बिहार का वह शहर जिसे राम की कर्मभूमि कहा जाता है, जहां ताड़का से जुड़ी है एक रहस्यमयी कथा

बिहार का यह शहर केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि रामायण से जुड़ी रहस्यमयी कथाओं और पौराणिक मान्यताओं के कारण भी विशेष महत्व रखता है।
राम की कर्मभूमि बिहार का बक्सर

भारत का लगभग हर शहर अपने भीतर इतिहास और आस्था की कोई न कोई कहानी समेटे हुए है, लेकिन बिहार का यह शहर पौराणिक दृष्टि से बेहद खास माना जाता है। मान्यता है कि यही वह स्थान है जहां राम और लक्ष्मण ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की थी। कहा जाता है कि लंका विजय के बाद भगवान राम ने लौटते समय यहां एक शिव मंदिर की स्थापना भी की थी। इतना ही नहीं, इस शहर में बहने वाला एक नाला आज भी लोगों की जिज्ञासा का केंद्र है, जिसके बारे में लोककथाओं में कहा जाता है कि राक्षसी ताड़का ने इसे अपने नाखूनों से खोदा था।

देश के शहरों के बारे में विस्तार से बताने की कड़ी में आज बात  पुराने शाहाबाद से 1990 में टूट कर अलग हुए बक्सर की .. यह जिला राजधानी पटना से 120 किलोमीटर की दुरी पर स्थित है …. गंगा नदी के तट पर बसे इस जिले का अपना अलग पौराणिक … ऐतिहासिक और राजनितिक महत्व रहा है..

सबसे पहले बात बक्सर के ऐतिहासिक अहमियत की बक्सर के कथकौली के मैदान में सन 1764  ई . में ऐतिहासिक युद्ध हुआ था जिसमे पुराने शाहाबाद के विद्रोहियों ने अंग्रेज सैनिकों पर विजय प्राप्त की थी ।इस युद्ध में अवध के नवाब सुजाउधौला को पटखनी देने में हिन्दुस्तानी लड़ाके सफल हुए थे … आज भी इस मैदान में पत्थरों के लगे शिलापट्ट उस युद्ध की गवाही देते हैं । … उस दौरान युद्ध में मारे गए अंग्रेज सैनिकों buxar biharको उनकी वर्दी व हथियार समेत दफ़न कर दिया जाता था । हालाकि प्रसाशनिक उपेक्षा की वजह से  मैदान में बने कब्रों को खोदकर चोर उस जमाने के महँगी धातुओं से बने हथियारों को निकाल कर बेच रहे हैं।  इसी तरह बक्सर के चौसा की लडाई मुग़ल बादशाह बाबर के पुत्र हुमायूं से लड़ी गयी थी …

ऐतिहासिक महत्व के अलावा बक्सर की पावन भूमि को मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान् राम की कर्म भूमि कही जाती है … यहाँ गुरु विश्वामित्र का आश्रम था .. यही भगवान् राम ने शिक्षा दीक्षा ग्रहण की .. साथ ही ताडका सुर नामक प्रसिद्ध राक्षसी का वध भी राम ने यही पर किया … गंगा नदी के किनारे बसा ये शहर छोटा बनारस के नाम से जाना जाता है … इसका कारण ये है की बनारस  के तर्ज पर यहाँ भी ऐसी कोई गली कोई मोहल्ला नहीं नहीं है जहाँ मंदिर ना हो .।  राम रेखा घाट, ब्रह्मपुर, अहिरौली, चौसा और पलासी आदि यहां के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से है। बक्सर गंगा नदी के तट पर स्थित है।

buxar bihar

पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान रामचन्द्र और लक्ष्मण ने अपने गुरू ऋषि विश्वामित्र के साथ जनकपुर मार्ग से होते हुए गंगा नदी पार की थी। वह तीनों सीता स्वयंवर के लिए जनकपुर जा रहे थे।buxar

इसी कारण यह स्थान धार्मिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। प्रत्येक वर्ष 14 जनवरी को मकर संक्रांति के अवसर पर यहां बहुत बड़े मेले का आयोजन किया जाता है। इस मेले को खिचड़ी मेला के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन करीबन 50,000 से भी अधिक लोग गंगा नदी में स्नान करते है जो कि रामरेखा घाट के नाम से प्रसिद्ध है। गंगा में स्नान करने का यह कार्यक्रम लगातार तीन दिनों तक चलता है।

खरिका: खरिका गांव राजपुर के दक्षिण-पश्चिम से लगभग 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह गांव 1857 ई. में बाबू कुंवर सिंह और ब्रिटिश सैनिकों के बीच हुए युद्ध की घटना के बाद सामने आया।

ब्रह्मपुर: बक्सर स्थित यह गांव विशेष रूप से प्राचीन ब्रह्मेश्‍वर मंदिर के लिए जाना जाता है। यह मंदिर मोहम्मद गजनवी के समय से यहां स्थित है।मुगल शासक अकबर के समय में राजा मान सिंह ने इस मंदिर का पुन: निर्माण करवाया था।

