साइबर ठगों के निशाने पर क्यों रहते हैं बुजुर्ग ? जानिए साइबर ठगी के ये तरीके, ऐसे करें बचाव

हैदराबाद में जनवरी 2025 से जुलाई 2026 के बीच वरिष्ठ नागरिकों से जुड़े 403 साइबर ठगी मामलों में ₹102.02 करोड़ का नुकसान हुआ। जानिए साइबर ठग बुजुर्गों को कैसे निशाना बनाते हैं और उनसे बचाव कैसे करें
cyber fraud news: बुजुर्ग साइबर ठगी और डिजिटल अरेस्ट स्कैम से बचाव

cyber fraud news में अक्सर बुजुर्गों से करोड़ो रुपये ठगने की बात सामने आती है। cyber fraud news में अक्सर शिकार होने वाले की पहचान बनाने वाले इन बुजुर्गोंं की सुरक्षा ज्यादा मुश्किल नहीं है। इसके लिए बस कुछ उपायों पर ध्यान देना होगा। हैदराबाद पुलिस के अनुसार जनवरी 2025 से जुलाई 2026 के बीच cyber fraud news में आने वाले बुजुर्ग 102.02 करोड़ रुपये गंवा चुके हैं।

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बुजुर्ग साइबर ठगी का खतरा तेजी से गंभीर होता जा रहा है। साइबर ठग अब सिर्फ बैंकिंग फ्रॉड या OTP के जरिए लोगों को निशाना नहीं बना रहे, बल्कि ट्रेडिंग के नाम पर निवेश का लालच और डिजिटल अरेस्ट के नाम पर कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर भी बड़ी रकम ठग रहे हैं।

हैदराबाद पुलिस का यह आंकड़ा परिवारों के लिए भी चेतावनी है। बुजुर्गों को साइबर ठगी से बचाने के लिए उन्हें डराने के बजाय ठगी के नए तरीकों की जानकारी देना और जरूरत पड़ने पर तुरंत मदद उपलब्ध कराना जरूरी है।

बुजुर्ग साइबर ठगी के निशाने पर क्यों रहते हैं?

साइबर ठग ऐसे लोगों को निशाना बनाने की कोशिश करते हैं जिनके पास बचत, पेंशन या निवेश के रूप में रकम हो सकती है। वरिष्ठ नागरिकों के मामले में ठग कई बार तकनीकी जानकारी से ज्यादा भरोसे और डर का फायदा उठाते हैं।

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किसी निवेश योजना में अधिक मुनाफे का लालच हो या पुलिस अधिकारी बनकर गिरफ्तारी की धमकी, ठग बातचीत को इस तरह आगे बढ़ाते हैं कि पीड़ित जल्दबाजी में फैसला ले ले।

कई वरिष्ठ नागरिक साइबर फ्रॉड का शिकार होने के बाद परिवार को बताने में भी झिझक सकते हैं। यही देरी ठगों को दोबारा संपर्क करने का मौका दे सकती है।

वरिष्ठ नागरिकों से साइबर ठगी के आंकड़े

हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस के अनुसार जनवरी 2025 से जुलाई 2026 के बीच दर्ज मामलों की तस्वीर इस प्रकार है:

विवरणआंकड़ा
कुल साइबर फ्रॉड मामले403
कुल वित्तीय नुकसान₹102.02 करोड़
पीड़ित आयु वर्ग60 वर्ष और उससे अधिक
अवधिजनवरी 2025 से जुलाई 2026
प्रमुख धोखाधड़ीट्रेडिंग फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट स्कैम
स्रोतहैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस

करीब 18 महीनों में ₹102.02 करोड़ का नुकसान बताता है कि बुजुर्गों को निशाना बनाने वाली ऑनलाइन ठगी परिवार और वित्तीय सुरक्षा दोनों के लिए गंभीर चिंता है।

साइबर ठगी के ये तरीके बुजुर्गों को बना रहे हैं निशाना

साइबर अपराधी एक ही तरीके से ठगी नहीं करते। वे पीड़ित की स्थिति और प्रतिक्रिया के हिसाब से कहानी बदलते हैं। बुजुर्गों से जुड़े मामलों में ट्रेडिंग फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट स्कैम खास तौर पर सामने आए हैं।

1. ट्रेडिंग फ्रॉड

ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर होने वाली ठगी में अपराधी लोगों को जल्दी और बड़ा मुनाफा कमाने का भरोसा देते हैं।

कई बार नकली ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म, ऐप या निवेश समूह के जरिए संपर्क किया जाता है। शुरुआत में निवेश पर लाभ दिखाकर पीड़ित का भरोसा जीता जा सकता है। इसके बाद उससे बार-बार ज्यादा रकम निवेश करने के लिए कहा जाता है।

जब पीड़ित अपनी रकम निकालने की कोशिश करता है तो टैक्स, प्रोसेसिंग फीस या दूसरे शुल्क के नाम पर अतिरिक्त पैसा मांगा जा सकता है।

इसके बाद ठगी का दूसरा चरण शुरू हो सकता है। अपराधी खुद को “रिकवरी एजेंट” बताकर पहले गंवाई गई रकम वापस दिलाने का दावा करते हैं और फिर अतिरिक्त भुगतान मांगते हैं।

ट्रेडिंग फ्रॉड से कैसे बचें?

