साइबर अपराधी लगातार नए तरीके अपना रहे हैं। दिल्ली की Central District की Cyber Police ने एक ऐसे गिरोह का खुलासा किया है जो फर्जी मोबाइल ऐप के जरिए लोगों के फोन का कंट्रोल हासिल कर उनके बैंक खातों से पैसे निकाल रहा था। यह मामला FIR No. 58/25 दिनांक 29.07.2025 से जुड़ा है, जिसमें शिकायतकर्ता के साथ ₹1,20,999/- की ठगी हुई थी।
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Fake APK Cyber Fraud: कैसे हुआ पूरा फ्रॉड?
पीड़ित को एक अनजान व्यक्ति का कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को बिजली विभाग का कर्मचारी बताया और कहा कि तुरंत भुगतान नहीं किया तो बिजली कनेक्शन काट दिया जाएगा। इसके बाद “Customer Support APK” नाम का एक मोबाइल ऐप WhatsApp पर भेजा गया और इंस्टॉल करने के लिए कहा गया।
जैसे ही ऐप इंस्टॉल हुआ, ठगों ने फोन का पूरा कंट्रोल हासिल कर लिया और कई डिजिटल ट्रांजेक्शन के जरिए ₹1,20,999/- निकाल लिए।
डीसीपी रोहित राजबीर सिंह के मुताबिक इस केस की जांच एसीपी पदम सिंह राणा की निगरानी और साइबर थाने के एसएचओ इंसपेक्टर योगराज दलाल के नेतृत्व में एसआई रणविजय सिंह आदि की टीम ने किया। जांच के दौरान उत्तर प्रदेश के देवरिया से अभय साहनी नामक शख्स को गिरफ्तार किया गया। उसके साथ उमेश रजज्क को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका था।
क्या था आरोपियों का नेटवर्क?
आरोपी Telegram IDs के जरिए फर्जी APK बेचते थे। एक APK की कीमत लगभग ₹4,000/- रखी गई थी। पूछताछ में पता चला कि आरोपी 40–50 malicious APK बेच चुके थे, 20–25 लोगों को ठग चुके थे। APK इस तरह बनाए जाते थे कि एंटीवायरस पकड़ न सके
आरोपी ने यह तकनीक YouTube, Telegram और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से सीखी थी।
बरामदगी (Recovery Details)
पुलिस ने आरोपी के पास से बरामद किया:
- 11 मोबाइल फोन (05 iPhone, 03 Google Pixel, 03 Android)
- 11 डेबिट कार्ड (09 Jio Payment Bank, 02 NSDL Payment Bank)
- Ledger Nano S Plus crypto hardware wallet
- 08 SIM कार्ड
- एक कार (भाई के नाम पर खरीदी गई, जांच जारी)