एआई से साइबर खतरा बढ़ रहा है इस खबर को आप कई बार पढ़ चुके होंगे। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एआई से साइबर ठगी होती कैसे है? इस सवाल का जवाब आपको साइबर ठगी के सबसे नए तरीके से सुरक्षित बचा सकता है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी Ashish Kumar Chauhan ने उभरते AI आधारित साइबर खतरों को देखते हुए एक्सचेंज के पूरे नेटवर्क ढांचे की समीक्षा की जानकारी दी है। उन्होंने स्टॉक ब्रोकर्स से साइबर सुरक्षा को अपने कारोबार की मुख्य जिम्मेदारी बनाने और नए खतरों की पहचान व रोकथाम के लिए उद्योग स्तर पर एक समर्पित कार्यबल गठित करने का आह्वान भी किया है।
इस चेतावनी का सीधा संबंध निवेशकों की सुरक्षा से है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि NSE पर कोई साइबर हमला हुआ है। चिंता उन संभावित खतरों को लेकर है, जिनसे निपटने के लिए वित्तीय संस्थानों को पहले से तैयारी करनी होगी।
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AI की मदद से साइबर ठगी कैसे होती है?
पहले साइबर अपराधियों को बड़े पैमाने पर लोगों को ठगने के लिए काफी समय और मेहनत करनी पड़ती थी। AI की मदद से वे फर्जी संदेश तैयार करने, लोगों की जानकारी का इस्तेमाल करने और अलग-अलग व्यक्तियों को निशाना बनाने की प्रक्रिया तेज कर सकते हैं।
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इसके तीन प्रमुख तरीके हैं।
1. नकली आवाज और डीपफेक वीडियो से ठगी
AI की मदद से किसी व्यक्ति की आवाज जैसी लगने वाली नकली आवाज तैयार की जा सकती है। इसी तरह, डीपफेक तकनीक से ऐसा वीडियो बनाया जा सकता है जिसमें कोई व्यक्ति ऐसी बात कहता दिखाई दे, जो उसने वास्तव में नहीं कही।
उदाहरण के लिए, किसी व्यक्ति को उसके परिचित की आवाज में तत्काल पैसे भेजने के लिए कहा जा सकता है। इसी तरह, किसी कंपनी या वित्तीय विशेषज्ञ के नाम से फर्जी निवेश संदेश फैलाए जा सकते हैं।
बचाव का तरीका: आवाज सुनकर ही किसी की पहचान पर भरोसा न करें। पैसे भेजने से पहले उस व्यक्ति के पहले से उपलब्ध नंबर पर खुद फोन करके पुष्टि करें। निवेश संबंधी दावे कंपनी या संबंधित वित्तीय संस्था के आधिकारिक माध्यम से जांचें।
2. बैंक और निवेश के नाम पर फर्जी संदेश
AI की मदद से ऐसी ईमेल और मोबाइल संदेश तैयार किए जा सकते हैं, जिनकी भाषा और विवरण किसी वास्तविक बैंक या वित्तीय संस्था के संदेश जैसे लगें। इनमें खाते को बंद करने, केवाईसी अपडेट करने, संदिग्ध लेनदेन रोकने या निवेश का अवसर हाथ से निकलने का डर दिखाया जा सकता है।
इन संदेशों के साथ नकली वेबसाइट का लिंक भी भेजा जा सकता है। वहां लॉगिन करने पर आपकी बैंकिंग जानकारी या अन्य संवेदनशील विवरण अपराधियों के हाथ लग सकते हैं।
बचाव का तरीका: अनजान लिंक से बैंक खाते में लॉगिन न करें। बैंक की वेबसाइट या ऐप खुद खोलें। ओटीपी, पिन, पासवर्ड और अन्य गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें।
3. शेयर बाजार में निवेश के नाम पर धोखाधड़ी
शेयर बाजार में मुनाफे का लालच दिखाकर ठगी करने वाले अपराधी फर्जी निवेश सलाह, नकली विशेषज्ञों के वीडियो और झूठे लाभ के दावों का इस्तेमाल कर सकते हैं। AI से तैयार सामग्री किसी परिचित चेहरे या पेशेवर प्रस्तुति जैसी दिख सकती है, लेकिन इससे उसकी सत्यता साबित नहीं होती।
किसी कंपनी के नाम से निवेश की सलाह देने वाला वीडियो भी फर्जी हो सकता है। इसी तरह, निश्चित या असाधारण मुनाफे का दावा करने वाले संदेश निवेशकों को जल्दबाजी में पैसा लगाने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।
