साइबर ठगी का शिकार होने से बचना है तो कुछ चीजें ठीक से समझनी होंगी। तमाम कोशिशों के बाद भी ट्रेडिंग और निवेश से जुड़े स्कैम साइबर क्रिमिनल की प्रमुख कार्यशैली बन गया है। हैदराबाद साइबर पुलिस के आंकड़े भी इस बात की पुष्टि करते हैं। साइबर ठगी का सबसे बड़ा कारण कुछ लालच हैं, जिनके चंगुल में आम आदमी आसानी से फंस जाता है।
हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस के आंकड़ो से पता लगता है कि शहर में साइबर ठगी से हुए कुल नुकसान में ₹16 करोड़ से अधिक की ठगी केवल ट्रेडिंग और निवेश फ्राड के जरिए ही हुई। यह साफ संकेत देता है कि भविष्य में इस तरह की साइबर ठगी के मामलों में वृद्धि होगी।
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क्या कहते हैं हैदराबाद के आंकड़े
हैदराबाद साइबर पुलिस के आंकड़े बताते हैं कि साइबर ठगी से हुए कुल ₹16 करोड़ के नुकसान में केवल ट्रेडिंग फ्रॉड के 11 मामले थे जिसमें कुल नुकसान ₹8.43 करोड़ का था। इसमें से रिकवरी सिर्फ ₹40.24 लाक की हुई। इसी तरह इन्वेस्टमेट फ्रॉड के 17 मामलो में ₹7.68 करोड़ का नुकसान और मात्र 9.20 लाख की रिकवरी हुई।
ये दोनों श्रेणियाँ मिलकर कुल साइबर धोखाधड़ी नुकसान का 92% हिस्सा बनाती हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि वित्तीय हेरफेर वाले घोटाले साइबर अपराधियों का मुख्य लक्ष्य क्षेत्र हैं।
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क्यों बढ़ रहा है यह घोटाला
अब आपके मन में भी सवाल उठ रहा होगा कि आखिर साइबर ठगी के इस तरह के घोटालो का मामला क्यों बढ़ रहा है। असल में साइबर अपराधी पीड़ित के भ्रम और मनोवैज्ञानिक शोषण को अपना हथियार बनाते हैं। इसके लिए गारंटीड मुनाफे का भ्रम दिया जाता है। वे नकली डैशबोर्ड दिखाते हैं जिनमें फर्जी रिटर्न दिखता है।
इस तरह की साइबर ठगी के लिए सोशल मीडिया पर ‘हाई यील्ड इन्वेस्टमेंट’ के विज्ञापन दिए जाते हैं। ऐसा माहौल बनाया जाता है कि आपको लगे कि गोल्डेन चांस छूट रहा है। व्हाट्सएप्प, टेलीग्राम के ग्रूप भी इसका माध्यम बनते हैं। इसके अलावा फर्जी बोनस, निकासी पर प्रतिबंध, हेऱफेर किए गए ग्राफिक चार्ट. रिलेशनशिप मैनेजर द्वारा भावनात्मक जाल का सहारा लिया जाता है।
फर्जी ट्रेडिंग ऐप और वेबसाइट की पहचान कैसे करें?
