Medicinal plants-इन औषधीय पौधों से होगी जमकर कमाई, वैज्ञानिकों ने किया है विकसित

Medicinal plants
👁️ 478 Views

Medicinal plants-दुनिया आयुर्वेद की तरफ लौट रही है। इस लिहाज से दुनिया भर की नजर भारत पर है। भारत में जड़ी बूटियों से देशी दवाईयां तो बनती ही हैं औषधीय पौधों से भी कई तरह की दवाईयां बनती हैं। यह तो हम सबको ही पता है कि औषधीय पौधों का इस्तेमाल कई तरह की बीमारियों के इलाज में किया जाता है। हाल ही में वन संपदा के वैज्ञानिकों ने 5 खास किस्म के औषधीय पौधों को जारी किया है। दावा है कि इन पौधों की खेती से खासकर पहाड़ के किसानों को कई गुणा लाभ हो सकता है।

Medicinal plants की ये किस्में हुई हैं लांच

भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (ICFRE) की वैरायटी रिलिजिंग कमेटी की बैठक कोयंबटूर में 1 सितंबर को हुई थी। केंद्रीय वन मंत्रालय के विशेष सचिव आईएफएस चंद्र प्रकाश गोयल की अध्यक्षता और ICFRE देहरादून के डीजी आईएफएस अरूण सिंह रावत की सह अध्यक्षता में हुई इस बैठक में Himalayan Forest Research Institute (HFRI) शिमला की तरफ से तीन महत्वपूर्ण उच्च मूल्य वाले शीतोष्ण औषधीय पौधों (high value temperate medicinal plants) की 05 किस्मों का प्रस्ताव दिया गया। HFRI के वैज्ञानिक डा. जगदीश सिंह और डा. संदीप शर्मा द्वारा विकसित इन वैरायटी पर पिछले डेढ़ दशकों से काम किया जा रहा था।

Medicinal plants
कोयबटूर में वैरायटी कमेटी की बैठक

डां. जगदीश और डा. संदीप ने कमेटी के सदस्यों को बताया कि पहले चरण में हिमाचल प्रदेश और लद्दाख, यूटी के भौगोलिक स्थानों की स्क्रीनिंग करके इन औषधीय पौधों के बेहतर आनुवंशिक स्टॉक की पहचान और चयन किया गया था। इसके अलावा मनाली के निकट जगतसुख में स्थित फील्ड रिसर्च स्टेशन में फील्ड जीन बैंक (FGB) की स्थापना और रखरखाव किया गया। दूसरे चरण में पहचान किए गए औषधीय पौधों को विभिन्न पर्यावरणीय हालात में उगा कर देखा गया।

ऑफर-https://amzn.to/3sPUeIk

Medicinal plants से इतनी हो सकती है कमाई

इन खास किस्मों को विकसित करने वाले वैज्ञानिक डा. जगदीश सिंह और डा. संदीप शर्मा के मुताबिक हिमाचल हिमालय के उच्च पहाड़ी समशीतोष्ण क्षेत्र के किसान पी. कुरोआ से 2,76000 रु प्रति हेक्टेयर, वी. जटामांसी से 1,61000 रु प्रति हेक्टेयर और एस. हेक्साड्रम से 2,83000 रु प्रति हेक्टेयर की कमाई कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें इन किस्मों की व्यवसायिक खेती करनी होगी। वैरायटी रिलिंजिंग कमेटी ने चर्चा के बाद पी. कुरोआ की दो किस्मों को एचएफआरआई-पीके-1 और एचएफआरआई-पीके-2, वी. जटामांसी की दो किस्में एचएफआरआई-वीजे-1 और एचएफआरआई-वीजे-2, और एस हेक्सैंड्रम की एक किस्म एचएफआरआई-एसएच-1 को मंजूरी दे दी।

Latest Posts

Breaking News
दिल्ली में 100 करोड़ का हेरोइन बरामद देखें वीडियो | दिल्ली में पकड़ा गया खलिस्तानी आतंकी | घूसखोर पंडित पर कोर्ट में Netflix ने क्या कहा | भारत में साइबर सुरक्षा क्यों चुनौती बनती जा रही है: डेटा संरक्षण कानून और DoT की भूमिका | हिंदू सम्मेलन में एकता का दिया गया खास संदेश | आरबीआई का मुआवजा ढांचाः क्या यह साइबर धोखाधड़ी से डर खत्म कर देगा ? | लेट्स इंस्पायर बिहार के बैनर तले पटना में यह खास आयोजन, साहित्य और विकास का तालमेल | दिल्ली नगर निगम को मिला नया अधिकार, ऐसे आएगी अब सारे कामों में तेजी | तीन शब्द, एक रणनीति: दिल्ली पुलिस साइबर अपराध को कैसे ‘पहले ही तोड़’ रही है? | भारत AI इम्पैक्ट समिट 2026ः AI की वैश्विक गवर्नेंस पर भारत की दावेदारी ! | CyHawk 3.0: दिल्ली पुलिस ने 627 करोड़ की साइबर ठगी का नेटवर्क तोड़ा | SIM Binding क्यों अचानक अनिवार्य हो गई? ₹50,000 करोड़ के डिजिटल फ्रॉड से सीधा कनेक्शन |
10-02-2026