किसी भी ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर पैसा लगाने से पहले उसकी वैधता और संबंधित नियामकीय स्थिति की जांच करें।

सोशल मीडिया, WhatsApp ग्रुप या अनजान व्यक्ति द्वारा बताए गए निवेश प्रस्ताव पर सिर्फ मुनाफे के दावे के आधार पर पैसा न लगाएं।

2. डिजिटल अरेस्ट स्कैम

Digital Arrest Scam में ठग खुद को पुलिस या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर फोन या वीडियो कॉल करते हैं।

पीड़ित को बताया जाता है कि उसका नाम मनी लॉन्ड्रिंग, अवैध लेन-देन या किसी आपराधिक मामले में सामने आया है। इसके बाद गिरफ्तारी या कानूनी कार्रवाई का डर पैदा किया जाता है।

ठग पीड़ित को लगातार फोन या वीडियो कॉल पर बनाए रख सकते हैं और उसे किसी कथित “सुरक्षित खाते” में पैसा ट्रांसफर करने के लिए मजबूर करने की कोशिश करते हैं।

यहां अपराधी का सबसे बड़ा हथियार तकनीक नहीं बल्कि डर और जल्दबाजी है।

डिजिटल अरेस्ट स्कैम में ये संकेत पहचानें

  • फोन करने वाला खुद को पुलिस या सरकारी अधिकारी बताए
  • गिरफ्तारी की धमकी दी जाए
  • वीडियो कॉल पर पूछताछ का दबाव बनाया जाए
  • बैंक खाते या लेन-देन को लेकर डराया जाए
  • तुरंत पैसा ट्रांसफर करने के लिए कहा जाए
  • किसी खाते को “सुरक्षित खाता” बताकर रकम भेजने को कहा जाए

ऐसी स्थिति में फोन पर किसी दबाव में पैसा ट्रांसफर नहीं करना चाहिए।

बुजुर्गों को साइबर ठगी से कैसे बचाएं?

साइबर सुरक्षा सिर्फ बुजुर्गों की जिम्मेदारी नहीं है। परिवार के युवा सदस्य भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

बुजुर्गों को इन बातों की जानकारी दें

पहला, पुलिस, बैंक या सरकारी अधिकारी के नाम पर आए किसी फोन पर तुरंत विश्वास न करें।

दूसरा, OTP, PIN, CVV, पासवर्ड या बैंकिंग जानकारी किसी के साथ साझा न करें।

तीसरा, ऑनलाइन निवेश में असामान्य रूप से ज्यादा मुनाफे के दावे से सावधान रहें।

चौथा, किसी वीडियो कॉल पर डराकर या दबाव डालकर पैसा भेजने के लिए कहा जाए तो कॉल काट दें और परिवार के सदस्य को बताएं।

पांचवां, किसी अनजान ऐप को इंस्टॉल करने या अनजान लिंक खोलने से पहले उसकी विश्वसनीयता जांचें।

छठा, साइबर फ्रॉड होने पर शर्मिंदगी या डर के कारण मामला छिपाएं नहीं।

साइबर फ्रॉड होने पर तुरंत क्या करें?

अगर बुजुर्ग साइबर ठगी का शिकार हो गए हैं तो सबसे महत्वपूर्ण बात है देरी न करना

वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर तुरंत शिकायत की जा सकती है।

इसके साथ बैंक या संबंधित वित्तीय संस्था को भी तुरंत जानकारी दें। लेन-देन से संबंधित जानकारी उपलब्ध रखें।

पीड़ित को निम्न डिजिटल सबूत सुरक्षित रखने चाहिए:

  • बैंक ट्रांजैक्शन की जानकारी
  • UTR या ट्रांजैक्शन नंबर
  • ठग का मोबाइल नंबर
  • WhatsApp चैट
  • SMS और ईमेल
  • स्क्रीनशॉट
  • संदिग्ध वेबसाइट या ऐप की जानकारी
  • वीडियो कॉल या अन्य उपलब्ध रिकॉर्ड

जितनी जल्दी शिकायत की जाती है, उतनी जल्दी संबंधित एजेंसियों तक जानकारी पहुंचाई जा सकती है।

बुजुर्गों को बार-बार ठगी से कैसे बचाएं?

