नींद में मिलेगा आपके मुश्किल सवाल का जवाब जानिए कैसे

कई बार जिन सवालों का जवाब दिनभर सोचने पर नहीं मिलता, वह नींद में अचानक साफ हो जाता है। क्या यह संयोग है या दिमाग की कोई खास प्रक्रिया?
नींद में मुश्किल सवाल का जवाब मिलने की अवधारणा को दर्शाती प्रतीकात्मक तस्वीर
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क्या आपका सामना मुश्किल सवालों से हो रहा है ? अगर हां तो नींद लीजिए क्योंकि नींद आपके मुश्किल सवालों का जवाब तलास कर दे देती है। दैनिक हिंदुस्तान में एजेंसी के हवाले छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक अध्ययन में यह साबित हुआ है कि मुश्किल सवालों का हल निकालने में यह मददगार होता है।

क्या नींद में सच में जवाब मिल सकते हैं?

अमेरिका स्थित नार्थ वेस्टर्न विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने अपने अनोखे अध्ययन में यह साबित किया है कि सपने देखना कल्पना नहीं, बल्कि परेशानियों को दूर करने का तरीका भी हो सकता है। विशेषज्ञों ने पाया है कि जब हम सोते हैं तो दिमाग तार्किक पाबंदियों से आजाद हो जाता है। नींद में दिमाग एक ऐसी रचनात्मक प्रक्रिया जोड़ता है जो होश में सोच ही नहीं पाते हैं।

सपनों और आइडिया के बीच क्या संबंध है?

विशेषज्ञों ने हजार से ज्यादा ऐसे लोगों पर अध्ययन किया जिन्हें ल्यूसिक ड्रीम आते थे। यानि वह स्थिति जिसमें सपने में पता होता है कि सपना देख रहे हैं। इन लोगों को कुछ मुश्किल पहेलियां दीं गईं। हर पहेली को सुलझाते समय बैकग्राउंड में एक खास धुन बजाई गई जिससे लोग गहरी नींद में सो गए। गहरी नींद में जाने के बाद वैज्ञानिकों ने फिर से वही धुन बजाई।

यह एक संकेत की तरह था जिसने सोते हुए दिमाग को उस पहेली पर वापस काम करने के लिए उकसाया। जिन लोगों ने उन धुनों को सुनकर पहेली के बारे में सपने देखे उनका पहेली सुलझाने की संभावना 40 फीसदी बढ़ गई।

आजादी लीक से हटकर सोचने की

विशेषज्ञ मानते हैं कि जागते समय हम लॉजिक में फंसे रहते हैं। सपने हमें लीक से हटकर सोचने की आजादी देते हैं। खास आवाजों के लिए दिमाग को सोते समय किसी खास समस्या पर काम करने के लिए टारगेट किया जा सकता है।

सोने से पहले सवाल सोचने की तकनीक

विशेषज्ञों के मुताबिक सिर्फ अच्छी नींद काफी नहीं है बल्कि उस समस्या से जुड़ा सपना देखना हल निकालने के लिए ज्यादा जरूरी है। जब दिमाग सपने में उस चुनौती पर काम करता है, तो अगली सुबह जवाब आसान लगने लगता है।

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