बचाव का तरीका: निवेश से पहले संबंधित मध्यस्थ या ब्रोकर का पंजीकरण जांचें। NSE, संबंधित कंपनी और नियामक के आधिकारिक माध्यमों से जानकारी की पुष्टि करें। किसी व्यक्ति के वीडियो, स्क्रीनशॉट या मुनाफे के दावे के आधार पर पैसा न लगाएं।
NSE की चेतावनी आम निवेशकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
आज शेयर बाजार का कारोबार डिजिटल प्रणालियों पर निर्भर है। स्टॉक एक्सचेंज, ब्रोकर, बैंक, डिपॉजिटरी, भुगतान सेवाएं, मोबाइल ऐप और बाहरी तकनीकी सेवा प्रदाता आपस में जुड़े हुए हैं।
ऐसी व्यवस्था में किसी एक संस्था की सुरक्षा में चूक का असर दूसरी सेवाओं पर भी पड़ सकता है। किसी ब्रोकर का खाता प्रभावित होने, निवेशकों की जानकारी चोरी होने या कारोबार से जुड़ी प्रणालियों में बाधा आने जैसी घटनाएं लोगों के पैसे, कारोबार और बाजार के प्रति भरोसे को प्रभावित कर सकती हैं।
इसीलिए NSE प्रमुख ने साइबर सुरक्षा को ब्रोकरों के कारोबार की मुख्य जिम्मेदारी बनाने पर जोर दिया है। इसका मतलब है कि सुरक्षा को सिर्फ तकनीकी विभाग का काम मानने के बजाय प्रबंधन, कर्मचारियों और संबंधित सेवा प्रदाताओं को भी इसकी जिम्मेदारी उठानी होगी।
AI आधारित खतरों के साथ-साथ भविष्य में क्वांटम कंप्यूटिंग से मौजूदा क्रिप्टोग्राफिक सुरक्षा पर पड़ सकने वाले संभावित प्रभावों की तैयारी भी महत्वपूर्ण है। यह एक भविष्यगत जोखिम है, जिसका आकलन संस्थानों को अपनी सुरक्षा योजनाओं में करना होगा।
AI साइबर फ्रॉड से बचने के लिए क्या करें?
आम मोबाइल और इंटरनेट उपयोगकर्ता कुछ जरूरी आदतों को अपनाकर ठगी का जोखिम कम कर सकते हैं।
- पैसे भेजने से पहले पुष्टि करें: परिचित की आवाज या वीडियो देखकर तुरंत भुगतान न करें। दूसरे माध्यम से संपर्क करके पहचान की पुष्टि करें।
- ओटीपी और पासवर्ड सुरक्षित रखें: बैंक या ब्रोकर के नाम पर संपर्क करने वाले किसी व्यक्ति को भी गोपनीय जानकारी न बताएं।
- अनजान लिंक से बचें: बैंक, निवेश या केवाईसी से जुड़े संदेशों में आए लिंक पर क्लिक करने के बजाय आधिकारिक ऐप या वेबसाइट खोलें।
- निवेश के झूठे वादों से सावधान रहें: निश्चित मुनाफे, तुरंत कमाई और जल्द पैसा लगाने के दबाव को खतरे के संकेत के रूप में देखें।
- खातों की सुरक्षा बढ़ाएं: जहां उपलब्ध हो, बहु-स्तरीय प्रमाणीकरण चालू रखें। मजबूत और अलग-अलग पासवर्ड इस्तेमाल करें तथा मोबाइल और ऐप को अपडेट रखें।
- संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई करें: बैंक खाते से अनधिकृत लेनदेन होने पर बैंक को तुरंत सूचना दें। भारत में साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत के लिए 1930 पर कॉल करें या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in का इस्तेमाल करें।
- AI के दौर में साइबर सुरक्षा सबकी जिम्मेदारी
- AI से जुड़े साइबर खतरे यह संकेत देते हैं कि अब किसी संदेश की भाषा, आवाज की समानता या वीडियो की विश्वसनीयता के आधार पर उस पर भरोसा करना पर्याप्त नहीं है। वित्तीय संस्थानों को अपने नेटवर्क, कर्मचारियों, बाहरी सेवा प्रदाताओं और सुरक्षा प्रणालियों की नियमित समीक्षा करनी होगी। आम लोगों को भी भुगतान और निवेश से पहले जानकारी की पुष्टि करने की आदत अपनानी होगी।
- NSE प्रमुख Ashish Kumar Chauhan की चेतावनी का महत्व इसी बात में है कि वित्तीय बाजार की सुरक्षा के लिए अलग-अलग संस्थानों के प्रयासों के साथ सामूहिक तैयारी भी जरूरी है। साइबर अपराधी तकनीक का इस्तेमाल करके ठगी के तरीके बदल सकते हैं, लेकिन जल्दबाजी से बचना, पहचान की पुष्टि करना और गोपनीय जानकारी सुरक्षित रखना आज भी आम लोगों के लिए अहम बचाव हैं।