अहिरौली: बक्सर के उत्तर-पूर्व से लगभग पांच किलोमीटर की दूरी पर अहिरौली गांव है। यह गांव देवी अहिल्या के मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। पौराणिक कथा के अनुसार इसका सम्बध ईसा पूर्व काल से है। कहा जाता है कि गौतम ऋषि ने अपनी पत्‍नी को शाप दिया था जिस कारण वह पत्थर की बन गई थी। और वह पत्थर से पुन: स्त्री तभी बन सकती थी जब भगवान श्री राम इस जगह पर आए।

चौसा: यह जगह 1539 ई. में हुमायूं और शेरशाह के बीच हुए युद्ध के लिए प्रसिद्ध है। शेरशाह जब हुमायूं का पीछा कर रहा था, तब हुमायूं ने शेरशाह से बचने के लिए एक भिश्ती की सहायता ली थी। जिसने उसे गंगा नदी पार कराया था। भिश्ती की सेवा से प्रसन्न होकर हुमायूं ने उसे एक दिन के लिए अपना साम्राज्य सौप दिया था।

पलासी: यह जगह सन् 1757 ई. में ब्रिटिश सैनिकों और बंगाल के नवाब मीरकासिम के बीच हुए युद्ध के लिए जानी जाती है। यह युद्ध बक्सर शहर के पूर्व से छ: किलोमीटर की दूरी पर स्थित काथीकौली में हुआ था। वर्तमान समय में बक्सर शहर बक्सर जिले का मुख्यालय है।

रामेश्वर मंदिर :- जब भगवान् श्रीराम लंका के विज्योप्रांत लौट रहे थे तो राम रेखा घाट पर स्नान ध्यान और तप किया तथा यहाँ एक मंदिर बनवा कर अपने हाथ से उसमे एक शिव लिंग की स्थापना की जिसे रामेश्वर शिव लिंग कहा जाता है इसी मंदिर के बगल से एक विशाल नाला बहता है जिसे राक्षसी ताडका ने अपने नाखून से खोदा था

ब्रह्मपुर: बक्सर स्थित यह गांव विशेष रूप से प्राचीन ब्रह्मेश्‍वर मंदिर के लिए जाना जाता है। यह मंदिर मोहम्मद गजनवी के समय से यहां स्थित है।मुगल शासक अकबर के समय में राजा मान सिंह ने इस मंदिर का पुन: निर्माण करवाया था।

अहिरौली: बक्सर के उत्तर-पूर्व से लगभग पांच किलोमीटर की दूरी पर अहिरौली गांव है। यह गांव देवी अहिल्या के मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। पौराणिक कथा के अनुसार इसका सम्बध ईसा पूर्व काल से है। कहा जाता है कि गौतम ऋषि ने अपनी पत्‍नी को शाप दिया था जिस कारण वह पत्थर की बन गई थी। और वह पत्थर से पुन: स्त्री तभी बन सकती थी जब भगवान श्री राम इस जगह पर आए।

Support India Vistar

Latest Posts

BREAKING NEWS
दिल्ली में 100 करोड़ का हेरोइन बरामद देखें वीडियो | दिल्ली में पकड़ा गया खलिस्तानी आतंकी | UPI पेमेंट पर क्या है नया नियम: ₹2,000 से ज्यादा यूपीआई पेमेंट पर क्या आपके खाते से पैसे कटेंगे ? समझिए विस्तार से | Cyber Security पर BRICS में बड़ी चिंता, PM Modi ने बताया Technology के गलत इस्तेमाल का खतरा | Vetiver Grass क्या है? जम्मू में 2 लाख पौधों से मिट्टी का कटाव रोकने की CISF की मुहिम | आपके नाम पर फर्जी SIM तो नहीं? बायोमेट्रिक और e-KYC से ऐसे हो सकता है SIM Card Fraud | सपने में मृत व्यक्ति को देखना क्या संकेत देता है? बात करे, मुस्कुराए या कुछ दे तो जानें सपना फल | साइबर फ्रॉड कैसे रोकें: बैंक, पुलिस और DoT मिलकर कैसे बचा सकते हैं आपका पैसा | साइबर फ्रॉड के बाद बैंक खाता फ्रीज? GRM Portal से अकाउंट खुलवाने की प्रक्रिया जानें | APK File डाउनलोड करते ही खाली हो सकता है बैंक खाता? फोन में तुरंत जांचें ये 10 सेटिंग | मोबाइल रेडिएशन से कैंसर होता है ? जानिए सेहत पर इसके असर का सच | Aadhaar Update: आधार में क्या बदल सकते हैं घर बैठे, फोटो और मोबाइल नंबर बदलने का क्या है तरीका |
16-09-2026