एक बार साइबर फ्रॉड का शिकार होने के बाद भी मामला खत्म नहीं होता। अपराधी दोबारा संपर्क कर सकते हैं।

वे खुद को पुलिस अधिकारी, बैंक कर्मचारी या रिकवरी एजेंट बताकर यह दावा कर सकते हैं कि वे पहले गंवाई गई रकम वापस दिला सकते हैं।

ऐसे किसी व्यक्ति को दोबारा पैसा नहीं देना चाहिए।

परिवार को भी यह समझना जरूरी है कि साइबर ठगी के बाद बुजुर्ग को दोष देने के बजाय उन्हें सहयोग दिया जाए। शर्मिंदगी और डर के कारण शिकायत में देरी होने से नुकसान बढ़ सकता है।

लिस और बैंकों की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण है?

हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस के अनुसार जागरूकता अभियान, त्वरित रिपोर्टिंग और साइबर फ्रॉड नेटवर्क पर निगरानी ऐसे मामलों से निपटने में महत्वपूर्ण हैं।

पुलिस ट्रेडिंग फ्रॉड नेटवर्क और डिजिटल अरेस्ट स्कैम से जुड़े मॉड्यूल पर निगरानी के साथ बैंकों और पेमेंट गेटवे के सहयोग से संदिग्ध खातों पर कार्रवाई कर सकती है।

ऐसे मामलों में तेज सूचना साझा करना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ठगी की रकम अलग-अलग खातों और माध्यमों के जरिए आगे भेजी जा सकती है।

वरिष्ठ नागरिकों के लिए साइबर सुरक्षा के 10 जरूरी नियम

  1. अनजान व्यक्ति की बात पर तुरंत विश्वास न करें।
  2. OTP, PIN, CVV और पासवर्ड साझा न करें।
  3. पुलिस या सरकारी अधिकारी के नाम पर पैसे न भेजें।
  4. “सुरक्षित खाते” में पैसा ट्रांसफर करने की बात पर भरोसा न करें।
  5. ऑनलाइन निवेश में असामान्य मुनाफे के दावे से सावधान रहें।
  6. अनजान ऐप डाउनलोड न करें।
  7. संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें।
  8. बैंकिंग अलर्ट को नजरअंदाज न करें।
  9. फ्रॉड होने पर परिवार को तुरंत जानकारी दें।
  10. वित्तीय साइबर फ्रॉड होने पर 1930 पर तुरंत शिकायत करें।

परिवार कैसे रखे बुजुर्गों का ख्याल?

बुजुर्गों को साइबर ठगी से बचाने का सबसे अच्छा तरीका उन्हें डिजिटल सेवाओं से दूर करना नहीं, बल्कि सुरक्षित इस्तेमाल सिखाना है।

परिवार समय-समय पर उनसे पूछ सकता है कि कोई अनजान व्यक्ति निवेश, बैंक खाते, पुलिस कार्रवाई या किसी सरकारी मामले को लेकर संपर्क तो नहीं कर रहा।

बैंकिंग और निवेश से जुड़े बड़े फैसलों में परिवार का भरोसेमंद सदस्य जानकारी की स्वतंत्र पुष्टि कर सकता है।

सबसे जरूरी बात यह है कि बुजुर्गों को यह भरोसा दिया जाए कि अगर उनसे गलती से कोई भुगतान हो भी गया है तो वे तुरंत परिवार को बता सकते हैं। इससे शिकायत करने में देरी कम हो सकती है।

₹102 करोड़ का नुकसान परिवारों के लिए चेतावनी

हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस के अनुसार जनवरी 2025 से जुलाई 2026 के बीच वरिष्ठ नागरिकों से जुड़े 403 मामलों में ₹102.02 करोड़ का नुकसान हुआ।

ट्रेडिंग फ्रॉड में लालच और डिजिटल अरेस्ट स्कैम में डर का इस्तेमाल किया गया। दोनों तरीकों में साइबर ठग पीड़ित के भरोसे और मनोवैज्ञानिक दबाव का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं।

इसलिए बुजुर्ग साइबर ठगी से बचाव सिर्फ एक व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं है। परिवार, बैंक, पुलिस और डिजिटल सेवाओं से जुड़े संस्थानों को मिलकर जागरूकता बढ़ानी होगी।

अगर किसी बुजुर्ग के साथ साइबर फ्रॉड हो जाए तो सबसे जरूरी तीन कदम हैं: घबराएं नहीं, परिवार को बताएं और 1930 पर तुरंत रिपोर्ट करें।

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inspector raman kumar
इंस्पेक्टर रमण कुमार सिंह,दिल्ली पुलिस में बतौर इंस्पेक्टर तैनात है । वे दिल्ली के कई पुलिस थानों के साथ साथ साइबर पुलिस स्टेशन के थानाध्यक्ष रहे है । वे साइबर जागरूकता के लिए साइबर सेफ व्हाट्सएप्प ग्रुप और बी द पुलिस नाम से फेसबुक पेज और फेसबुक ग्रुप के संचालक है ।

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10-08-2026