश्वसनीयता तय करेगा।