किसी ऐप पर मुनाफा दिखाई देने का अर्थ यह नहीं है कि निवेश वास्तविक है। ठग वैध कंपनियों जैसी दिखने वाली वेबसाइट और ऐप भी बना सकते हैं।
निवेश करने से पहले इन बातों का ध्यान रखें।
- निवेश कंपनी, ब्रोकर और संबंधित वित्तीय संस्था की जानकारी आधिकारिक स्रोत से जांचें।
- शेयर बाजार से जुड़े ब्रोकर या निवेश सलाहकार के पंजीकरण की पुष्टि भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी सेबी के आधिकारिक माध्यमों से करें।
- किसी अनजान व्यक्ति के भेजे गए लिंक से निवेश ऐप डाउनलोड न करें।
- मोबाइल पर एपीके फाइल भेजकर ऐप स्थापित करने के लिए कहने वालों से सावधान रहें।
- सोशल मीडिया पर दिखाई गई कमाई, मुनाफे के स्क्रीनशॉट या कथित ग्राहकों की प्रशंसा को प्रमाण न मानें।
- किसी दूसरे व्यक्ति के खाते में निवेश के नाम पर रकम भेजने से पहले उसकी वैधता जांचें।
- खाता खोलने, रकम निकालने या मुनाफा पाने के नाम पर बार-बार अतिरिक्त भुगतान मांगा जाए तो रुक जाएं।
याद रखें, किसी वेबसाइट पर सेबी का नाम या चिह्न दिखाई देने भर से उसकी वैधता साबित नहीं होती।
साइबर ठगी में फर्जी विज्ञापन और सोशल मीडिया की भूमिका
हैदराबाद पुलिस के दिए गए विवरण में सोशल मीडिया प्रोफाइल और भुगतान वाले विज्ञापनों की निगरानी का भी उल्लेख है। आंकड़ों के मुताबिक, पुलिस ने 1,457 संदिग्ध प्रोफाइल की पहचान की, जिन पर अवैध सट्टेबाजी और धोखाधड़ी वाली निवेश साइटों को बढ़ावा देने का संदेह था। गेमिंग, सट्टेबाजी और निवेश धोखाधड़ी से जुड़े 2,603 भुगतान वाले विज्ञापनों की भी पहचान की गई। इन मंचों के प्रचार से जुड़े लोगों के खिलाफ नौ प्राथमिकी दर्ज की गईं।
ये आंकड़े बताते हैं कि किसी विज्ञापन का इंटरनेट पर दिखाई देना उसकी विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। निवेश से जुड़ा फैसला लेने से पहले कंपनी, उसके पंजीकरण और निवेश की शर्तों की स्वतंत्र रूप से जांच करना जरूरी है।
ठगी का शिकार होने पर क्या करें?
अगर आपने किसी फर्जी ट्रेडिंग ऐप या निवेश योजना में पैसा गंवा दिया है, तो जल्द कार्रवाई करना जरूरी है।
1. तुरंत 1930 पर कॉल करें। यह भारत में साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत के लिए राष्ट्रीय हेल्पलाइन है। रकम के हस्तांतरण के बाद जल्द शिकायत करने से संबंधित बैंक खातों में उपलब्ध रकम रोकने की कार्रवाई में मदद मिल सकती है। रकम वापस मिलने की गारंटी नहीं होती।
2. राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत करें। आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।
3. अपने बैंक को सूचना दें। संबंधित बैंक या भुगतान सेवा को तुरंत बताएं। लेनदेन का विवरण और शिकायत संख्या सुरक्षित रखें।
4. सबूत मिटाएं नहीं। ठगों के संदेश, फोन नंबर, बैंक खाते, भुगतान की रसीदें, वेबसाइट का पता और ऐप से जुड़े स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखें।
5. अतिरिक्त भुगतान न करें। अगर कोई व्यक्ति रकम वापस दिलाने के नाम पर शुल्क मांगता है, तो पहले उसकी पहचान और दावे की पुष्टि करें। ठगी के बाद वसूली के नाम पर भी दूसरी ठगी हो सकती है।
निवेश धोखाधड़ी रोकने के लिए क्या जरूरी है?
निवेश से जुड़े साइबर अपराध रोकने के लिए पुलिस और वित्तीय संस्थानों के बीच त्वरित सूचना साझा करना जरूरी है। संदिग्ध बैंक खातों की पहचान, फर्जी विज्ञापनों पर कार्रवाई और सीमा पार काम करने वाले अपराधियों की जांच भी अहम है।
नागरिकों के स्तर पर निवेश संबंधी जानकारी की पुष्टि, अनजान ऐप से दूरी और संदिग्ध भुगतान की तुरंत शिकायत सबसे उपयोगी कदम हैं। निवेश से पहले यह समझना जरूरी है कि पैसा किस संस्था को दिया जा रहा है और उसे किस नियम के तहत निवेश किया जाएगा।
ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी का सबसे बड़ा संकेत अक्सर असाधारण मुनाफे का वादा होता है। कोई भी ऐप, समूह या कथित विशेषज्ञ लगातार लाभ की गारंटी नहीं दे सकता। इसलिए जल्दबाजी में निवेश करने के बजाय पहले जांच करें। अगर योजना की जानकारी अस्पष्ट है या रकम निकालने के लिए बार-बार अतिरिक्त भुगतान मांगा जा रहा है, तो पैसा भेजने से रुक जाना ही बेहतर है।










